विनिवेश के मोर्चे पर सरकार को चालू वित्त वर्ष में बड़ी सफलता मिलने वाली है. ये अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी भी खबर है. दरअसल, केंद्र सरकार लंबे समय से आईडीबीआई बैंक में अपनी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की बड़ी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है. सरकार का तर्क है कि इस रणनीतिक बिक्री से बैंक के कामकाज में निजी प्रबंधन की कुशलता आएगी, जिससे बैंक का प्रदर्शन और मजबूत हो सकेगा.
अब जाकर केंद्रीय कैबिनेट ने IDBI Bank की बिक्री और रणनीतिक पुनर्गठन के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. सरकार के लिए विनिवेश के नजरिये से आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस डील के पूरा होने से सरकार वित्त वर्ष 2027 के लिए तय किए गए अपने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन के लक्ष्यों को आसानी से पार कर लेगी.
वित्त वर्ष 2027 का बड़ा लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विनिवेश और संपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए लगभग 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का बड़ा लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने में आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी बिक्री सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है. इसके अलावा एलआईसी (LIC) जैसी अन्य सरकारी संस्थाओं में भी छोटी हिस्सेदारी बेचकर फंड जुटाए जाने की योजना है. अनुमान लगाया जा रहा है कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश से सरकार को करीब 26,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
सरकार के लिए यह क्यों है फायदेमंद?
आईडीबीआई बैंक की बिक्री से सरकार के खजाने में एक साथ भारी मात्रा में फंड आएगा, जिससे राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. अगर यह मेगा डील तय समय पर पूरी हो जाती है, तो सरकार न केवल अपने शुरुआती अनुमानों को छू लेगी, बल्कि निर्धारित वित्तीय लक्ष्यों को पार भी कर लेगी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 10 सितंबर तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 62,124 करोड़ रुपये जुटा लिए थे. यह इस वित्त वर्ष के लिए तय बजट टारगेट से सिर्फ 17,876 करोड़ रुपये कम है. आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री से यह टारगेट पूरा हो जाएगा.
यानी सरकार वित्त वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से बजट में तय लक्ष्य से ज्यादा पैसे जुटाएगी. पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से 45,306 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो 47,000 करोड़ रुपये के तय लक्ष्य का करीब 96 फीसदी था.
बता दें, सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर आईडीबीआई बैंक में अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी कनाडा के वित्तीय समूह 'फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स' (Fairfax Financial Holdings) की सहायक कंपनी को बेच रहे हैं. डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि LIC अपनी 30.24 हिस्सेदारी बेचेगी.