अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी का मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तेज हो गई हो गई. एफआईआर के बाद 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से पूछताछ हो चुकी हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उसे स्वीकार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए.
राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है. ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने की संभावित है. माना जा रहा है कि इस दौरान चढ़ावा चोरी मामले पर मंथन होने के साथ-साथ चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर भी विचार- विमर्श किया जाएगा.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की होने वाली बैठक पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्रा के इस्तीफ को क्या स्वीकार किया जाएगा?
दो-तिहाई बहुमत से ही स्वीकार होगा इस्तीफा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार इस्तीफा स्वीकार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है. मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफे पर फाइनल निर्णय ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार होगा. ट्रस्ट के नियम के मुताबिक ट्रस्ट के सदस्य वोटिंग के जरिए ही किसी के इस्तीफे को स्वीकार कर सकते हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को अगर दो-तिहाई सदस्य स्वीकार करते हैं तभी अपने पद से हटेंगे.
पद से हटने के बाद भी चंपत राय् ट्रस्ट में बने रहेंगे
राम जन्मभूमिट्रस्ट के दो तिहाई सदस्य दो-तिहाई बहुमत से चंपत राय के इस्तीफे के स्वीकर कर लते हैं तो उनका इस्तीफा स्वीकार हो जाएगा. चंपत राय महासचिव पद से हटा सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी ट्रस्ट के सदस्य बने रहेंगे. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बायलॉज में केवल पद और दायित्व से मुक्त करने का प्रावधान है. यही व्यवस्था ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों पर भी लागू होती है.
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर सभी की नजर
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के 14 सदस्यों में से दो सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं. ऐसे में 6 जुलाई को होने वाली बैठक में ट्रस्ट के 12 सदस्यों की राय ली जाएगी. बैठक में संघ के भैयाजी जोशी और विहिप के दिनेश चंद्र के अलावा बजरंग लाल बागड़ा और मिलिंद परांडे को भी आमंत्रित किए जाने की संभावना है. बैठक में यदि उन्हें मतदान का अधिकार मिलता है तो उनकी भूमिका भी अहम हो सकती है.
ट्रस्ट की इससे पहले बैठक रामलला की मूर्ति के चयन के समय हुई थी, जिसमें मूर्ती के चयन के लिए ट्रस्ट ने बकायदा मतदान कराया था, जिसमें दो-तिहाई बहुमत से मूर्तिकार अरुण योगीराज की प्रतिमा का चयन हुआ था. चंदा चोरी की बीच होने वाली बैठक में ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ, युगपुरुष परमानंद, गोविंद देव गिरि और कृष्ण मोहन के रुख पर भी सभी की नजर रहेगी.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियम और उद्देश्य
अयोध्या में भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए गठित 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के संचालन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं. ये नियम ट्रस्ट के कानूनी ढांचे, इसके प्रबंधन और इसके उद्देश्यों को परिभाषित करते हैं.
ट्रस्ट का गठन मुख्य रूप से निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया गया है. पहला मंदिर निर्माण. अयोध्या में भगवान श्री राम के जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आने वाली बाधाओं को दूर करना. इसके अलावा सुविधाओं का विकास कराने की है.
राम मंदिर में दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए अयोध्या में विशाल पार्किंग, सुरक्षा क्षेत्र, और परिक्रमा के लिए उचित व्यवस्था करना. आगंतुकों के लिए अन्नक्षेत्र, रसोई, गौशाला, प्रदर्शनी केंद्र, संग्रहालय और सराय जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं का निर्माण और रख-रखाव करना।
मंदिर ट्रस्ट का हित और प्रबंधन
ट्रस्ट के हित में धन और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का संग्रह करना, चल और अचल संपत्ति प्राप्त करना, और कानूनी रूप से उन्हें व्यवस्थित करना. ट्रस्टी बोर्ड का गठन और प्रशासन है. ट्रस्ट के संचालन के लिए एक व्यवस्थित बोर्ड है जिसके पास विशिष्ट अधिकार हैं.
ट्रस्ट में मतदान का अधिकार
राम मंदिर ट्रस्ट में केवल सीरियल नंबर 1 से 10 तक के ट्रस्टी और 'निर्मोही अखाड़ा' का प्रतिनिधित्व करने वाले ट्रस्टी को ही ट्रस्ट की बैठकों में वोट देने का अधिकार प्राप्त है. मंदिर के ट्रस्ट में पदेन सदस्य को मंदिर परिसर के विकास और प्रशासन की समिति का अध्यक्ष, जिसे बोर्ड द्वारा नियुक्त किया जाएगा (वह एक अभ्यास करने वाले हिंदू होने चाहिए). ट्रस्ट में नियुक्ति का मामला है. ट्रस्ट में यदि कोई पद रिक्त होता है, तो बोर्ड के पास उचित प्रक्रिया द्वारा प्रतिस्थापन चुनने का अधिकार है.
कार्यालय पदाधिकारी-ट्रस्ट के सुचारू संचालन के लिए बोर्ड के सदस्यों में से ही पदाधिकारियों का चयन किया जाता है. बोर्ड अपने बीच से ही एक अध्यक्ष नियुक्त करेगा,जो बैठकों की अध्यक्षता करेगा.महासचिव यह बैठकों को बुलाने, रिकॉर्ड रखने और ट्रस्ट के मिनटों का रखरखाव करने के लिए जिम्मेदार है. कोषाध्यक्ष का काम उचित खाते को बनाए रखना और बजट के अनुसार खर्च सुनिश्चित करना है. इसके अलावा बोर्ड आवश्यकतानुसार अपने बीच से अन्य पदाधिकारी भी नियुक्त कर सकता है. सभी पदाधिकारियों को बोर्ड के संकल्पों के अनुसार अतिरिक्त कार्य भी सौंपे जा सकते हैं.
ट्रस्टी से इस्तीफा और निष्कासन
ट्रस्ट में सदस्यों के आने और जाने की प्रक्रिया स्पष्ट है. पहले नियुक्त किए गए ट्रस्टी आजीवन अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे. कोई भी ट्रस्टी एक महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है.यदि कोई ट्रस्टी ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करता है, तो दो-तिहाई बहुमत से उसे हटाया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए ट्रस्टी को 'कारण बताओ नोटिस' देना और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है.
बोर्ड के पास ट्रस्ट डीड में बदलाव या संशोधन करने की शक्ति है, बशर्ते, यह बदलाव ट्रस्ट के 'मूल ढांचे' के विपरीत न हो. यह संशोधन सर्वोच्च न्यायालय के 9 नवंबर, 2019 के निर्णय और सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप हो. यह आयकर अधिनियम, 1961 और समय-समय पर लागू होने वाले अन्य कानूनों का उल्लंघन न करता हो.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र यानी राम मंदिर ट्रस्ट के बायलॉज के मुताबिक़ ट्रस्ट में चुनें हुए सदस्यों का कार्यकाल आजीवन के लिए होता है. अगर कोई ट्रस्टी ट्रस्ट से हटना चाहे तो उसे कम से कम एक महीने पहले नोटिस देना होगा. अगर किसी ट्रस्टी को ट्रस्ट से हटा हो तो कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति ज़रूरी होगी. ट्रस्ट की बैठक महामंत्री को बुलाने का अधिकार है. विशेष परिस्थितियों में ट्रस्ट का कोई ज़िम्मेदार सदस्य बैठक बुला सकता है.