scorecardresearch
 

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव, अफसरों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है. कोर्ट ने कहा है कि हाई पावर कमेटी में अब अधिकारियों की पसंद से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए गोस्वामी समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

Advertisement
X
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर हाई पावर कमेटी में अब चुने हुए गोस्वामी प्रतिनिधि होंगे शामिल. (File Photo: ITG)
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर हाई पावर कमेटी में अब चुने हुए गोस्वामी प्रतिनिधि होंगे शामिल. (File Photo: ITG)

वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और परंपराओं को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है. कोर्ट ने हाई पावर कमेटी में प्रतिनिधियों के चयन को लेकर अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाते हुए कहा है कि अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने हुए प्रतिनिधि ही समिति में गोस्वामी समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हाई पावर कमेटी में बांके बिहारी के राजभोग और शयन भोग सेवाधिकारियों में से दो-दो चुने हुए प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे. शयन भोग से गोपेश और हिमांशु गोस्वामी, जबकि राजभोग सेवाधिकारी के रूप में रजत और शैलेंद्र गोस्वामी को समिति में शामिल किया जाए.

दरअसल, पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस अशोक कुमार की अगुआई में एक हाई पावर कमेटी बनाई गई थी. इस समिति में मथुरा के डीएम समेत अन्य अधिकारी और गोस्वामी समाज के चार प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था. समिति का मकसद मंदिर में दर्शन व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना था.

हालांकि, उस समय समिति के उच्च अधिकारियों ने अपनी पसंद और मर्जी से गोस्वामी प्रतिनिधियों का चयन कर लिया था. इसका गोस्वामी समाज ने तीखा विरोध किया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने अब कहा है कि समिति में शामिल गोस्वामी प्रतिनिधि मंदिर की सेवा परंपरा और प्रबंधन से जुड़े मामलों में सुझाव देंगे.

Advertisement

समिति उन सुझावों पर गंभीरता से गौर और विचार करेगी. कोर्ट ने राज्य सरकार से भी आग्रह किया कि वह वृंदावन और बांके बिहारी मंदिर के अंदर और आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा, सहूलियत, भीड़ प्रबंधन के लिए समुचित योजनाएं बनाकर उन पर जल्द अमल करे. बुजुर्ग और महिला श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं.

कोर्ट ने कहा कि सड़कों के चौड़ीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, पानी, रेस्ट रूम, होटल, अस्पताल, वेटिंग एरिया, आपातकालीन निकास और बैटरी चालित वाहनों जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए. इस बाबत समिति, गोस्वामी समाज और स्थानीय लोगों के सुझाव सुनकर विस्तृत परियोजना तैयार करे. उसे कोर्ट के समक्ष पेश करे.

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कोर्ट को बताया कि वृंदावन के पूरे विकास और कॉरिडोर का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. याचिकाकर्ता गोस्वामी समाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि 400 साल पुराने इस मंदिर की ऐतिहासिक परंपराओं, पूजा, राग भोग और दर्शन समय में कमेटी की ओर से छेड़छाड़ की गई है. 

इससे सेवाधिकारियों और श्रद्धालुओं में नाराजगी है. श्याम दीवान ने कहा कि मंदिर की कई प्रथाएं, परंपराएं और रस्में ऐतिहासिक और अपरिवर्तित हैं. इनमें दैनिक चर्या, देहरी पूजन, भोग समय, विश्राम काल और गर्मियों में फूल बंगलों की सेवा जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कारण बताकर इनमें बेवजह बदलाव नहीं किया जाना चाहिए.

Advertisement

उन्होंने यह भी दलील दी कि फूल बंगलों की सेवा के लिए लाखों रुपए शुल्क लिया जा रहा है. लाइव टेलीकास्ट के लिए ठाकुर जी के सामने तेज हैलोजन लाइट लगाने से भी दिक्कत होती है, क्योंकि उनकी सेवा बाल रूप में होती है. इस पर एम नटराज ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि समिति गोस्वामी समाज के साथ बैठक कर सुझावों को भी कोर्ट के समक्ष रखेगी.

एम नटराज ने कोर्ट को यह भी बताया कि विकास कार्यों के मद्देनजर भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. अब तक 14 सेल डीड हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक मंदिर कोष से धन भुगतान किया जा रहा है, लेकिन यदि कोर्ट आदेश दे तो सरकार वह राशि मंदिर कोष में जमा करा देगी.

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की ओर जाने वाली संकरी और तंग गलियों पर भी चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से यह गंभीर मुद्दा है और अब पारंपरिक तरीके से भीड़ प्रबंधन संभव नहीं है. आधुनिक तकनीक की मदद से श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से रोक-रोककर दर्शन कराने की व्यवस्था करनी होगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement