आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां यह सिर्फ इंसानों की मदद करने वाला टूल नहीं रहा. अब यह खुद सिस्टम को समझ सकता है, उसमें छुपी कमजोरियां ढूंढ सकता है और जरूरत पड़े तो उन कमजोरियों का इस्तेमाल भी कर सकता है.
Anthropic का नया AI मॉडल Mythos इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है. Mythos को समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि यह एक साधारण चैटबॉट नहीं है.
यह Claude सीरीज का सबसे एडवांस्ड वर्जन है, जिसे खास तौर पर पब्लिक के लिए रिलीज नहीं किया गया है. ये इतना वारफुल है और इसके यूज इतने खतरनाक हो सकते हैं कि इसे हथियार तक माना जा रहा है.
सरकार के लिए हथियार बन सकता है मिथोस
Mythos को किसी देश की सरकार दूसरे पर अटैक करने के लिए यूज कर सकती है. इस मॉडल में इतनी पावर है कि वो किसी भी मजबूत सिस्टम हैक कर सकते हैं.
इतना ही नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका की एजेंसी NSA एंथ्रोपिक के इस अनरिलीज्ड मॉडल को यूज भी कर रही है. इससे विवाद भी हो रहा है. दरअसल हाल ही में पेंटागन की डील एंथ्रोपिक के साथ टूट गई थी. इसके बाद अब ये ख़बर दुनिया भर को हैरान कर रही है कि डील टूटने के बाद भी अमेरिकी सरकार की एजेंसी एंथ्रोपिक का मॉडल कैसे यूज़ कर रही है.
Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सिक्योरिटी एजेंसी NSA एंथ्रोपिक के Mythos को यूज कर रही है. जबकि पेंटागन एंथ्रोपिक को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका है.
एंथ्रोपिक का दावा - सिर्फ कुछ एक्सपर्ट्स कर रहे हैं यूज
एंथ्रोपिक ने इसे सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनियों और सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को दिया है, ताकि वे इससे पहले सिस्टम की कमजोरियां ठीक कर सकें.
असल में Mythos की सबसे बड़ी पावर है उसका सोचना और समझना. यह सिर्फ कोड पढ़ता नहीं, बल्कि उसे समझता है. यह हजारों-लाखों लाइनों के कोड में ऐसे छोटे-छोटे बग्स ढूंढ सकता है जो सालों से छिपे हुए थे.
25 साल पुराने बग्स ढूंढ निकाले
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस AI ने ऐसे बग्स पकड़े जो 20-25 साल पुराने थे और कई बार टेस्ट होने के बावजूद कभी सामने नहीं आए. लेकिन यहां कहानी खत्म नहीं होती. Mythos सिर्फ बग्स ढूंढता नहीं है, बल्कि यह भी समझ लेता है कि उस बग का इस्तेमाल करके सिस्टम में कैसे घुसा जा सकता है.
यानी यह सोचता है कि अगर कोई हैकर होता तो वह क्या करता. और यही इसे बाकी AI मॉडल्स से अलग और ज्यादा खतरनाक बनाता है. इसे आसान भाषा में समझें तो पहले साइबर सिक्योरिटी में दो अलग काम होते थे.
बग ढूंढने से हैकिंग तक
एक टीम बग्स ढूंढती थी और दूसरी टीम उन्हें एक्सप्लॉइट करके देखती थी कि सिस्टम कितना कमजोर है. Mythos इन दोनों कामों को एक साथ कर सकता है. वह खुद बग ढूंढता है और फिर उसका इस्तेमाल करने का तरीका भी बना देता है.
यही वजह है कि टेक दुनिया में इसे गेम चेंजर कहा जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, Mythos ने हजारों जीरो डे वल्नरेबिलिटीज़ ढूंढी हैं. Zero-day का मतलब होता है ऐसी कमजोरी जिसके बारे में अभी तक डेवलपर्स को भी नहीं पता.
अब यहां सबसे बड़ा सवाल आता है, क्या यह अच्छी चीज है या खतरनाक? जवाब थोड़ा मुश्किल है.
एक तरफ देखें तो Mythos साइबर सिक्योरिटी को मजबूत बना सकता है. अगर यह पहले ही कमजोरियां ढूंढ ले, तो कंपनियां उन्हें ठीक कर सकती हैं. यही वजह है कि Anthropic ने Project Glasswing शुरू किया, जिसमें बड़ी कंपनियों को पहले एक्सेस दिया गया ताकि वे अपने सिस्टम को सिक्योर कर सकें.
लेकिन दूसरी तरफ खतरा भी उतना ही बड़ा है. अगर यही टेक्नोलॉजी गलत हाथों में चली जाए, तो साइबर हमले पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकते हैं. अब किसी हैकर को महीनों रिसर्च करने की जरूरत नहीं होगी. AI खुद उसे रास्ता दिखा सकता है.
ताजा रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि Mythos जैसे AI सिस्टम्स साइबर अटैक को ऑटोमैटिक तरीके से प्लान और एग्जिक्यूट कर सकते हैं. यानी यह सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि एक एजेंट की तरह काम कर सकता है जो खुद फैसले लेता है.
ये अपने ऊपर लगे कंट्रोल को बायपास कर सकता है
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में यह भी दावा किया गया कि टेस्टिंग के दौरान AI ने अपने ऊपर लगे कंट्रोल्स को समझकर उन्हें बायपास करने की कोशिश की. यानी यह सिर्फ इंस्ट्रक्शन फॉलो नहीं करता, बल्कि अपने टारगेट तक पहुंचने के लिए रास्ता भी बदल सकता है.
यही वजह है कि दुनिया भर की सरकारें और फाइनेंशियल संस्थाएं अब इसे लेकर सतर्क हो गई हैं. रेगुलेटर्स इस बात पर नजर रख रहे हैं कि कहीं यह टेक्नोलॉजी सिस्टम को नुकसान न पहुंचा दे.
एक और बड़ा असर जो देखने को मिल रहा है, वह है बग एक्सप्लोजन. पहले जहां एक सिस्टम में कुछ कमजोरियां मिलती थीं, अब AI हजारों फ्लॉज ढूंढ रहा है. इससे कंपनियों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है, इतने सारे बग्स को ठीक कैसे किया जाएं.
ओपनहाइमर मोमेंट
यानी Mythos ने सिर्फ खतरा नहीं बढ़ाया, बल्कि पूरी साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री का काम ही बदल दिया है. अब चैलेंज यह नहीं है कि बग्स कैसे ढूंढे जाएं, बल्कि यह है कि इतने सारे बग्स में से कौन सा ज्यादा खतरनाक है और पहले किसे ठीक किया जाए.
कुछ एक्सपर्ट्स इसे AI का Oppenheimer Moment भी कह रहे हैं. जैसे न्यूक्लियर ने दुनिया को बदल दिया था, वैसे ही Mythos जैसे AI मॉडल साइबर दुनिया को पूरी तरह बदल सकते हैं.
कंट्रोल किसके पास रहेगा?
क्योंकि Anthropic ने इसे पब्लिक के लिए रिलीज नहीं किया है. कुछ लोग कहते हैं कि यह सही फैसला है, क्योंकि इससे खतरा कम होगा. लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पावर कुछ ही कंपनियों के हाथ में सिमट जाएगी, जिससे ट्रांसपेरेंसी कम हो सकती है.
Mythos सिर्फ एक नया AI मॉडल नहीं है, बल्कि एक हथियार की तरह है. इसका यूज अगर सही के लिए किया गया तो बेहतरीन और इफेक्टिव है, लेकिन गलत हाथों में लगा तो काफी मुश्किल होगी.