एक समय था जब Apple के प्रोडक्ट भारत में सिर्फ चुनिंदा लोगों के पास ही होते थे. iPhone खरीदना लग्जरी माना जाता था और Apple Store भी देश में नहीं थे. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. भारत अब सिर्फ आईफोन एसेंब्लिंग का बड़ा सेंटर नहीं बन रहा, बल्कि ऐपल के लिए सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में भी शामिल हो गया है,
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐपल ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में पहली बार 10 अरब डॉलर से ज्यादा की बिक्री दर्ज की है. यानी कंपनी ने भारतीय बाजार में अब तक की सबसे बड़ी कमाई की है. यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब दुनिया के कई बाजारों में स्मार्टफोन की बिक्री धीमी पड़ रही है, लेकिन भारत में ऐपल की मांग लगातार बढ़ रही है.
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बता दें कि ऐपल दूसरी कंपनियों की तरह वॉल्यूम पर नहीं खेलता है. मसलन, दूसरी कंपनियां जितना मार्जिन 50 प्रोडक्ट्स बेच कर बनाती हैं ऐपल उतना एक ही सामान बेच कर बना लेता है. ये भी एक वजह की अभी भी भारतीय मार्केट में आईफोन और दूसरे ऐपल प्रोडक्ट्स का मार्केट शेयर एंड्रॉयड और विंडोज के मुकाबले काफी कम हैं, लेकिन फिर भी कंपनी लगातार मुनाफा दर्ज कर रही है.
ऐपल की इस ग्रोथ के पीछे सिर्फ iPhone नहीं है. कंपनी के MacBook, iPad, Apple Watch और AirPods की बिक्री भी लगातार बढ़ी है. खास बात यह है कि अब ऐपल भारत में सिर्फ ऑनलाइन या प्रीमियम रीसेलर के भरोसे नहीं है. कंपनी अपने रिटेल नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ा रही है. हाल के महीनों में बेंगलुरु और पुणे में नए ऐपल स्टोर खुले हैं. इसके अलावा नोएडा और मुंबई में भी नए स्टोर खोलने की तैयारी चल रही है. चूंकि अमेरिका जैसे मार्केट में एक तरह से सैचुरेशन आ रहा है. लेकिन भारतीय स्मार्टफोन मार्केट अब भी खुला है और आईफोन के शौकीनों की संख्या काफी है. पहले जो लोग ऐपल प्रोडक्ट महंगे होने की वजह से नहीं खरीदते थे, वो भी EMI पर खरीद रहे हैं.
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ऐपल के लिए भारत सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि फ्यूचर की स्ट्रैटिजी का अहम हिस्सा बन चुका है. चीन में बढ़ती चुनौतियों और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के बाद कंपनी लगातार भारत पर दांव लगा रही है. आज बड़ी संख्या में आईफोन भारत में तैयार किए जा रहे हैं और इनका बड़ा हिस्सा विदेशों में भी एक्सपोर्ट हो रहा है. इससे भारत आईफोन की ग्लोबल सप्लाई चेन का भी अहम हिस्सा बन गया है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग तेजी से बढ़ रही है. पहले जहां लोग सिर्फ मिड-रेंज फोन खरीदते थे, वहीं अब EMI, बैंक ऑफर और एक्सचेंज स्कीम की वजह से महंगे आईफोन भी ज्यादा लोगों की पहुंच में आ गए हैं. यही वजह है कि ऐपल को भारत में लगातार नए ग्राहक मिल रहे हैं.
ऐपल की स्ट्रैटिजी भी बदल गई है. पहले कंपनी भारत को सिर्फ एक उभरते बाजार के तौर पर देखती थी. अब वह यहां अपने पूरे इकोसिस्टम पर फोकस कर रही है. अगर कोई कस्टमर iPhone खरीदता है तो उसके बाद AirPods, Apple Watch, MacBook और iCloud जैसी सर्विस का इस्तेमाल करने की संभावना भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि ऐपल भारत में सिर्फ फोन बेचने के बजाय अपना पूरा इकोसिस्टम मजबूत करने में जुटी है.
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ऐपल के सीईओ टिम कुक भी कई बार कह चुके हैं कि भारत कंपनी के सबसे अहम बाजारों में शामिल है. हाल की कमाई के आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि भारत अब ऐपल के लिए सिर्फ भविष्य का बाजार नहीं, बल्कि मौजूदा समय में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाला बिजनेस बन चुका है. अगले महीने iPhone 18 सीरीज लॉन्च होगी. हालांकि इस सीरीज को ऐपल के नए सीईओ जॉन टर्नस पेश कर सकते हैं, क्योंकि मौजूदा सीईओ टिम कुक रिटायरमेंट ले रहे हैं और जॉन टर्नस उन्हें रिप्लेस कर रहे हैं.
आने वाले सालों में ऐपल भारत में और ज्यादा स्टोर खोल सकता है, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा सकता है और नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के लिए खास ऑफर भी ला सकता है. अगर यही रफ्तार बनी रही, तो भारत ऐपल के सबसे बड़े बाजारों में शामिल हो सकता है.