पश्चिम बंगाल सहित देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी आए भी नहीं है कि उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है. यूपी में आधी महिला आरक्षण बहाने बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए सड़क से सदन तक सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. सपा को 'महिला विरोधी' कठघरे में खड़े की कवायद में बीजेपी जी-जान से जुट गई है.
पीएम मोदी ने बुधवार को गंगा एक्सप्रेस-वे के बहाने यूपी में विकास की सौगात के साथ-साथ आधी आबादी को साधते नजर आए. वहीं, सीएम योगी ने गुरुवार को विधानसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान सपा को महिला आरक्षण विरोधी कठघरे में खड़े करते हुए गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई. इस तरह योगी ने एक तीर से कई निशाना साधते नजर आए.
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर चर्चा के लिए एक दिन का विशेष विधानमंडल सत्र रखा गया है. सीएम योगी इस सत्र के जरिए महिला कल्याण और सशक्तीकरण से जुड़े अपने एजेंडे को मजबूती देने के साथ-साथ सपा को घेरते हुए नजर आए. एक तरह से बीजेपी ने मिशन-2027 का बिगुल फूंक दिया है और अब सड़क से सदन तक आक्रामक तेवर अपनाए रखने के संकेत दे दिए हैं?
सपा को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने का दांव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनात ने सपा को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने के लिए सड़क से सदन तक मोर्चा खोल रखा है. लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने के बाद सीएम योगी लखनऊ की सड़कों पर उतरकर सपा के खिलाफ नारे बाजी करते नजर आए थे. यह पहली बार है, जब योगी आदित्यनाथ किसी मुद्दे पर सड़क पर उतरे थे. अब गुरुवार को विधानसभा के सदन में जिस तरह से महिला आरक्षण के बहाने सपा को कठघरे में खड़े करते नजर आए, उससे साफ है कि बीजेपी का मुख्य फोकस क्या रहने वाला है.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा को जन्मजात महिला विरोधी करार दिया और कहा कि इनके रग-रग में नारी का अपमान है. सात ही उन्होंने कहा कि यह देखकर के हमें आश्चर्य होता है कि गिरगिट की तरह रंग कैसे रंग बदला जाता है? सीएम योगी ने कहा कि जब भी समाजवादी पार्टी को प्रदेश के अंदर सत्ता में रहने का अवसर मिला, तब महिला संबंधी अत्याचार और क्रूरता की हदें पार हुई हैं. वह जग जाहिर है.
योगी ने कहा कि कांग्रेस और सपा सत्ता में रही हैं, लेकिन महिला आरक्षण को लागू नहीं किया और जब पीएम मोदी आधी आबादी को उनके अधिकार देने का काम कर रहे हैं, तो उसमें अड़ंगा डालने का काम किया. सप सरकार में शाम के समय महिलाएं घर से बाहर नहीं निकला करती थीं. उस जमाने में अच्छे घरों की लड़कियां यूपी में नहीं पढ़ पाती थीं और घरवाले उनको बाहरी राज्यों में पढ़ने के लिए भेजते थे. आज हमारी सरकार में महिलाओं को पूरी सुरक्षा है। वे शान से यहां पढ़ाई और नौकरी कर रही हैं. इस तरह सीएम योगी सपा को 'महिला विरोधी' बताने की कवायद करते नजर आए.
गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाकर दिया संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण पर चर्चा करते हुए गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाकर एक तीर से दो निशाने साधे. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जानता है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय एक स्लोगन ही बन गया था कि देख सपाई, बिटिया घबराई'. योगी ने कहा कि जो'काले कर्मों से अपने महल सजाते हैं, वहीं इतिहास में कलंक बन जाते हैं.योगी ने कहा कि स्टेट गेस्ट हाउस कांड हो या प्रदेश के अंदर अलग-अलग समय में इनके नेताओं के महिला विरोधी आचरण सबके सामने हैं.
