नमामि गंगे योजना (Namami Gange Scheme) भारत सरकार की एक प्रमुख नदी प्रबंधन और संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी की सफाई, प्रदूषण में कमी और उसके पुनर्जीवन के लिए काम करना है. इस कार्यक्रम की घोषणा वर्ष 2014 में की गई थी और इसे देश की सबसे बड़ी नदी संरक्षण योजनाओं में से एक माना जाता है. गंगा नदी भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है, इसलिए इसकी स्वच्छता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस मिशन की शुरुआत की गई.
इस योजना को मई 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली. इसके लिए शुरुआती बजट 20,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था. योजना के संचालन और निगरानी के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा परिषद (National Ganga Council) का गठन किया गया, जबकि इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) को दी गई. जनजागरूकता बढ़ाने के लिए लोकप्रिय कॉमिक पात्र ‘चाचा चौधरी’ को इस अभियान का शुभंकर (मास्कॉट) बनाया गया.
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने, नदी के किनारों का विकास, नदी की सतह की सफाई, जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण, औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी और लोगों को जागरूक करने जैसे कई कार्य शामिल किए गए. योजना के अंतर्गत लगभग 200 सीवेज अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनका उद्देश्य गंगा में गिरने वाले गंदे पानी को नियंत्रित करना था.
वर्ष 2021 में कार्यक्रम से जुड़े कई कार्यों को आगे बढ़ाया गया. इसी दौरान प्रयागराज संगम में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मछलियों जैसे रोहू, कतला और मृगल के 30,000 से अधिक अंडों को छोड़ा गया, ताकि गंगा की जैव विविधता को मजबूत किया जा सके. इसके अलावा, “ए क्लीन गंगा रोडशो” नामक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी गई.
जून 2021 में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 341 परियोजनाओं में से 147 परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं, जबकि 157 सीवेज परियोजनाओं में से 61 परियोजनाएं पूर्ण हुई थीं. जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा विलास क्रूज के शुभारंभ के दौरान एक हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की कई अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया.
वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने नमामि गंगे को दुनिया की 10 प्रमुख “वर्ल्ड रेस्टोरेशन फ्लैगशिप” पहलों में शामिल किया. वहीं, 2018 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कार्यक्रम के कार्यान्वयन और धनराशि के उपयोग को लेकर कई सवाल भी उठाए गए थे. रिपोर्ट में बताया गया था कि निर्धारित फंड का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया था और कई स्थानों पर गंगा के जल की गुणवत्ता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी थी.
आज नमामि गंगे योजना गंगा नदी से जुड़े संरक्षण, प्रबंधन और अवसंरचना विकास कार्यों का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है, जिसके तहत विभिन्न सरकारी एजेंसियां और संस्थाएं मिलकर कार्य कर रही हैं.
केंद्र सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा नदी में पहुंचने वाला औद्योगिक प्रदूषण 2017 की तुलना में लगभग 60% घट गया है. जीपीआई उद्योगों से निकलने वाला बीओडी भार 26 टन प्रतिदिन से घटकर 10.75 टन प्रतिदिन रह गया. कानपुर के जाजमऊ टेनरी क्षेत्र में 20 एमएलडी सीईटीपी और सिसामऊ नाले के इंटरसेप्शन से बड़ा सुधार हुआ है.
संसद के चालू शीतकालीन सत्र के आठवें दिन सपा सांसद ने शून्यकाल के दौरान नमामि गंगे का विषय उठाने के लिए सूचीबद्ध कराया था. जब बोलने की बारी आई तो सांसद दुग्ध उत्पादन को लेकर बोलने लगे. आसन से जगदंबिका पाल ने उन्हें टोका.
यूपी में 10 सीनियर आईएएस अधिकारियों का ट्रांसफर हुआ है. इनमें वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह को प्रतीक्षारत रखा गया है. जबकि नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति के सचिव और विशेष सचिव का तबादला हुआ है.
उत्तराखंड के चमोली जिले में नमामि गंगे प्रोजेक्ट की साइट पर करंट लगने से 16 लोगों की मौत हो गई है. वहीं इस हादसे को लेकर गुस्साए लोग ऊर्जा निगम पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. वे निगम के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है.