ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री भारतीय मूल की सुएला ब्रेवरमैन फिर से चर्चा में हैं. इस बार ब्रेवरमैन के चर्चा में आने की वजह है ब्रिटिश उपनिवेशवाद को लेकर उनका बयान. सुएला ब्रेवरमैन ने कहा है कि ब्रिटिश उपनिवेश के अधीन रहे देशों को ब्रिटेन से हर्जाना मांगने की बजाय साम्राज्य के दौरान किए गए विकास कार्यों और निवेश के लिए उल्टा भुगतान करना चाहिए.
ब्रेवरमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लेबर पार्टी के सांसद बेल रिबेरो-एडी की एक पोस्ट के जवाब में यह बात कही. लेबर पार्टी के सांसद ने एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी थी कि जमैका किंग चार्ल्स तृतीय से हर्जाने की मांग करने जा रहा है. लेबर पार्टी के सांसद की इस पोस्ट के जवाब में पोस्ट कर कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य ने दुनिया के लिए बहुत अच्छा काम किया.
सुएला ब्रेवरमैन ने अपनी पोस्ट में आगे कहा कि निश्चित रूप से गुलामी घृणा करने योग्य व्यवस्था थी, लेकिन 21वीं सदी के ब्रिटिश नागरिकों से 18वीं सदी में हुई घटनाओं के लिए भुगतान की अपेक्षा करने का कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अगर जमैका की सरकार ब्रिटेन से हर्जाना लेने को लेकर अगर वास्तव में गंभीर है, तो उपनिवेशों को भी चाहिए कि वे निवेश और विकास के प्रयास के लिए ब्रिटेन को भुगतान करें.
यह भी पढ़ें: CM योगी ने किया यूपी मैंगो फेस्टिवल का उद्घाटन, आधा किलो वजनी आम देख मुस्कुराए, बोले- ब्रिटेन से कतर तक सप्लाई
ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि इन्हीं की बदौलत वे आज समृद्ध लोकतंत्र बने हैं. गौरतलब है कि जमैका की सरकार ने यह ऐलान किया है कि 6 सितंबर को उसके अधिकारी ब्रिटेन जाएंगे और किंग चार्ल्स तृतीय को औपचारिक रूप से याचिका सौंपेंगे. इस याचिका में दास प्रथा में ब्रिटेन की भूमिका को लेकर हर्जाने के दावे पर कानूनी राय मांगी जाएगी.
यह भी पढ़ें: तपती गर्मी से ब्रिटेन में हाहाकार... हीटवेव के बीच घरों से AC हटाने पर तुली सरकार
जमैका की संस्कृति मंत्री ओलिविया ग्रेंज ने संसद में इसे प्रतिपूरक न्याय अभियान को अगले स्तर पर ले जाने वाला कदम बताया था. उन्होंने संसद में यह जानकारी दी थी कि ब्रिटेन के किंग से यह अनुरोध किया जाएगा कि वे प्रिवी काउंसिल की न्यायिक समिति से इन बिंदुओं पर राय लें कि अफ्रीकियों को जबरन जमैका लाना क्या कानूनी था? क्या यह मानवता के खिलाफ अपराध था? क्या ब्रिटेन की कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि गुलामी और उसके दीर्घकालिक प्रभावों के लिए जमैका को मुआवजा दिया जाए?