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हाइब्रिड कार

हाइब्रिड कार

हाइब्रिड कार

हाइब्रिड कार (Hybrid Cars) ऐसी कार होती है, जिसमें वाहन को चलाने के लिए दो तरह की पावर का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर इसमें पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों लगे होते हैं. ये दोनों सिस्टम जरूरत के अनुसार अलग-अलग या साथ में काम करते हैं. हाइब्रिड तकनीक का उद्देश्य ईंधन और बिजली दोनों का उपयोग करके वाहन को चलाना है.

हाइब्रिड कारों में एक बैटरी पैक, इलेक्ट्रिक मोटर, पेट्रोल इंजन और कंट्रोल सिस्टम होता है. धीमी रफ्तार या ट्रैफिक जैसी परिस्थितियों में कार इलेक्ट्रिक मोटर से चल सकती है, जबकि अधिक गति या लंबी दूरी के दौरान पेट्रोल इंजन सक्रिय हो जाता है. कई बार दोनों सिस्टम एक साथ भी काम करते हैं.

हाइब्रिड कार मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं. पहला माइल्ड हाइब्रिड, जिसमें इलेक्ट्रिक मोटर इंजन की सहायता करती है, लेकिन कार केवल बिजली से नहीं चलती. दूसरा फुल हाइब्रिड, जिसमें कार कुछ दूरी तक केवल इलेक्ट्रिक मोटर से भी चल सकती है. तीसरा प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV), जिसकी बैटरी को बाहरी चार्जर से भी चार्ज किया जा सकता है और यह सामान्य हाइब्रिड की तुलना में अधिक दूरी तक इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है.

हाइब्रिड कारों में बैटरी चार्ज करने के लिए अलग से चार्जिंग की आवश्यकता हमेशा नहीं होती. अधिकांश हाइब्रिड कारों की बैटरी ब्रेक लगाने के दौरान बनने वाली ऊर्जा (रीजनरेटिव ब्रेकिंग) और इंजन के जरिए अपने आप चार्ज होती रहती है. वहीं प्लग-इन हाइब्रिड कारों को बिजली से भी चार्ज किया जा सकता है.

भारत में कई ऑटोमोबाइल कंपनियां हाइब्रिड तकनीक वाली कारें उपलब्ध करा रही हैं. इनमें हैचबैक, सेडान और एसयूवी जैसे कई विकल्प शामिल हैं. देश में बढ़ती इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई तकनीकों के बीच हाइब्रिड कारें भी ऑटोमोबाइल सेक्टर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं.

हाइब्रिड कारों से जुड़े नियम और मानक भारत सरकार के वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन संबंधी नियमों के अनुसार तय किए जाते हैं. वर्तमान समय में यह तकनीक पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच एक अलग श्रेणी के रूप में मौजूद है.

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