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1 करोड़ की सैलरी भी नहीं बना सकती अमीर! CA ने बताया कहां हो रही गलती

सालाना 1 करोड़ रुपये की सैलरी हो तो क्या आप खुद को अमीर मानेंगे? बेंगलुरु की एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने इसे लेकर ऐसा गणित समझाया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है. उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है.

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बेंगलुरु की चार्टर्ड अकाउंटेंट मीनल गोयल की पोस्ट वायरल है (Photo:Pexel)
बेंगलुरु की चार्टर्ड अकाउंटेंट मीनल गोयल की पोस्ट वायरल है (Photo:Pexel)

सालाना 1 करोड़ रुपये की सैलरी...सुनने में ही लगता है कि इतनी कमाई करने वाला शख्स तो अमीर ही होगा. महंगी गाड़ी, आलीशान घर और बैंक बैलेंस की कोई टेंशन नहीं. लेकिन क्या वाकई 1 करोड़ रुपये की सैलरी आपको अमीर बना सकती है? बेंगलुरु की एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का जवाब है- जरूरी नहीं. उनका कहना है कि 50 लाख रुपये कमाने वाला शख्स भी 12 लाख रुपये कमाने वाले व्यक्ति से कम पैसे बचा सकता है. अब उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

बेंगलुरु की चार्टर्ड अकाउंटेंट मीनल गोयल ने LinkedIn पर अपनी जिंदगी से जुड़ा एक अनुभव शेयर किया. Deloitte और KPMG जैसी कंपनियों में काम कर चुकीं मीनल ने बताया कि एक समय उन्हें भी लगता था कि सालाना 1 करोड़ रुपये कमाने के बाद वह खुद को अमीर कह सकेंगी.

मीनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब मैं KPMG में 1 लाख रुपये कमा रही थी, तब मुझे लगता था कि 1 करोड़ रुपये की कमाई मुझे अमीर बना देगी. मैं इससे ज्यादा गलत नहीं हो सकती थी.

मीनल के मुताबिक, समय के साथ उन्हें समझ आया कि सिर्फ मोटी सैलरी मिलना अमीर बनने की गारंटी नहीं है. आप कितना कमाते हैं, इसके साथ यह भी मायने रखता है कि आप उसमें से कितना बचाते और निवेश करते हैं.

50 लाख वाला बचा रहा 12 लाख वाले से कम?

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अपनी बात समझाने के लिए मीनल ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने लिखा कि आज वह ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को देखती हैं, जो सालाना 50 लाख रुपये कमाने के बावजूद 12 लाख रुपये कमाने वाले सरकारी कर्मचारियों से कम बचत कर रहे हैं.

मीनल का कहना है कि भारत में 2.3 लाख से भी कम लोग सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. करोड़पति बनने के लिए आपकी सालाना सैलरी 1 करोड़ रुपये होना जरूरी नहीं है.

सैलरी बढ़ी तो खर्च भी बढ़ गए

मीनल के मुताबिक, लोगों के अमीर बनने की राह में एक बड़ी रुकावट 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' है. आसान भाषा में समझें तो जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे आप अपना खर्च भी बढ़ाते जाते हैं.

20 हजार रुपये महीने के किराए वाले घर से 70 हजार रुपये के घर में शिफ्ट हो गए. Activa छोड़कर EMI पर BMW खरीद ली. घर का खाना छोड़कर रोज Swiggy से ऑर्डर करना शुरू कर दिया. कमाई बढ़ी, लेकिन उसके साथ खर्च भी कई गुना बढ़ गया.

मीनल के मुताबिक, हर बार सैलरी बढ़ने के साथ अगर लाइफस्टाइल भी महंगी होती चली गई तो हाइक से मिलने वाला अतिरिक्त पैसा पता चलने से पहले ही खर्च हो जाता है.

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क्या 10 साल में बन सकते हैं करोड़पति?

अब सवाल है कि क्या एक आम नौकरीपेशा व्यक्ति भी करोड़पति बन सकता है? मीनल का दावा है कि यह संभव है. उनके मुताबिक, अगर किसी शख्स की सैलरी हर साल 10 फीसदी बढ़ती है और उसे अपने निवेश पर 12 से 15 फीसदी तक रिटर्न मिलता है तो वह 10 साल में 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस तैयार कर सकता है.

मीनल ने लिखा कि इसके लिए न IIT की डिग्री चाहिए और न ही अमीर माता-पिता. उनके मुताबिक, इसके लिए सबसे जरूरी चीज फाइनेंशियल डिसिप्लिन है.

उन्होंने आगे कहा कि अगर 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस हर महीने करीब 1 लाख रुपये की पैसिव इनकम देने लगे तो इससे किसी व्यक्ति की EMI का 60 से 70 फीसदी हिस्सा कवर हो सकता है. उनके मुताबिक, यही असली फाइनेंशियल फ्रीडम है.

पोस्ट पर क्या बोले लोग?

मीनल की पोस्ट ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा. कई लोगों ने उनकी बात से सहमति जताई. एक यूजर ने लिखा कि लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हर सैलरी हाइक के साथ सबसे पहले अपनी SIP और सेविंग बढ़ाई जाए, उसके बाद खर्च.

एक अन्य यूजर ने लिखा कि इनकम आपको मौका देती है, लेकिन फाइनेंशियल डिसिप्लिन तय करता है कि आप उस मौके का क्या करते हैं. एक जैसी सैलरी पाने वाले दो लोग कुछ साल बाद दौलत के मामले में बिल्कुल अलग जगह पर खड़े हो सकते हैं.

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वहीं, एक यूजर ने लिखा कि लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन ऐसा खर्च है, जो चुपचाप बढ़ता रहता है. इसे जितनी जल्दी कंट्रोल कर लिया जाए, सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी को दौलत में बदलना उतना ही आसान हो जाता है.

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