आईडीबीआई बैंक लिमिटेड (IDBI Bank Limited) एक भारतीय निजी क्षेत्र का बैंक है और जीवन बीमा निगम (LIC) की एक सहायक कंपनी है जो वित्तीय और बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती है. इसकी स्थापना 1964 में भारतीय औद्योगिक विकास बैंक के रूप में हुई थी, जो औद्योगिक क्षेत्र को वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है. 2005 में, संस्था को अपने वाणिज्यिक प्रभाग, आईडीबीआई बैंक के साथ मिला दिया गया, जिससे मौजूदा बैंकिंग इकाई का निर्माण हुआ. बाद में मार्च 2019 में, RBI ने इसे एक निजी बैंक के रूप में एक नई पहचान दी (IDBI Categorized as Private Sector Bank).
2005 में आईडीबीआई (IDBI) का उसकी सहायक व्यावसायिक इकाई आईडीबीआई बैंक के साथ विलय कर दिया गया. इसके बाद इसे अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की श्रेणी में रखा गया. मार्च 2019 में भारत सरकार ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से इसमें पूंजी लगाने और इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने को कहा.
एलआईसी द्वारा बैंक की कुल चुकता इक्विटी पूंजी में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 21 जनवरी 2019 से नियामकीय उद्देश्यों के लिए इसे निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रख दिया.
आईडीबीआई बैंक को रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) व्यवस्था के तहत रखा गया था. 10 मार्च 2021 को बैंक इस व्यवस्था से बाहर आ गया.
वर्तमान में आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत बताई गई है. भारत सरकार ने 17 दिसंबर 2019 को जारी एक पत्र के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों को सरकारी कामकाज के लिए आईडीबीआई बैंक पर विचार करने का निर्देश दिया था.
आईडीबीआई से जुड़ी संस्थाओं में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM Bank), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) शामिल हैं.
जुलाई 2025 तक आईडीबीआई बैंक का कुल बैलेंस शीट आकार 4,11,661 करोड़ रुपये था. उस समय बैंक की देशभर में 2,100 से अधिक शाखाएं और 3,700 से अधिक एटीएम थे. इसके अलावा, दुबई में इसकी एक विदेशी शाखा भी है.
सितंबर 2021 के आंकड़ों के अनुसार, एलआईसी के पास बैंक की 49.24 प्रतिशत और भारत सरकार के पास 45.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. उस समय बैंक के प्रबंधन का नियंत्रण एलआईसी के पास था.
जब एक घाटे में डूबा बैंक खुद को उबारकर फिर से मुनाफा कमाने लगे, और सरकार उसे बेचने की तैयारी कर ले- तो विवाद होना लाजिमी है. IDBI बैंक इस वक्त ऐसी ही खींचतान के केंद्र में है. कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल करीब 52,878 करोड़ रुपये में IDBI बैंक का नियंत्रण अपने हाथ में लेने जा रही है. सरकार इसे ऐतिहासिक निवेश बता रही है, तो बैंक के कर्मचारी फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. सवाल सिर्फ मालिकाना हक का नहीं है- सवाल यह भी है कि इस डील से किसे क्या मिला और जोखिम किसके हिस्से आया? कूटनीति में आज बात करेंगे... IDBI बैंक के निजीकरण, कनाडाई कंपनी की एंट्री और इसके पीछे के पूरे आर्थिक गणित की.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर यूपीए सरकार के दौरान बैंकों की खराब स्थिति को लेकर सवाल उठाए है.
Disinvestment Plan: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 10 सितंबर तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 62,124 करोड़ रुपये जुटा लिए थे. यह इस वित्त वर्ष के लिए तय बजट टारगेट से सिर्फ 17,876 करोड़ रुपये कम है.
इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (IDBI Bank) में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की योजना के बीच कर्मचारियों और पेंशनर्स के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बैंक यूनियनें इस सौदे का विरोध कर रही हैं, वहीं सरकार ने सेवा शर्तों और पेंशन लाभों की सुरक्षा का भरोसा दिया है.