scorecardresearch
 

हिंदी में ज्यादा बेहतर बातचीत करता है Anthropic का Claude, कंपनी ने भारतीय रुपये में लॉन्च किए प्लान

अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रॉपिक ने कहा है उनका Claude AI हिंदी लैंग्वेज में ज्यादा गर्मजोशी से बात करता है. इंग्लिश के मुकाबले हिंदी बात करने पर ये ज्यादा अपनापन दिखाता है.

Advertisement
X
Anthropic says Claude doesn't respond the same in every language, with Hindi users getting warmer, friendlier and more encouraging replies than English speakers.
Anthropic says Claude doesn't respond the same in every language, with Hindi users getting warmer, friendlier and more encouraging replies than English speakers.

ज़्यादातर अमेरिकी एआई कंपनियां भारत को बड़ा मार्केट समझ रही हैं. वजह ये है कि आबादी के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है. ऐसे में कंपनियां भारतीय यूजर डेटा से अपना एआई ट्रेन करा रही हैं. एक तरह से भारत इनके लिए एक टेस्टिंग ग्राउंड जैसा बना हुआ है 

OpenAI के ChatGPT और Google Gemini को टक्कर देने वाली AI कंपनी एंथ्रॉपिक इन दिनों भारत को लेकर लगातार बड़े फैसले ले रही है. 

एक तरफ कंपनी ने पहली बार भारत के लिए Claude AI की कीमत रुपये में तय कर दी है. दूसरी तरफ कंपनी की नई रिसर्च में सामने आया है कि Claude AI अलग-अलग भाषाओं में अलग तरह का व्यवहार करता है. 

हिंदी में ज्यादा अच्छे से बात करता है क्लौड!

सबसे दिलचस्प ये है कि कंपनी ने कहा है कि हिंदी में बात करने पर Anthropic Claude सबसे ज्यादा गर्मजोशी और दोस्ताना अंदाज दिखाता है. यानी अब एंथ्रॉपिक सिर्फ भारत में यूजर बढ़ाना नहीं चाहता, बल्कि भारतीय यूजर्स के हिसाब से अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भी बेहतर बनाने में जुटा है. कंपनी ने ये भी बताया है कि क्लौड अरबी और हिंदी में बातचीत करने पर ज्यादा ह्यूमरस हो जाता है और अपनापन भी दिखाता है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: Airtel का सस्ता रिचार्ज पैक, 200 से कम में महीने पर कॉलिंग और डेटा

ज़ाहिर है भारतीय यूजर्स के डेटा इनके मॉडल्स ट्रेन होंगे और बदले में भारतीय यूजर्स को इन्हीं एआई सर्विसेज को महंगे क़ीमत पर खरीदना होगा. कुल मिला कर बात ये है कि इन्हें पैसे भी दीजिए और डेटा भी. 

ये हैं क्लौड के प्लान्स, भारतीय रुपये में

एंथ्रॉपिक ने ऐलान किया है कि अब भारतीय यूजर्स Claude AI का सब्सक्रिप्शन सीधे रुपये में खरीद सकेंगे. पहले इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता था. इससे विदेशी मुद्रा शुल्क और टैक्स जैसी अतिरिक्त दिक्कतें आती थीं. 

यह भी पढ़ें: Jio का नया धमाका, AI केयर, कॉल एजेंट से लेकर पर्सनल एआई मैनेजर तक, यूजर्स को मिलेंगी ये सर्विस

अब कंपनी ने भारत के लिए अलग कीमतें तय कर दी हैं. Claude Pro प्लान की शुरुआती कीमत 2,000 रुपये प्रति महीने रखी गई है. इसके अलावा Claude Max और Team प्लान भी भारतीय कीमतों में उपलब्ध होंगे. 