सपा सरकार के दौरान 1995 में हुए गेस्ट कांड की याद दिलाते हुए सीएम योगी ने कहा कि मुझे 1995 की वह घटना भी याद है जब स्टेट गेस्ट हाउस में बसपा प्रमुख मायावती के साथ सपा नेताओं ने अभद्रता की थी. स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी अपनी जान पर खेलकर सपा के गुंडों से भिड़े थे.तब जाकर बसपा अध्यक्ष की जान बच पाई थी. इस बहाने सीएम योगी ने सपा को महिला विरोधी ही नहीं बल्कि दलित विरोधी कठघरे में भी खड़े करते नजर आए, क्योंकि उन्होंने इस बात को जोर देकर कहा कि यूपी में पहली दलित महिला सीएम बनी तो उनके साथ कैसा व्यवहार सपा ने किया. इस तरह दलित समाज को भी सियासी संदेश देते नजर आए.
शाहबानो और पूजा पाल के बहाने दिया संदेश
यूपी में सपा और कांग्रेस का गठबंधन है, जिसके लिए योगी के निशाने पर दोनों ही दल रहे. सीएम योगी ने कहा कि एक गुंडा और माफिया के सामने सपा के नेता किस तरह नतमस्तक होते थे, यह सब जानते हैं, सपा के ही सरकार में विधायक पूजा पाल के पति की हत्या उस माफिया ने कर दी थी. सपा के नेताओं ने पूजा पाल के आंसू तक पोंछने की जहमत नहीं उठाई. जेल की यात्रा कर रहे आजम खान, पूर्व सांसद एसटी हसन और मुंबई में अबू आजमी के महिला विरोधी बयान अक्सर सामने आते रहते हैं.
सीएम योगी ने शाहबानो प्रकरण का भी जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को उस महिला का शाप मिला हुआ है. यही वजह से 40 साल हो गए, आज तक कभी यूपी में कांग्रेस की सरकार नहीं बन पाई. कांग्रेस बंजर होती जा रही है. सपा के लोग भी इसी रास्ते पर चल रहे हैं. तीन तलाक के मुद्दे पर भी सपा और कांग्रेस का असली रूप देखने को मिला. तीन तलाक बिल का भी इन लोगों ने विरोध किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिराने की खुशी में सपा और कांग्रेस नेताओं ने एक दूसरे को बधाई दी थी, इसके विजुअल भी सामने आए थे. इस तरह कांग्रेस और सपा दोनों को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने की कवायद करते नजर आए.
यूपी में महिला वोटों को साधने की कवायद
महिला आरक्षण के मुद्दे पर बुलाया विधानमंडल का विशेष सत्र 2027 के विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सभी राजनीतिक दल महिला केंद्रित योजनाओं, सुरक्षा और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को अपने-अपने तरीके से पेश करने की तैयारी में हैं. यही वजह रही कि सदन के विशेष सत्र को सीएम योगी ने अपनी रणनीतियों को मजबूत करने का मंच बनाया और सपा-कांग्रेस को महिला और दलित विरोधी भी बताने की कोशिश की.
अखिलेश के पीडीए का काउंटर प्लान
सपा 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सियासी मात देने के लिए पीडीए पर अपना फोकस कर रखा है. इसके अलावा महिलाओं को साधने के लिए बड़े दांव चले हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वादा किया है कि हम सत्ता में आएंगे तो महिलाओं को 40 हजार रुपये सलाना देंगे. साथ ही दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यकों को साधने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटे हैं. इन तीनों वोटों के सहारे 2024 में बीजेपी को मात देने में सफल रहे थे, जिसके चलते 2027 में इसी दांव को आजमाने के फिराक में है.
सपा की रणनीति को देखते हुए योगी ने अखिलेश के पीडीए पर भी सबसे ज्यादा चोट करने का दांव चला, जिसके लिए गेस्ट हाउस कांड और राजू पाल की हत्या की याद दिलाकर दलित और पिछड़ों को संदेश दिया तो सपा सरकार में महिला उत्पीड़न की याद दिलाकर आधी आबादी को सियासी संदेश दिया. इतना ही नहीं योगी ने यह भी बताने की कोशिश की, उनकी सरकार में महिला सुरक्षा का खास ख्याल रखा जा रहा है.