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पहले बीहड़ में चलाती थीं गोलियां, अब रैंप पर बिखेरा जलवा, वीडियो वायरल

कभी बस्तर के जंगलों में हथियार थामने वाली इन महिलाओं की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है. आत्मसमर्पण के बाद पहली बार वे रैंप पर उतरीं और कोसा सिल्क व हाथ से बुने कपड़ों में अपने नए आत्मविश्वास की झलक दिखाई. आखिर बंदूक से रैंप तक कैसे पहुंचीं ये महिलाएं, जानिए पूरी कहानी.

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रायपुर के फैशन शो में रैंप वॉक करती महिलाएं, जिनमें कुछ पूर्व महिला नक्सली भी थीं. (Photo: ANI)
रायपुर के फैशन शो में रैंप वॉक करती महिलाएं, जिनमें कुछ पूर्व महिला नक्सली भी थीं. (Photo: ANI)

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में नेशनल हैंडलूम डे के मौके पर आयोजित एक फैशन शो अपनी अलग वजह से चर्चा में है. इस रैंप पर पेशेवर मॉडल्स नहीं, बल्कि बस्तर की वे महिलाएं उतरीं, जो कभी नक्सली संगठन का हिस्सा रहकर जंगलों में हथियार थामती थीं. आत्मसमर्पण के बाद अब ये महिलाएं मुख्यधारा में लौट चुकी हैं. कोसा सिल्क और हाथ से बुने पारंपरिक कपड़ों में उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया. दर्शकों ने तालियों के साथ उनका हौसला बढ़ाया.

इस मौके पर शेयर किए गए वीडियो में महिलाएं पारंपरिक हथकरघा कपड़ों में रैंप पर चलती नजर आईं. उनकी यह झलक सिर्फ एक फैशन शो नहीं, बल्कि बदलाव, हिम्मत और नई शुरुआत की कहानी भी दिखाती है.

रायपुर में हुए इस कार्यक्रम में महिलाओं ने कोसा सिल्क और हाथ से बुने कपड़ों को रैंप पर पेश किया. कार्यक्रम का मकसद सिर्फ फैशन को बढ़ावा देना नहीं था. इसके जरिए आत्मसमर्पण कर चुकी महिलाओं को नई जिंदगी, रोजगार और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है.

सरकारी हैंडल MyGovIndia ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि रैंप पर आज एक अलग ही चमक नजर आई. बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने नेशनल हैंडलूम डे के कार्यक्रम में रैंप वॉक किया. उन्होंने आत्मविश्वास के साथ हथकरघा कपड़ों की खूबसूरती भी पेश की. उनका यह सफर बदलाव, नई शुरुआत और मुख्यधारा में लौटकर आगे बढ़ने की कहानी है.

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सोशल मीडिया पर आयुषी नाम की यूजर ने लिखा कि नक्सलवाद या उसकी हिंसा को ग्लैमराइज करना सही नहीं ठहराया जा सकता. असली बदलाव हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, आजादी और अपनी पसंद की जिंदगी चुनने में है. उन्होंने कहा कि हथियारों से रैंप तक का यह सफर बदलाव की मिसाल है. इन महिलाओं ने सिर्फ अपनी जिंदगी का एक अध्याय खत्म नहीं किया, बल्कि अपनी जिंदगी को फिर से अपने हाथों में लिया है.

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी प्रतिभागियों से मुलाकात की और उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं. पूर्व महिला नक्सलियों की रैंप पर मौजूदगी यह दिखाती है कि हथियार और हिंसा की दुनिया से निकलने के बाद वे अब नई संभावनाओं की ओर बढ़ रही हैं.

बदलाव और नई शुरुआत

आयोजकों ने इस पहल को 'न्यू इंडिया' की भावना से जोड़ा. इसका संदेश है कि अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, बदलाव और नई शुरुआत के लिए रास्ता हमेशा खुला रह सकता है. इन महिलाओं की कहानी बताती है कि सही मौका और सहयोग मिलने पर जिंदगी को नए सिरे से शुरू किया जा सकता है.

सोशल मीडिया पर लोग इस पहल की तारीफ कर रहे हैं और इसे प्रेरणादायक बता रहे हैं. बस्तर के जंगलों से रैंप तक का यह सफर इन महिलाओं के जीवन में आए बदलाव और नई उम्मीद की झलक दिखाता है

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