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शरीर में 60 घाव, किडनी बाहर निकाल दी... भालू के हमले से ऐसे बचा शख्स

एक शख्स भालू जैसे खूंखार जानवर के हमले में बुरी तरह से जख्मी होने के बाद भी जिंदा बच गया. उसने बताया कि यह चमत्कार कैसे हुआ? जब उसके शरीर पर 60 से ज्यादा छेद बन गए थे और उसकी किडनी भी बाहर आ गई थी.

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भालू के हमले के बाद भी अपने जज्बे की वजह से जिंदा बच निकाल शख्स (Photo - AI Generated)
भालू के हमले के बाद भी अपने जज्बे की वजह से जिंदा बच निकाल शख्स (Photo - AI Generated)

सोचिए, आप जंगल के बीच साइकिल चला रहे हों और अचानक सामने एक विशालकाय भालू आ जाए. आप उसे डराने की कोशिश न करें, अपनी साइकिल उसके सामने कर दें और खाने से भरा बैग भी दूर फेंक दें. लेकिन अगर इसके बाद भी भालू हमला कर दे तो क्या होगा?

कनाडा में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था. ग्रिजली भालू ने उस पर इस कदर हमला किया कि उसके शरीर पर करीब 60 गहरे घाव हो गए. एक घाव इतना गंभीर था कि उसकी किडनी तक बाहर से दिखाई देने लगी थी. लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अपनी जान बचाने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करता रहा.

डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा के एक शख्स ने खुद के साथ हुई इस घटना के बारे में डेली स्टार को बताया. आखिर कैसे वह भालू के हमले के बाद मुश्किल से जिंदगी की जंग जीत सका. यह घटना 2019 की है. कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाले 47 साल के कॉलिन डॉवलर गर्मियों के एक दिन साइकिल से जंगल के रास्ते पर निकले थे. उनका मकसद इलाके में मौजूद हाइकिंग रूट्स को देखना था. 

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वह माउंट डूगी डॉवलर के पास एक संकरे लॉगिंग ट्रैक से गुजर रहे थे. तभी अचानक उनकी नजर एक ग्रिजली भालू पर पड़ी. कॉलिन पहले भी ब्लैक बियर देख चुके थे. इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि भालू को देखकर शांत रहने पर वह भी वहां से निकल जाएगा. लेकिन इस बार मामला अलग था. उनके सामने खड़ा भालू एक ग्रिजली था और वह लगातार कॉलिन को घूर रहा था.

 भालू कुछ फीट दूर आकर खड़ा हो गया. कॉलिन तुरंत अपनी साइकिल से उतर गए. वह नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से भालू डर जाए या आक्रामक हो जाए. लेकिन भालू पीछे हटने के बजाय धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ता रहा. देखते ही देखते दोनों के बीच की दूरी कुछ फीट रह गई.

कॉलिन ने खुद को बचाने के लिए साइकिल को अपने और भालू के बीच कर लिया. उनके हाथ में एक हाइकिंग पोल भी था, जिसे उन्होंने भालू की तरफ कर रखा था. लेकिन भालू ने उस पोल को अपने मुंह में दबाया और एक तरफ फेंक दिया.

अब कॉलिन को समझ आ गया था कि स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी है. उन्होंने अपने खाने से भरा बैग उतारकर भालू की तरफ फेंक दिया. उन्हें लगा कि शायद भालू खाने की तरफ चला जाएगा और वह वहां से निकल जाएंगे. लेकिन यह कोशिश भी काम नहीं आई.

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पहले पंजे से धक्का, फिर दांतों से हमला
भालू अब कॉलिन को अपने पंजे से धक्का देने लगा. कॉलिन ने आखिरी कोशिश के तौर पर अपनी साइकिल ही भालू की तरफ फेंक दी, लेकिन इससे भी वह नहीं रुका.

इसके बाद भालू ने अचानक कॉलिन पर झपट्टा मारा और उनके शरीर के एक हिस्से में दांत गड़ा दिए. उसने कॉलिन को अपने मुंह में उठा लिया और करीब 30 से 40 फीट दूर एक झाड़ी की तरफ ले गया.

