महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बाइज्जत बरी हो गए हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बृजभूषण सिंह को बरी कर दिया है. बृजभूषण सिंह ने अपने चार दशक के सियासी सफर में एक से बढ़कर एक बड़े राजनीतिक संकट से घिरे, लेकिन वो हर बार सियासी और कानूनी शिकंजे से बाहर निकलने में पूरी तरह सफल रहे.
देश की नामी-गिरामी महिला पहलवानों जनवरी 2023 में बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. इसके बाद महिला जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू किया तो लगा कि इस चक्रव्यूह को भेदकर बाहर निकलना उनके लिए आसान नहीं होगा.
विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे मशहूर पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. सात लड़कियों ने बृजभूषण पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद लगा कि बृजभूषण अपने सियासी जीवन में सबसे बड़ी चुनौतियों से घिर गए. न बीजेपी उनके साथ खुलकर खड़े होने को तैयार थी और न ही सरकार का साथ मिल पा रहा था.इसके बाद भी बृजभूषण तीन साल के बाद मामले से पाक-साफ होकर निकले हैं. ये पहला मामला नहीं है, जिससे बृजभूषण बरी हुए हों, उन्होंने एक से बढ़कर एक चक्रव्यूह को तोड़कर बाहर निकले हैं.
पहलवान भी नहीं कर सके बृजभूषण को चित
देश के लिए मेडल दिलाने वाली महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़ने के मामले बृजभूषण सिंह के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी थी. उनकी गिरफ्तारी को लेकर एक महीने से ज्यादा जंतर-मंतर पर आंदोलन किया था. किसान संगठन से लेकर हरियाणा और पश्चिम यूपी की खाप पंचायत तक महिला पहलवानों के समर्थन में उतर गए थे और बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से लेकर राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी दल के नेताओं का समर्थन महिला पहलवानों को हासिल था.
बृजभूषण सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिए मोगी सरकार ने एक कमेटी भी गठित की थी. सुप्रीम कोर्ट के दखल दिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण सिंह पर एफआईआर दर्ज किया था. बृजभूषण सिंह के साथ बीजेपी भी नहीं खड़ी थी. वो अपनी लड़ाई अकेले लड़ने के लिए मजबूर थे, लेकिन पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते रहे कि मुझ पर लगे आरोप अगर सही साबित हो गए तो मुझे फांसी पर चढ़ा देना.
बृजभूषण अपनी सबसे मुश्किल लड़ाई जीत गए
तीन साल के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण सिंह को बरी कर दिया है. महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर लगाए आरोपों के पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं करा सकी. ऐसे में अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष और पीड़िताओं द्वारा पेश किए गए साक्ष्य बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों को कानूनी तौर पर साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे. इसके आधार पर कोर्ट ने सोमवार को बृजभूषण सिंह को बरी कर दिया. बृजभूषण सिंह अपने सबसे मुश्किल लड़ाई जीतने में सफल हो गए.
फैसला आने के बाद बृजभूषण सिंह ने कहा कि कोर्ट ने मुझे और विनोद तोमर को बाइज्जत बरी कर दिया है. पहले ही दिन मैंने कहा था कि मेरे खिलाफ कोई फैसला आता है या कोई आरोप साबित होता है तो मैं ख़ुद फांसी पर लटक जाऊंगा. मुझे पूरा भरोसा था कि मेरे साथ न्याय होगा. मैंने कभी ख़ुद को अपराधी महसूस नहीं किया. बृजभूषण सिंह के बेटे करण भूषण ने कहा कि मेरे पिता ने अपने जीवन की सबसे मुश्किल लड़ाई जीती है.
बृजभूषण कैसे हर चक्रव्यूह को तोड़ते आ रहे
बृजभूषण सिंह का जन्म साल 1957 में हुआ. छात्र जीवन में राजनीति में कदम रखा और राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेकर सियासी सुर्खियों में आए.राम मंदिर आंदोलन की लहर में 1991 में पहली बार बृजभूषण सिंह ने गोंडा लोकसभा सीट पर मनकापुर स्टेट के आनंद सिंह को हराकर सांसद का चुनाव जीता.
