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अयोध्या निर्मोही अखाड़े में छिड़ी वर्चस्व की जंग! महंत दिनेंद्र दास ने बर्खास्तगी के दावों को किया खारिज

अयोध्या के निर्मोही अखाड़े में महंत दिनेंद्र दास को पद से हटाने का दावा किया गया है, जिसका असर राम मंदिर ट्रस्ट पर पड़ सकता है. हालांकि, दिनेंद्र दास ने इस कार्रवाई को फर्जी बताते हुए कहा कि अखाड़े के 19 में से 13 पंच उनके साथ हैं और बुजुर्ग संत को गुमराह कर फैसला लिया गया है.

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महंत दिनेंद्र दास ने दावों को ख़ारिज किया (Photo- ITG)
महंत दिनेंद्र दास ने दावों को ख़ारिज किया (Photo- ITG)

अयोध्या स्थित निर्मोही अखाड़े में आंतरिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है. अखाड़े द्वारा महंत दिनेंद्र दास को अयोध्या शाखा के महंत पद से हटाकर राजा रामचंद्राचार्य दास महाराज को नया उत्तराधिकारी घोषित करने का दावा किया गया है. वहीं महंत दिनेंद्र दास ने इस कार्रवाई को पूरी तरह फर्जी और निराधार बताया है.

अखाड़े की बैठक और सुप्रीम कोर्ट में अर्जी

निर्मोही अखाड़ा अध्यक्ष राजा रामचंद्राचार्य दास की अध्यक्षता में 5 जुलाई को हुई बैठक में महंत दिनेंद्र दास पर अनुशासनहीनता, नियमों के उल्लंघन और महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाने के आरोप लगाए गए. बैठक में मौजूद महंतों और पंचों ने सर्वसम्मति से उन्हें हटाने का प्रस्ताव पास किया. यह मामला रविवार शाम तब सार्वजनिक हुआ जब अखाड़े की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई. इस फैसले का असर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दिनेंद्र दास की पदेन सदस्यता पर भी पड़ सकता है.

कार्रवाई को बताया गैर-कानूनी और फर्जी

हटाए जाने के दावों को खारिज करते हुए महंत दिनेंद्र दास ने बयान जारी कर इस निर्णय की वैधता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि निर्मोही अखाड़ा एक पंचायती मठ है, जहां किसी भी बड़े फैसले के लिए पंचों का बहुमत अनिवार्य होता है. अखाड़े के कुल 19 पंचों में से 13 पंच उनके समर्थन में हैं, जबकि महज छह पंच राजनीतिक कारणों से विरोध कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुमत उनके साथ होने के कारण उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है.

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वरिष्ठ संत को गुमराह करने का आरोप

महंत दिनेंद्र दास ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई को लेकर उनसे कोई राय या चर्चा नहीं की गई. उन्होंने कहा कि अखाड़े के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा को पहले ही मुख्तार पद से हटाया जा चुका है, इसलिए उनकी कोई भी कार्रवाई वैधानिक नहीं है. दिनेंद्र दास ने कहा कि डाकोर पीठ के 102 वर्षीय वरिष्ठ संत राजा रामचंद्राचार्य को गुमराह करके अखाड़े की परंपराओं और नियमों के विपरीत ये फैसले कराए जा रहे हैं, जो पूरी तरह फर्जी हैं.

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