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'अरे अम्मा, हम जियत हईं…', प्रयागराज में जिस खोई बेटी को मरा समझकर किया अंतिम संस्कार, वो गुजरात में जिंदा मिली!

प्रयागराज के लाल गोपालगंज में 2023 से लापता 30 वर्षीय प्रीति को मृत समझकर परिवार ने शव की पहचान की और अंतिम संस्कार कर दिया. हालांकि, डीएनए रिपोर्ट आने से पहले ही गुजरात के नारी संरक्षण केंद्र से उसके सुरक्षित होने की खबर मिली. वीडियो कॉल पर बेटी को जिंदा देख भावुक मां से प्रीति बोली, "अम्मा, हम जियत हईं…" अब पुलिस पहली अज्ञात लाश की जांच कर रही है.

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प्रयागराज से लापता हुई प्रीति गुजरात में मिली (Photo- ITG)
प्रयागराज से लापता हुई प्रीति गुजरात में मिली (Photo- ITG)

प्रयागराज के गंगापार इलाके के लाल गोपालगंज में एक चौंकाने वाला घटना सामने आई है. इसी इलाके के रहने वाले परिवार ने अपनी बेटी को मारा समझकर अंतिम संस्कार कर दिया था, वो प्रयागराज की बेटी गुजरात में जिंदा निकली. पुलिस की सूचना और वीडियो कॉल के बाद परिवार को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. बेटी को वीडियो कॉल पर देख सभी की खुशी से आंखें नम हो गई,  मानो उनके घर में फिर से बेटी ने जन्म ले लिया हो.

आपको बता दें कि लाल गोपालगंज के उमरावगंज के रहने वाले बनवारी लाल की बेटी प्रीति 30 साल की है और 13 मई 2023 को अचानक घर से लापता हो गई थी. मां कमला देवी ने अपने परिवार वालों के साथ मिलकर काफी खोजबीन किया लेकिन बेटी का कहीं पता नहीं चला. कुछ दिन बाद एक रिश्तेदार पर शक जताते हुए 16 मई को नवाबगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई था. लेकिन समय बीतने के बावजूद बेटी का कोई पता नहीं चल सका.

कई साल बाद यानि 30 सितंबर 2026 को गोरखपुर पुलिस ने यश ऐप के जरिए मिलान कर परिवार को सूचना दी कि चिलुआताल नदी के पास झाड़ियों में एक अज्ञात युवती का शव मिला था. परिवार के लोग गोरखपुर पहुंचे और शव के कपड़ों, हाथ पर बने टैटू, नाक के तिल तथा शरीर पर जले के निशान के आधार पर उसे प्रीति समझ लिया. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया. डीएनए रिपोर्ट का इंतजार किए बिना परिवार ने इसी 4 अक्टूबर को पूरे रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया और बाद में तेरहवीं भी कर दिया.

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शनिवार को श्याम जीत पर्मिला सिंह ACP सोरांव के पास गुजरात के वडोदरा के नारी संरक्षण केंद्र से फोन आया. केंद्र ने बताया कि उमरावगंज की रहने वाली प्रीति सुरक्षित है. पुलिस ने जब उसकी मां कमला देवी को यह जानकारी दी, तो उन्हें यकीन नहीं हुआ. इसके बाद वीडियो कॉल पर मां की बेटी से बात करवाया गया.

अपनी बेटी को देख पहले तो शुरुआत में परिवार को लगा कि कहीं ये एआई से बनाया गया नकली वीडियो तो नहीं है. संदेह दूर करने के लिए गांव के जानी पहचानी कई लोगों को कैमरे के सामने लाया गया. युवती ने सभी को देख कर एक-एक को नाम से पहचाना और पुरानी बातें भी याद दिलाईं. वहीं दूसरी तरफ वीडियो कॉल पर बेटी को जीवित देखकर परिवार भावुक हो गया. वहीं, बेटी ने भी बड़े भावुक अंदाज में अपने गांव की भाषा में मां से बात करते हुए प्रीति ने कहा- 'अरे अम्मा, हम जियत हईं…'

पुलिस के एक पहल से बिजली बेटी को परिवार से मिला दिया गया. परिवार में अब खुशी का माहौल है. जिस परिवार में मातम था मानो उस परिवार में 30 साल की बेटी फिर से जन्म ले लिया हो. लेकिन सवाल यह है जिस बेटी का उन लोगों ने अंतिम संस्कार किया वह किसकी बेटी थी. अब यह भी जांच का विषय है जो जीत डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा.

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