सियासत में कदम रखने के साथ अपराध के साथ बृजभूषण सिंह का रिश्ता कायम होता गया और एक के बाद एक एफआईआर दर्ज होने लगी. गोंडा-देवीपाटन मंडल में वह एक बाहुबली नेता के तौर पर उनकी पहचान बनने लगी, लेकिन चर्चा में तब आए जब उनके ऊपर अंडरवर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम के साथ नजदीकी होने का आरोप लगा. इसके अलावा उन पर कई हत्या के मुकदमें भी दर्ज हुए, लेकिन हर बार अदालत से बरी होकर निकले.
बृजभूषण सिंह का दाउद इब्राहिम कनेक्शन
नब्बे के दशक में बृजभूषण सिंह पर बाबरी विध्वंस मामले में आरोपी बनाए गए इसके अलावा उनके ऊपर मुंबई के गैंगस्टर अरुण गवली के करीबियों के हत्या के लिए शूटर उपलब्ध कराने का आरोप लगा. इसके चलते बृजभूषण शरण सिंह पर टाडा लगा और उन्हें जेल जाना पड़ा था.
तिहाड़ जेल में उन्हें लंबे समय तक रहना पड़ा था. जेल में रहते हुए बृजभूषण सिंह अपनी पत्नी केतकी सिंह को 1998 का लोकसभा का चुनाव लड़ाया और वो जीतकर लोकसभा पहुंची. हालांकि, बाद में सूबतों के अभाव में सीबीआई ने उन्हें टाडा मामले में क्लीन चिट दे दिया था. साल 2020 में बाबरी विध्वंस मामले में भी कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.
मर्डर केस में बृजभूषण सिंह बरी होकर निकले
बृजभूषण सिंह की छवि एक दंबग नेता की रही है. वो हत्या के मामले में कई बार भी घिरे, लेकिन हर बार वो अदालत से बाइज्जत बरी होकर निकले. 2009 के लोकसभा चुनाव की बात है. बीजेपी ने बृजभूषण सिंह की जगह घनश्याम शुक्ला को गोंडा सीट से उम्मीदवार बनाया था.मतदान के दिन घनश्याम शुक्ला का एक कार दुर्घटना में निधन हो गया, जिसका आरोप बृजभूषण सिंह पर लगा कि उन्होंने हत्या करा दी है. बसपा सरकार ने इस मामले की जांच का आदेश सीबीआई को सौंपा था, जिसमें बाइज्जत बरी हो होकर निकले.
देवी पाटन इलाके में पंडित सिंह कभी बृजभूषण सिंह के दोस्ता हुआ करते थे. बृजभूषण सिंह उनके साथ मिलकर ठेकेदार किया करते थे, लेकिन सियासत ने उनके बीच दूरियां पैदा कर दी. इसके बाद पंडित सिंह पर जान लेवा हमला हुआ था और उन पर ताबड़तोड़ एक दर्जन से ज्यादा गोलियां बरसाई गई थी.
यूपी में सपा की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, उन्होंने पंडित सिंह को एयरलिफ्ट कराकर अस्पताल में भर्ती कराया था. पंडित सिंह पर हमला कराने का आरोप बृजभूषण सिंह पर लगा पंडित सिंह मामले में बृजभूषण सिंह कोर्ट से बरी हो चुके हैं. इतना ही नहीं 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में बृजभूषण सिंह ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या की है.
पंडित सिंह के साथ बृजभूषण की अदावत
बृजभूषण सिंह ने बताया था कि अस्सी के दशक में रवींद्र सिंह, अवधेश सिंह और वो तीनों दोस्ता हुआ करते थे. वो बालू खनन का ठेका लिया करते थे. एक बार तीनों लोग एक जगह बैठे थे और वहां पर विवाद हो गया. रवींद्र सिंह को एक व्यक्ति ने गोली मार दी, जिसके बाद बृजभूषण सिंह ने राइफल से उसके पीठ पर गोली मार दी. हालांकि, इस मामल में भी बृजभूषण सिंह बरी हो चुके हैं.
रविंद्र सिंह के भाई पंडित सिंह थे और उनकी बृजभूषण सिंह के साथ छत्तीस का आंकड़ा रहा है और अभी भी उनके परिवार की सियासी दुश्मनी जारी है. बृजभूषण सिंह अपने राजनीतिक जीवन में कई बार घिरे, लेकिन बार बार उसे भेदकर निकलने में सफल रहे. इतना ही नहीं बृजभूषण सिंह की देवी पाटन मंडल में बाहुबली रिजवान जाहीर के साथ भी रिश्ते छत्तीस के रहे, लेकिन कभी बृजभूषण सिंह उनके सियासी शिकंजे में फंस नहीं सके.