मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हमले की धमकी दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ब्रिटेन (UK), फ्रांस, इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले के लिए एक टारगेट लिस्ट तैयार की है.
यह लिस्ट गुप्त है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसके बारे में जानकारी लीक हुई है. आइए समझते हैं कि क्या है यह लिस्ट, कहां-कहां हमला हो सकता है.
क्यों बढ़ रहा है तनाव?
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सालों से दुश्मनी है. 2015 में ओबामा के समय न्यूक्लियर डील (JCPOA) हुई थी, लेकिन ट्रंप ने 2018 में इसे तोड़ दिया. ईरान ने फिर यूरेनियम संवर्धन बढ़ा दिया. जून 2025 में इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया. फिर अमेरिका ने भी तीन साइट्स (फोर्डो, इस्फाहान और नटांज) पर बम गिराए.
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ट्रंप ने कहा कि ये हमले ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह नष्ट कर देंगे, लेकिन IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के मुताबिक, यह सिर्फ कुछ महीनों के लिए रुका. अब जनवरी 2026 में ट्रंप फिर धमकी दे रहे हैं.
वजह: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जहां कम से कम 116 लोग मारे गए हैं. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करे. बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित करे और हमास, हिजबुल्लाह, हूती जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करे.
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान नहीं माना तो 'स्पीड और वायलेंस' से हमला होगा. अमेरिका ने USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेजा है.

सीक्रेट लिस्ट क्या है?
अमेरिका ने UK, फ्रांस, इजरायल और चार अरब देशों (संभावित रूप से UAE, जॉर्डन, सऊदी अरब और एक अन्य) के साथ मिलकर ईरान पर हमले के लिए टारगेट्स की लिस्ट तैयार की है. इजरायली अखबार 'यिसराएल हायोम' के मुताबिक, ट्रंप ने अपनी टीम से डिसाइसिव मिलिट्री प्लान बनाने को कहा है.
यह लिस्ट गुप्त है, लेकिन इसमें ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को टारगेट किया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह प्रदर्शनकारियों को सपोर्ट देने और रेजीम को कमजोर करने के लिए है. कुछ अरब देश जैसे सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका से हमला न करने की अपील की है, क्योंकि इससे रीजनल युद्ध हो सकता है.
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कहां-कहां हमला हो सकता है? संभावित टारगेट्स
रिपोर्ट्स के आधार पर, लिस्ट में ये मुख्य टारगेट्स शामिल हैं...
न्यूक्लियर साइट्स: ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को निशाना बनाने के लिए फोर्डो (Fordow), नटांज (Natanz) और इस्फाहान (Isfahan). ये पहले 2025 में हमले का शिकार हो चुके हैं, लेकिन फिर से बनाए जा सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि ये साइट्स ओब्लिटरेटेड हैं, लेकिन IAEA कहता है कि ईरान जल्दी रिकवर कर सकता है.
मिलिट्री कमांडर्स और लीडर्स: ईरान के टॉप लीडर्स, IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) के कमांडर्स और सिक्योरिटी फोर्सेस. प्रदर्शन दबाने वाली फोर्सेस को कमजोर करना.
स्ट्रैटेजिक फैसिलिटी: बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज, एयर डिफेंस सिस्टम और मिलिट्री बेस. ईरान की मिसाइलें जो अमेरिकी सहयोगियों तक पहुंच सकती हैं, उन्हें नष्ट करना.

अन्य संभावित: ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हूती, हिजबुल्लाह) से जुड़े ठिकाने, लेकिन मुख्य फोकस ईरान के अंदर है. अमेरिका साइबर अटैक या कोवर्ट ऑपरेशंस का भी इस्तेमाल कर सकता है.
ये टारगेट्स ऐसे चुने गए हैं कि रेजीम चेंज (सरकार बदलाव) हो सके, लेकिन बिना बड़े युद्ध के. हालांकि, ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो अमेरिकी बेस (जैसे कतर का अल उदेद एयर बेस) और इजरायल पर जवाबी हमला करेगा.
इन देशों की भूमिका क्या है?
खतरे और परिणाम
अगर हमला हुआ तो... रीजनल युद्ध फैल सकता है, जिसमें हूती ड्रोन अटैक या मिसाइल हमले हो सकते हैं. ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम तेज हो सकता है. वो परमाणु हथियार बना सकता है. ऑयल प्राइस बढ़ सकते हैं. यह लिस्ट अमेरिका की मैक्सिमम प्रेशर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. ईरान ने कहा कि कोई हमला पूर्ण युद्ध होगा. इनपुटः सुमित चौधरी