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दुबई की तमन्ना, पहले दिखाए रातोंरात मालामाल होने के सपने, फिर बैंक खाता कर दिया खाली

गुरुग्राम में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें से एक दुबई की महिला है. महिला आरोपी का नाम तमन्ना है. ये लोग लोगों को फेक इनवेस्टमेंट से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक का शिकार बनाते थे. इसके लिए वे विदेशी नंबर को स्थानीय नंबर में बदलने के लिए सिम बॉक्स यूज करते थे.

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विदेशी नंबर को सिम बॉक्स के जरिए स्थानीय नंबर में बदलते थे. (Photo: Unsplash)
विदेशी नंबर को सिम बॉक्स के जरिए स्थानीय नंबर में बदलते थे. (Photo: Unsplash)

गुरुग्राम से पुलिस ने साइबर ठगी मामले में बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने मंगलवार को बताया है कि उन्होंने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें के एक दुबई में रहने वाली महिला हैं और उसका नाम तमन्ना है. वे लोगों को रातों-रात अमीर होने के सपने दिखाते और आखिर में बैंक खाता खाली कर देते. 

ये साइबर ठग बड़ी ही चालाकी से आम लोगों को शिकार बना रहे थे. इन लोगों पर आरोप हैं कि वे इनवेस्टमेंट स्कैम से लेकर डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के लिए सिम बॉक्स का इस्तेमाल करते थे. 

साइबर पुलिस टीम ने टेक्नोलॉजी सर्विलांसिंग की मदद से 2 अप्रैल को एक कार्यालय पर छापा मारा. यह एक्शन गुरुग्राम के सेक्टर 65 में साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध मोबाइल नंबरों के संबंध में की गई थी.

सिम बॉक्स क्या हैं?  

गिरफ्तार किए गए लोगों पर आरोप हैं कि दोनों ने सिम बॉक्स खरीदे थे, जिसका इस्तेमाल इंटरनेशनल कॉल्स को स्थानीय नंबर के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था. साथ ही टिकल एआई कॉल सेंटर के नाम से एक ऑफिस भी रजिस्टर्ड कराया. 

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने सिम बॉक्स का पूरा नेटवर्क तैयार किया, जिसका इस्तेमाल फर्जी इनवेस्टमेंट और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे केस में किया गया था. बदले में उन्हें लगभग 7 लाख रुपये भी रिसीव हुए हैं. 

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पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में करीब 21 धोखधड़ी की शिकायत दर्ज हैं. गुरुग्राम पुलिस ने बताया है कि आगे की जांच जारी है. 

साइबर ठगी से कैसे बचें? 

साइबर ठग अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करके लोगों के बैंक खाते खाली करने का काम करते हैं. इसमें वे फेक इनवेस्टमेंट का लालच और मोटी कमाई का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाते. या फिर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते. 

साइबर ठगों से बचाव के लिए याद रखना जरूरी है कि लालच या डर के चक्कर में फंसना नहीं है. ये बात जानना जरूरी है कि रातों-रात कोई भी स्कीम रकम डबल नहीं करती है. वहीं पुलिस या सरकारी एजेंसी फोन पर बयान आदि दर्ज नहीं करते हैं. 

फेक पुलिस ऑफिसर बनकर कोई कॉल करता है तो तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन पर पहुंचे और उस मामले की जानकारी. नेशनल साइबर पोर्टल पर जाकर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं. 

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