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आगरा रेलवे स्टेशन बवाल पर RPF के कमांडेंट की दो टूक: 'मारपीट गलत, पर हमारे जवानों को किसने किया प्रोवोक?'

आगरा कैंट स्टेशन पर RPF और डिप्टी एसएस के बीच मारपीट मामले में सीनियर डीएससी राज मोहन पिचाई ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि मारपीट गलत है, लेकिन जवान ड्यूटी कर रहे थे और उन्हें प्रोवोक किया गया. सोशल मीडिया के वीडियो अधूरे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जारी है.

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आरपीएफ के अधिकारी राज मोहन पिचाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा (Photo- ITG)
आरपीएफ के अधिकारी राज मोहन पिचाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा (Photo- ITG)

उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और रेलवे के डिप्टी एसएस के बीच हुए विवाद और मारपीट के मामले में सीनियर डिवीजन कमांडेंट (DSC) आरपीएफ राज मोहन पिचाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा. प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू करने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे तमिलनाडु के रहने वाले हैं और उनकी हिंदी उतनी अच्छी नहीं है. रेलवे स्टेशन की घटना पर उन्होंने साफ कहा कि मारपीट किसी भी हालत में सही नहीं है, लेकिन जिस समय यह घटना हुई उस वक्त आरपीएफ के जवान अपनी ड्यूटी पूरी तरह नियमों के अनुसार निभा रहे थे. यह सोचने की बात है कि फिर ऐसा क्या हुआ जिससे वह प्रवोक हो गए.

उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन प्लेटफॉर्म पर काफी भीड़ थी. आरपीएफ के जवान यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन के सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे थे. इसी दौरान एक यात्री को लेकर विवाद की स्थिति बनी और मामला बढ़ गया. उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के साथ हाथापाई स्वीकार्य नहीं है, इसलिए संबंधित आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है.

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राज मोहन पिचाई ने कहा कि सोशल मीडिया पर घटना के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं, लेकिन वे पूरे घटनाक्रम को नहीं दिखाते. कई महत्वपूर्ण हिस्से सामने नहीं आए हैं. पूरे मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को देखा जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया की जब तक इन्वेस्टिगेशन चल रही है वह इस मामले में कुछ भी बात नहीं सकते हैं.

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उन्होंने कहा कि रेलवे में हर विभाग की अपनी जिम्मेदारी और अधिकार क्षेत्र होता है. आरपीएफ का काम यात्रियों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करना है. घटना के समय भी आरपीएफ के जवान अपनी ड्यूटी के तहत ही काम कर रहे थे.

यह भी पढ़ें: आगरा: RPF ने रेलवे स्टेशन पर  डिप्टी SS को पहले गिराया फिर दोनों हाथ पकड़कर प्लेटफॉर्म पर घसीटा, 4 सस्पेंड 

सीनियर डीएससी ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को किसी अधिकारी से शिकायत होती है तो उसके लिए विभागीय प्रक्रिया मौजूद है. कानून हाथ में लेना या मारपीट करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता.

उन्होंने यह भी कहा कि आरपीएफ अनुशासित बल है और अपने जवानों से भी अनुशासन की अपेक्षा रखता है. इसलिए घटना के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई की है. साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि आरपीएफ के जवान लगातार यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में राज मोहन पिचाई ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. उनका कहना था कि गलती जहां भी होगी, कार्रवाई होगी, लेकिन आरपीएफ की ड्यूटी और उसकी भूमिका को भी तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए.

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बता दें कि आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर बीते कल स्टेशन मास्टर्स संगठन की तरफ से इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया गया था. प्रदर्शन के बाद पीड़ित डिप्टी एसएस नरेंद्र चाहर कि तू-तू मैं-मैं आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन आरपीएफ मैं तैनात हरीश से हो गई. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान हरीश वीडियो बना रहा था जिस पर नरेंद्र चाहर को कथित रूप से नागवार गुजरा. नरेंद्र ने आरोपी के कपड़े फाड़ दिए. जिस समय यह सब हो रहा था तमाम मोबाइल कैमरा में कैद हो गया. वीडियो में आरपीएफ कर्मी नरेंद्र से अपना मोबाइल मांगता हुआ दिखाई दे रहा है. यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बन गया है.

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