अमेरिका के बाद एंथ्रॉपिक का सबसे बड़ा बाजार भारत

एंथ्रॉपिक का कहना है कि अमेरिका के बाद भारत अब क्लौड का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है. कंपनी के मुताबिक क्लौड के कुल इस्तेमाल का लगभग 5.8 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. यही वजह है कि कंपनी अब भारतीय बाजार पर ज्यादा ध्यान दे रही है. उसने बेंगलुरु में अपना ऑफिस भी शुरू किया है और भारत के लिए अलग रणनीति बना रही है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: बेकाबू होता AI! पहली बार एआई ने खुद से किया साइबर अटैक, फिरौती वाले रैंसमवेयर का लिया सहारा

लेकिन इसी बीच एंथ्रॉपिक की एक रिसर्च ने भी लोगों का ध्यान खींचा. कंपनी ने तीन लाख से ज्यादा गुमनाम बातचीत का विश्लेषण किया ताकि यह समझा जा सके कि Claude अलग-अलग भाषाओं में कैसे जवाब देता है. रिसर्च में पाया गया कि भाषा बदलने के साथ क्लौड का व्यवहार भी बदल जाता है. 

रिसर्च के मुताबिक हिंदी में बातचीत करने पर क्लौड सबसे ज्यादा गर्मजोशी, सहानुभूति और दोस्ताना अंदाज दिखाता है. वहीं रूसी भाषा में जवाब ज्यादा सीधे और फैक्ट्स पर आधारित होते हैं. यानी AI सिर्फ शब्दों का अनुवाद नहीं करता, बल्कि लैंग्वेज के साथ अपना जवाब देने का तरीका भी बदल लेता है.

नए रिसर्च से खुलासा

एंथ्रॉपिक ने अपनी रिसर्च में चार बड़े पैमाने बनाए हैं, जिनसे AI के व्यवहार को मापा गया. इनमें गर्मजोशी बनाम सख्ती, लंबा जवाब बनाम छोटा जवाब, सावधानी बनाम सहमति और साफगोई बनाम काम पूरा करने की प्राथमिकता शामिल है. कंपनी का कहना है कि अलग-अलग भाषाओं में इन पैमानों पर Claude का व्यवहार अलग दिखाई देता है. 

इसका मतलब यह नहीं है कि हिंदी बोलने वालों के लिए Claude अलग AI बन जाता है. कंपनी का कहना है कि उसका मूल मॉडल वही रहता है, लेकिन भाषा के हिसाब से जवाब देने का तरीका बदल सकता है ताकि बातचीत ज्यादा स्वाभाविक लगे. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या परमाणु हथियार जितना पावरफुल है एंथ्रॉपिक का नया Claude Mythos? क्यों मची इंटरनेट पर सनसनी

भारत के लिए यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां करोड़ों लोग अंग्रेजी की बजाय हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में AI का इस्तेमाल करना चाहते हैं. अगर AI स्थानीय भाषा को बेहतर समझे और उसी अंदाज में जवाब दे, तो उसका इस्तेमाल शिक्षा, ऑफिस, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में तेजी से बढ़ सकता है.

एंथ्रॉपिक के ये दोनों फैसले एक साथ देखने पर साफ संकेत देते हैं कि कंपनी भारत को सिर्फ बड़ा बाजार नहीं, बल्कि भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण AI बाजार मान रही है. पहले भारतीय यूजर्स के लिए रुपये में भुगतान की सुविधा लाई गई. अब कंपनी यह भी दिखा रही है कि उसका AI भारतीय भाषाओं को बेहतर समझने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

आने वाले समय में AI कंपनियों के बीच मुकाबला सिर्फ सबसे ताकतवर मॉडल बनाने का नहीं रहेगा. असली मुकाबला इस बात का होगा कि कौन-सी कंपनी भारतीय भाषाओं, भारतीय यूजर्स और उनकी जरूरतों को सबसे बेहतर तरीके से समझ पाती है. फिलहाल एंथ्रॉपिक के ताजा कदम यही संकेत दे रहे हैं कि वह इस दौड़ में भारत को सबसे अहम बाजार मानकर आगे बढ़ रहा है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement