दुबई में बसने का सपना आज लाखों भारतीय देखते हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमचमाती इमारतें, लग्जरी लाइफस्टाइल और ऊंची सैलरी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. लेकिन मुंबई की एक महिला ने बताया है कि दुबई पहुंचने के बाद शुरुआती दिन उसकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग निकले.
मुंबई की रहने वाली प्रिया शेठ चार साल पहले दुबई शिफ्ट हुई थीं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि दुबई की जिंदगी जितनी आसान सोशल मीडिया पर दिखती है, हकीकत में शुरुआत उतनी ही चुनौतीपूर्ण हो सकती है.प्रिया ने कहा कि हर कोई दुबई शिफ्ट होना चाहता है. आपके दोस्त इसकी बात करते हैं, परिवार बात करता है और शायद आप भी इसके बारे में सोच रहे हों. सच कहूं तो यहां जिंदगी बेहतर है, लेकिन किसी ने मुझे नहीं बताया था कि पहला साल कैसा होने वाला है."
इंस्टाग्राम वाली दुबई और असली जिंदगी में फर्क
प्रिया के मुताबिक, सोशल मीडिया पर दिखने वाला दुबई झूठ नहीं है. यहां की शानदार स्काईलाइन, ब्रंच और खूबसूरत सनसेट्स सच हैं, लेकिन उस लाइफस्टाइल तक पहुंचने में उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा समय लगा.उन्होंने बताया कि मैंने अपने दिमाग में जो सैलरी सोची थी, हकीकत उससे काफी अलग निकली. मुझे लगा था कि दो-तीन महीने में पूरी तरह से सेट हो जाऊंगी, लेकिन इसमें लगभग एक साल लग गया.
उम्मीदों और हकीकत के बीच होता है बड़ा गैप
प्रिया का कहना है कि विदेश जाने से पहले लोग एक तस्वीर बना लेते हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचने के बाद अनुभव काफी अलग हो सकता है. कुछ चीजें उम्मीद से ज्यादा मुश्किल होती हैं, जबकि कुछ चीजें कल्पना से भी बेहतर निकलती हैं.उन्होंने कहा कि आपके मन में जो तस्वीर होती है और असल में जो मिलता है, उसके बीच एक बड़ा अंतर होता है. कुछ चीजें आपको परेशान करती हैं, लेकिन कुछ ऐसी भी होती हैं जो आपकी उम्मीदों से कहीं बेहतर साबित होती हैं.
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संघर्ष का दौर गुजर जाता है
हालांकि प्रिया ने यह भी कहा कि शुरुआती मुश्किलें हमेशा नहीं रहतीं. उनके मुताबिक, जो लोग धैर्य रखते हैं और इस दौर से गुजर जाते हैं, उन्हें दुबई बाद में उसका पूरा फल देता है.
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक फेज होता है. एक बार जब आप इससे निकल जाते हैं, तो यह शहर आपको वह सब देता है जिसका आप इंतजार कर रहे होते हैं.
प्रिया का यह वीडियो उन लोगों के बीच तेजी से वायरल हो रहा है, जो दुबई में नौकरी या बेहतर करियर के लिए जाने का सपना देख रहे हैं. उनका अनुभव लोगों को यह समझाने की कोशिश करता है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक के पीछे संघर्ष की एक कहानी भी होती है.