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'मिसाइल डिफेंस पर कुछ भी नहीं सुनेंगे...', तुर्की में गरजा ईरान, अमेरिकी डिस्ट्रॉयर शिप इजरायल पहुंचा

ईरान ने साफ कहा है कि वो बातचीत तो करना चाहता है लेकिन अमेरिका धमकी देकर बातचीत नहीं करा सकता है. ईरान ने कहा है कि वो अपनी मिसाइल डिफेंस क्षमता को लेकर कुछ भी समझौता नहीं करेगा. ईरान ने कहा कि वह अपनी रक्षा क्षमताओं को बनाए रखेगा और उनका विस्तार करेगा और उन पर बातचीत नहीं करेगा.

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ईरान ने कहा है कि वो अपनी मिसाइल क्षमता पर कोई समझौता नहीं करेगा (File Photo: AFP)
ईरान ने कहा है कि वो अपनी मिसाइल क्षमता पर कोई समझौता नहीं करेगा (File Photo: AFP)

ईरान ने साफ कहा है कि अपने मिसाइल प्रोग्राम पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. तुर्की दौरे पर पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस्तांबुल में तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और रक्षा प्रणाली कभी भी बातचीत का विषय नहीं बनेंगी. उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपनी सुरक्षा और रक्षा से समझौता नहीं करता है. 

अराघची ने कहा कि ईरानी लोगों की सुरक्षा से किसी और का कोई लेना-देना नहीं है, और हम देश की रक्षा के लिए जितनी ज़रूरत होगी उतनी रक्षा क्षमता बनाए रखेगा. 

अराघची के बयान का मतलब साफ है कि ईरान अपने बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और डिफेंस सिस्टम पर कोई कटौती नहीं करेगा. हालांकि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने  न्यूक्लियर प्रोग्राम को बंद करे और लंबी दूरी तक मार कर सकने वाली मिसाइल का उत्पादन बंद करे.

अराघची का ये बयान तब आया है कि जब अमेरिकी नौसेना का एक डिस्ट्रॉयर इज़राइली बंदरगाह ईलात पर डॉक किया है. इजरायल की एक न्यूज एजेंसी ने कहा है कि मिस्र और जॉर्डन के साथ इज़राइल की सीमाओं के पासडिस्ट्रॉयर का आना पहले से प्लान किया गया था और यह अमेरिकी और इज़रायली सेनाओं के बीच चल रहे सहयोग का हिस्सा है. 

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ईरान की ओर से आया बयान और अमेरिका का ये कदम निश्चित रूप से तनाव को बढ़ाने वाला है.  

धमकी देकर बातचीत नहीं शुरू करा सकता अमेरिका

विदेश मंत्री ने कूटनीति और बातचीत को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों का भी ज़िक्र किया. जिसमें धमकियां और ब्लैकमेलिंग भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान जिस तरह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में गंभीरता और दृढ़ता से काम करेगा, उसी तरह ईरानी राष्ट्र के हितों को सुरक्षित करने और क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कूटनीति का इस्तेमाल करने में भी अडिग है. 

उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत जिसमें धमकियां, दादागीरी, धौंस और एकतरफा नाजायज रियायतों की मांगें शामिल हों प्रभावी नहीं हो सकतीं और निश्चित रूप से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ऐसे तरीकों को बर्दाश्त नहीं करेगा. 

बता दें कि ट्रंप ने ईरान को तुरंत बातचीत की टेबल पर आने को कहा है. ट्रंप ने ईरान को पिछले साल जून में हुए जंग की चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वो बातचीत नहीं करता है तो इस बार का हमला पहले से ज्यादा घातक होगा. 

हालांकि तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इस्तांबुल में यह भी कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने को तैयार है, लेकिन "धमकी देकर बातचीत शुरू नहीं कर सकता." अराघची ने कहा कि ईरान की किसी अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की कोई योजना नहीं है, ऐसा करने के लिए पहले रूपरेखा, एजेंडा और स्थान पर तैयारी जरूरी है.

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कभी भरोसेमंद नहीं रहा अमेरिका

अराघची ने कहा, "अमेरिका ने कोई सद्भावना नहीं दिखाई है और वह कभी भरोसेमंद नहीं रहा है. फिर भी ईरान सभी राजनयिक प्रक्रियाओं के लिए तैयार है और बातचीत की मेज पर बैठने को तैयार है."

अराघची ने कहा कि तेहरान सभी स्थितियों के लिए तैयार है चाहे वह युद्ध हो या कूटनीति. पिछले साल जून की तुलना में अब और भी बेहतर तरीके से तैयार है, जब इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे. 

उन्होंने दोहराया कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं मांगे हैं, लेकिन यह भी कहा कि ईरान "अपनी रक्षा क्षमताओं को बनाए रखेगा और उनका विस्तार करेगा और उन पर बातचीत नहीं करेगा."

मध्यस्थता को तैयार तुर्की

कॉन्फ्रेंस के दौरान तुर्की के विदेश मंत्री फिदान ने ईरान और अमेरिका से तुरंत बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह किया और कहा कि क्षेत्र में आगे तनाव बढ़ने से रोकने का एकमात्र तरीका कूटनीति है. 

उन्होंने कहा कि तुर्की दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए एक मध्यस्थ के रूप में काम करने को तैयार है. 


 

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