
ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग में दोनों देशों के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद वहां इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है. लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगहों पर इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग अपनी सेना के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं.
वहीं इजरायल में भी हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. लगातार मिसाइल हमलों के खतरे के बीच लोग डरे हुए हैं और सायरन बजते ही बंकरों में शरण ले रहे हैं. ईरानी हमलों के कारण गुस्सा भी बढ़ा है और लोग अपनी सेना और सरकार के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं.
ऐसे माहौल में गूगल ट्रेंड के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि दोनों देशों के लोग क्या सर्च कर रहे हैं और उनकी मनोस्थिति कैसी है.
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल की ओर से हुए बड़े हमलों, जिनमें अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई, उसके कुछ ही घंटों बाद ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी में भारी गिरावट दर्ज की गई. यह स्तर करीब 4% से घटकर 1% या उससे भी कम हो गया.
23 मार्च 2026 तक भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेट ट्रैफिक अब भी लगभग 0 से 1% के बीच बना हुआ है, जिससे साफ है कि ईरान के अधिकांश नागरिक वैश्विक इंटरनेट से काफी हद तक कटे हुए हैं.
ईरान के लोग क्या सर्च कर रहे हैं?
इसी बीच जो सीमित डेटा सामने आ रहा है, उसमें ईरान के सर्च ट्रेंड्स में एक खास पैटर्न दिख रहा है. पिछले एक हफ्ते में 'Benjamin Netanyahu death' और 'Is Benjamin Netanyahu death' उससे जुड़े कीवर्ड्स तेजी से सर्च किए गए. दरअसल, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल रही थी कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौत हो गई है. इसी वजह से लोग अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विदेशी न्यूज एजेंसियों के जरिए इस खबर की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं.


इजरायल के लोग क्या सर्च कर रहे हैं
अब बात इजरायल की करें, तो वहां भी इसी तरह के सर्च ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं. लोग “Is Netanyahu alive”, “Netanyahu dead” जैसे कीवर्ड्स सर्च कर रहे हैं. यानी इज़राइल में भी प्रधानमंत्री की स्थिति को लेकर लोगों में जिज्ञासा और चिंता बनी हुई है. हालांकि, नेतन्याहू खुद सामने आकर इन अफवाहों का खंडन कर चुके हैं और उन्होंने वीडियो जारी कर बताया है कि वह सुरक्षित हैं.

कुल मिलाकर, Google Trends यह दिखाता है कि जंग के इस माहौल में सिर्फ हमले ही नहीं, बल्कि अफवाहें भी तेजी से फैल रही हैं और लोग सच्चाई जानने के लिए इंटरनेट का सहारा ले रहे हैं.
वहीं जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. दोनों देश एक-दूसरे को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं और हालात ऐसे हो गए हैं कि संवेदनशील ठिकाने, यहां तक कि परमाणु ठिकाने भी निशाने पर आ चुके हैं. इससे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता और बढ़ गई है.