आज की जेन जी काफी वक्त फोन और सोशल मीडिया पर बीतता है. कब सुबह से शाम और शाम से रात हो जाती है पता ही नहीं चलता. फोन जेन जी की डेली लाइफ का हिस्सा बन चुका है. लेकिन अब कुछ जेन जी इस आदत को बदलने का कोशिश कर रहे हैं. घंटों-घंटों सोशल मीडिया चलाने और बार-बार फोन चेक करने से परेशान होकर जेन जी इससे दूरी बना रही है. इस ट्रेंड को डिजीटल डिटॉक्स कहा जाता है.
क्या है डिजिटल डिटॉक्स?
डिजिटल डिटॉक्स का मतलब कुछ वक्त के लिए फोन और सोशल मीडिया से ब्रेक लेना या उसका यूज कम करना बोता है. इसका मतलब ये नहीं होता कि आप फोन चलाना ही छोड़ दें बल्कि कोशिश ये रहती है कि आप फोन को जितना कम चला सकते है उतना कम चलाए या उसका यूज कम करें. न कि हर थोड़ी देर में बिना किसी वजह के उसे चेक किया जाए.
ऐप्स की हेल्प से कम कर रहे फोन का इस्तेमाल
द गार्जियन की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 साल की नेलिसा मौकौंडी ने फोन का इस्तेमाल कम करने के लिए ओपल ऐप डाउनलोड किया. ये ऐप इंस्टाग्राम और दूसरे डिस्ट्रैक्शन वाले ऐप्स को ब्लॉक कर देता है. इन्हें दोबारा खोलने के लिए यूजर को मैथ्स के सवाल हल करने पड़ते हैं.
स्मार्टफोन छोड़कर नॉर्मल फोन अपना रहे युवा
कुछ जेन जी स्मार्टफोन की जगह ऐसे फोन अपना रहे हैं, जिनमें सोशल मीडिया और दूसरी ज्यादा यूज होने वाली ऐप्स नहीं होती. रिपोर्ट में 23 साल की केंडल श्रोए का जिक्र है, जिन्होंने लाइट फोन यूज करना शुरू किया. इसमें कॉल और मैसेज जैसे जरूरी फीचर्स ही मिलते हैं.
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वहीं, 19 साल की श्रेया नल्लामोथु ने ब्रिक नाम का डिवाइस बनाया, जिसकी हेल्प से फोन में चुने हुए ऐप्स को ब्लॉक किया जा सकता है. उन्होंने इसे बनाने के लिए सिर्फ 8 डॉलर के NFC टैग इस्तेमाल किए.
ऑनलाइन दोस्तों के बजाय रियल लाइफ में मिलना पसंद
अब कुछ युवा सोशल मीडिया पर घंटों बिताने के बजाय दोस्तों से आमने-सामने मिलना पसंद कर रहे हैं. पाय (पीपल आय इंजॉय) जैसे ऐप्स आसपास होने वाले कॉन्सर्ट, इवेंट्स और दूसरी एक्टिविटीज की जानकारी देते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऐप के यूजर्स जुलाई में 1.2 लाख से बढ़कर अगस्त में 3 लाख हो गए.
सोशल मीडिया से नहीं, उसकी लत से दूरी
26 साल के हान चोई ने सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट कर दिए, ताकि वे वर्कआउट और दोस्तों के साथ वक्त बिता सकें. इससे साफ है कि जेन जी अब अपना टाइम सिर्फ स्क्रीन पर नहीं बिताना चाहती. वे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तो करना चाहती हैं, लेकिन ये भी तय करना चाहती हैं कि उनका कितना वक्त फोन पर खर्च हो.