इसके बाद जो हुआ, उसे याद करना भी कॉलिन के लिए बेहद दर्दनाक था. भालू उनके शरीर को बुरी तरह नोच रहा था. हमला इतना भयानक था कि कॉलिन को अपनी जांघ की हड्डी पर भालू के दांतों की रगड़ तक महसूस हो रही थी.

उस वक्त उन्हें लगा कि शायद अब वह जिंदा नहीं बच पाएंगे. उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों की याद आने लगी. उन्होंने मन ही मन उन्हें अलविदा तक कह दिया था.

तभी याद आया जेब में रखा चाकू
मुसीबत के बीच कॉलिन को अचानक याद आया कि उन्होंने साइकिलिंग के दौरान अपने साथ एक पॉकेट नाइफ रखा हुआ है. भालू ने उन्हें दबा रखा था, लेकिन किसी तरह कॉलिन दोनों हाथों से उस चाकू तक पहुंचने में कामयाब रहे.

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उन्होंने चाकू निकाला और भालू की गर्दन पर वार कर दिया. चाकू लगने के बाद भालू के शरीर से खून निकलने लगा और आखिरकार उसने कॉलिन को छोड़ दिया. भालू के पीछे हटते ही कॉलिन के सामने एक और बड़ी चुनौती थी. वह बुरी तरह घायल थे और काफी खून बह रहा था.

ऐसे रोका घाव से बहता हुआ खून
कॉलिन को डर था कि अगर खून नहीं रोका गया तो उनकी जान जा सकती है. उनके पास कोई मेडिकल सामान नहीं था. ऐसे में उन्होंने अपनी शर्ट की आस्तीन काटी और उससे पैर पर अस्थायी टॉर्निकेट बना लिया, ताकि खून का बहाव कम किया जा सके.

इसके बाद उन्होंने किसी तरह साइकिल उठाई और सिर्फ एक पैर की मदद से करीब 45 मिनट तक पैडल चलाते रहे. आखिरकार वह एक लॉगर के केबिन तक पहुंच गए.

वहां मौजूद पांच कर्मचारियों ने उनकी हालत देखी तो तुरंत मदद शुरू की. उन्होंने फर्स्ट एड किट की मदद से कॉलिन के शरीर पर मौजूद करीब 60 घावों को संभालने की कोशिश की. इस बीच एयर एंबुलेंस को भी बुलाया गया. करीब एक घंटे बाद एयर एंबुलेंस पहुंची और कॉलिन को अस्पताल ले जाया गया.

6.5 घंटे चली सर्जरी, 40 दिन अस्पताल में रहे
कॉलिन के शरीर पर करीब 60 पंचर और गहरे घाव थे. इनमें से एक घाव इतना गंभीर था कि उनकी किडनी तक दिखाई देने लगी थी. डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए करीब साढ़े छह घंटे तक सर्जरी की.

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इसके बाद कॉलिन को अस्पताल में करीब 40 दिन बिताने पड़े. इतने भयानक हमले के बावजूद उन्होंने जंगल और साइकिलिंग से अपना रिश्ता खत्म नहीं किया.

हादसे के बाद भी नहीं छोड़ा जंगल
इस घटना के बाद कॉलिन ने जंगल में दोबारा जाना शुरू किया. उन्होंने भालुओं से निपटने और सुरक्षित रहने की तकनीकों पर भरोसा किया. बाद में उन्हें रास्तों पर कुछ ब्लैक बियर भी मिले, लेकिन इस बार वह ज्यादा सतर्क थे. कॉलिन बताते हैं कि जब भी उन्हें ब्लैक बियर दिखाई देता है, वह जोर से चिल्लाते हैं और भालू वहां से दूर चला जाता है.

जिस शख्स को एक समय लगा था कि वह शायद अपने परिवार को दोबारा नहीं देख पाएगा, उसने इतनी भयानक चोटों के बावजूद जिंदगी की जंग जीत ली. ग्रिजली भालू के हमले में करीब 60 घाव झेलने, गंभीर चोट के बावजूद खुद खून रोकने और एक पैर से 45 मिनट तक साइकिल चलाकर मदद तक पहुंचने की उनकी कहानी वाकई हैरान कर देने वाली है.

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