ऐपल के सॉफ्टवेयर अपडेट iOS18 को लेकर कंपनी की मुश्किलें अब और बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं. इंडियन कंज्यूमर रेगुलेटर यानी CCPA ने ऐपल के खिलाफ चल रही जांच को और आगे बढ़ा दिया है. मामला सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ऐपल के सॉफ्टवेयर वारंटी के टर्म्स एंड कंडीशन भी जांच के घेरे में आ गए हैं.
कंज्यूमर रेगुलेटर ये पता करने की कोशिश कर रहा है कि iOS 18 अपडेट के बाद कुछ यूजर्स के iPhone में आई दिक्कतों के लिए उन्हें अपनी जेब से पैसे क्यों देने पड़े. आइए जानते हैं iOS 18 अपडेट के मामले में क्या हुआ था और अब सरकार ऐपल से क्या पूछ रही है.
जानिए जांच करने की वजह
हर साल ऐपल अपने iPhone के लिए नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करता है. इसका मकसद फोन में नए फीचर्स और बेहतर एक्सपीरियंस देना होता है. लेकिन iOS 18 अपडेट के बाद कुछ यूजर्स ने अपने iPhone में कई तरह की दिक्कतों की शिकायत की.
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CCPA के पास आई शिकायतों में फोन की स्क्रीन पर ग्रीन, पिंक और व्हाइट लाइन आने जैसी समस्याएं शामिल थीं. इसके अलावा माइक्रोफोन और दूसरे फंक्शन में भी दिक्कत की शिकायत की गई. सबसे बड़ी बात ये थी कि कुछ यूजर्स को इन समस्याओं को ठीक करवाने के लिए रिपेयर और डिस्प्ले बदलने के पैसे देने पड़े.
रेगुलेटर का कहना है कि अगर ये दिक्कतें ऐपल के सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद हुई हैं, तो फिर इसका खर्च यूजर्स से क्यों लिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक iPhone 15 की स्क्रीन बदलने का अनुमानित खर्च 27,900 रुपये तक हो सकता है, जो फोन की कीमत का एक बड़ा हिस्सा है.
सरकार ने जांच को और आगे बढ़ाया
CCPA ने पहले ऐपल से इस मामले में जवाब मांगा था. लेकिन अब 29 जुलाई को रेगुलेटर ने मामले को अपनी जांच विंग के पास भेज दिया है. इसका मतलब है कि अब इस मामले की ज्यादा डिटेल में जांच होगी. रेगुलेटर ने इसे कंज्यूमर राइट्स के संभावित उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है.
अगर जांच में ऐपल दोषी पाया जाता है, तो कंपनी पर जुर्माना लग सकता है. इसके अलावा उसे ग्राहकों को रिफंड देने या अपनी बिजनेस प्रैक्टिस में बदलाव करने के लिए भी कहा जा सकता है.
ऐपल ने क्या कहा?
ऐपल ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. कंपनी का कहना है कि iOS 18 को रिलीज करने से पहले इसकी काफी टेस्टिंग की गई थी और भारत में सॉफ्टवेयर से जुड़ी कोई बड़ी या सिस्टम वाली समस्या नहीं मिली. ऐपल ने ये भी कहा है कि CCPA का मामला सिर्फ 75 शिकायतों पर आधारित है. कंपनी के मुताबिक जून 2026 तक करीब 11 फीसदी iPhone ही iOS 18 पर चल रहे थे.
ऐपल की एक और बड़ी दलील उसकी सॉफ्टवेयर वारंटी को लेकर है. कंपनी के मुताबिक उसके सॉफ्टवेयर लाइसेंस में पहले से बताया जाता है कि सॉफ्टवेयर किसी तरह की वारंटी के साथ नहीं आता. कंपनी का कहना है कि ऐसी शर्तें सिर्फ ऐपल में नहीं हैं, बल्कि दूसरी बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भी इसी तरह की शर्तें रखती हैं.
लेकिन CCPA का कहना है कि मामला सिर्फ टर्म्स एंड कंडीशन का नहीं है. अगर सॉफ्टवेयर अपडेट की वजह से यूजर्स को नुकसान हुआ है और फिर उसी नुकसान को ठीक कराने के लिए उनसे भारी पैसा लिया गया, तो ये कंस्यूमर राइट्स का मामला बन सकता है. अब इस पूरी जांच में ऐपल की सॉफ्टवेयर वारंटी और यूजर्स से लिए गए रिपेयर चार्ज दोनों पर नजर रहेगी.