1 नवंबर से मोबाइल यूजर्स के एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब सभी स्मार्टफोन यूजर्स को अनजान कॉलर का नाम दिखाना जरूरी होगा. नए निमय की मदद से साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाना है. टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI इस सर्विस को लेकर टेस्टिंग भी कर चुका है.
भारत में बीते कुछ महीने से Calling Name Presentation (CNAP) को लेकर टेस्टिंग की जा रही थी. कई लोगों को अनजान नंबर से कॉल आने पर कॉलर का नाम भी दिखाया जा रहा है. अब सभी कंपनियों को कॉलर का नाम फोन डिस्प्ले पर दिखाना जरूरी होगा.
नए नियम के तहत स्मार्टफोन के डिस्प्ले पर भी वही नाम दिखाया जाएगा, जिसके नाम से सिम कार्ड को खरीदा गया है. कॉलर का नाम दिखाना डिफॉल्ट ऑन रहेगा, इसके लिए यूजर्स को किसी सेटिंग्स में जाकर ऑन करने की जरूरत नहीं होगी.
उदाहरण के रूप में समझें
उदाहरण के तौर पर अगर सिम कार्ड को रमेश के नाम पर खरीदा है और सिम कार्ड को उनकी पत्नी जानकी इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में जब भी जानकी किसी को कॉल करेंगी और सामने वाले ने उनका कॉन्टैक्ट सेव नहीं किया तो कॉल रिसीव करने वालो को मोबाइल डिस्प्ले पर रमेशा नाम दिखाया जाएगा.
साइबर ठगी के केस रोकने की कोशिश
भारत सरकार, सरकारी एजेंसियां और भारतीय बैंक मिलकर लंबे समय से साइबर फ्रॉड को रोकने की दिशा में काम कर रहे हैं. अक्सर अनजान नंबर से आने वाले कॉल साइबर ठगों के भी होते हैं. ऐसे में स्पैम अलर्ट नाम का फीचर शुरू किया.
स्पैम कॉलर की मिलती है जानकारी
अगर कोई अनजान नंबर से कॉल आता है, तो नंबर के साथ स्पैम कॉल लिखा होता है. ऐसे में यूजर्स कॉल उठाने से पहले ही अलर्ट हो जाते हैं. अब नाम दिखाने से यूजर्स को सहूलियत होगा. इससे पहले बहुत से लोग अनजान नंबर से आने वाली कॉलर्स का नाम पता करने के लिए ट्रूकॉलर ऐप का यूज करते थे.