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इस बीमारी से पत्थर जैसा हो गया युवक का सिर, लोग बोले- ऐसा पहले कभी नहीं देखा

चीन के 23 वर्षीय युवक का सिर एक दुर्लभ बीमारी कटिस वर्टिसिस जाइराटा (CVG) की वजह से इंसानी दिमाग जैसा दिखने लगा. इस बीमारी में सिर की त्वचा असामान्य रूप से मोटी होकर गहरी सिलवटों में बदल जाती है. लंबे इलाज और दो चरणों में हुई सर्जरी के बाद युवक का सिर सामान्य हो गया.

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इस दुर्लभ बीमारी का नाम कटिस वर्टिसिस जाइराटा (Cutis Verticis Gyrata) है. ( Photo: ITG)
इस दुर्लभ बीमारी का नाम कटिस वर्टिसिस जाइराटा (Cutis Verticis Gyrata) है. ( Photo: ITG)

क्या किसी इंसान का सिर बिल्कुल पत्थर जैसा दिख सकता है? पहली नजर में इसका जवाब 'नहीं' लगेगा, लेकिन चीन के एक 23 वर्षीय युवक के साथ ऐसा ही हुआ. उसके सिर की स्किन धीरे-धीरे इतनी मोटी हो गई कि उस पर गहरी-गहरी सिलवटें पड़ गईं और पूरा सिर पत्थर या इंसानी दिमाग जैसा नजर आने लगा. इस दुर्लभ बीमारी का नाम कटिस वर्टिसिस जाइराटा (CVG) है. यह बीमारी दुनिया में बेहद कम लोगों को होती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की शक्ल-सूरत के साथ-साथ उसका आत्मविश्वास भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. राहत की बात यह है कि एडवांस सर्जरी की मदद से इस बीमारी का सफल इलाज संभव है. 

क्या आपने कभी किसी इंसान का सिर बिल्कुल दिमाग जैसा देखा है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन चीन के 23 वर्षीय एक युवक के साथ ऐसा ही हुआ. उसके सिर की स्किन धीरे-धीरे इतनी मोटी हो गई कि उस पर गहरी-गहरी सिलवटें बन गईं और पूरा सिर इंसानी दिमाग जैसा दिखाई देने लगा. इस दुर्लभ बीमारी का नाम कटिस वर्टिसिस जाइराटा है. यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दुनिया में बहुत कम लोगों में देखने को मिलती है. हालांकि यह जानलेवा नहीं होती, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शक्ल-सूरत, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर काफी गहरा पड़ सकता है.

14 साल की उम्र में आधे सिर पर पड़ गईं गहरी सिलवटें
चीन के हुनान प्रांत में रहने वाले 23 वर्षीय ली (बदला हुआ नाम) ने कई साल पहले महसूस किया कि उसके सिर की त्वचा सामान्य लोगों की तुलना में अलग दिखने लगी है. शुरुआत में सिर की त्वचा थोड़ी मोटी हुई, लेकिन समय बीतने के साथ वह लगातार बढ़ती गई. कुछ ही वर्षों में उसके सिर पर गहरी और बड़ी-बड़ी सिलवटें बन गईं, जो बिल्कुल इंसानी दिमाग की सतह जैसी दिखाई देती थीं. जब ली 14 साल का हुआ, तब तक उसके सिर का लगभग आधा हिस्सा इन मोटी सिलवटों से ढक चुका था. उसकी यह स्थिति इतनी अलग थी कि लोग उसे देखकर हैरान रह जाते थे. लगातार लोगों की नजरों और सवालों की वजह से वह मानसिक तनाव में रहने लगा और उसका आत्मविश्वास भी कम होने लगा.

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कई अस्पतालों ने इलाज से कर दिया था इनकार
अपनी इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए ली ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाए. शुरुआती इलाज में डॉक्टरों ने उसकी सिर की स्किन  को फैलाने की कोशिश की, लेकिन यह प्रक्रिया सफल नहीं हुई. उल्टा, उसके सिर पर बड़े-बड़े निशान पड़ गए. इसके बाद जब वह दूसरे अस्पतालों में इलाज के लिए गया, तो ज्यादातर डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया उनका कहना था कि पहले की असफल सर्जरी के कारण सिर पर पर्याप्त स्वस्थ त्वचा नहीं बची है, इसलिए ऑपरेशन करना काफी जोखिम भरा होगा.

11 महीने तक चला इलाज, फिर मिली नई जिंदगी
आखिरकार ली की मुलाकात वुहान यूनिवर्सिटी के झोंगनान हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. झोउ वेई और उनकी टीम से हुई. जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसे एक बेहद दुर्लभ बीमारी है. डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए दो चरणों वाली योजना बनाई. पहले चरण में उसके सिर के नीचे विशेष टिश्यू एक्सपैंडर लगाए गए. इनमें समय-समय पर तरल पदार्थ भरा गया ताकि सिर की स्वस्थ त्वचा धीरे-धीरे फैल सके. यह प्रक्रिया करीब 11 महीने तक चली. इसके बाद दूसरी सर्जरी में मोटी और असामान्य त्वचा को हटाकर स्वस्थ त्वचा से सिर को सामान्य आकार दिया गया. करीब तीन घंटे चली इस सर्जरी के बाद ली का सिर पहले की तुलना में काफी सामान्य दिखाई देने लगा और अब वहां सामान्य तरीके से बाल भी उग रहे हैं.

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क्या है कटिस वर्टिसिस जाइराटा (CVG)?
CVG सिर की त्वचा से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ बीमारी है. इसमें सिर की त्वचा सामान्य से कई गुना मोटी हो जाती है और उस पर लंबी-लंबी तथा गहरी सिलवटें बन जाती हैं. ये सिलवटें देखने में इंसानी दिमाग की सतह जैसी लगती हैं. यह बीमारी आमतौर पर किशोरावस्था या युवावस्था में सामने आती है और पुरुषों में महिलाओं की तुलना में ज्यादा देखने को मिलती है.

दुनिया में कितने लोगों को होती है यह बीमारी?
यह बीमारी बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है. मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक हर एक लाख लोगों में केवल 1 से 5 लोगों को ही यह बीमारी होती है. दुनिया भर में इसके बहुत कम मामले दर्ज किए गए हैं. यही वजह है कि कई डॉक्टरों को भी अपने पूरे करियर में इसके बहुत कम मरीज देखने को मिलते हैं.

आखिर क्यों होती है यह बीमारी?
इस बीमारी का सटीक कारण अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए हैं. कुछ मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट वजह के अपने आप विकसित हो जाती है. वहीं कुछ मरीजों में यह हार्मोन से जुड़ी गड़बड़ी, कुछ दुर्लभ त्वचा रोग, आनुवंशिक कारणों या दूसरी बीमारियों से जुड़ी हो सकती है. इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है. सबसे पहले सिर की त्वचा मोटी होने लगती है. इसके बाद उस पर गहरी सिलवटें बनने लगती हैं. समय के साथ ये सिलवटें और उभर जाती हैं. 

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क्या इसका इलाज संभव है?
अगर बीमारी हल्की हो तो डॉक्टर सिर्फ सिर की सफाई और नियमित निगरानी की सलाह देते हैं. लेकिन अगर त्वचा बहुत ज्यादा मोटी हो जाए या मरीज की सामान्य जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो प्लास्टिक सर्जरी सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है. 

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