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Asian Games: 3-1 की बढ़त, फिर एक खिलाड़ी बाहर... 10 खिलाड़ियों के साथ पाकिस्तान को कैसे हराया? हार्दिक सिंह ने खोला राज

'हर‍ियाणा पंचायत आजतक' के 'जब खेले हम जी जान से' सेशन में हॉकी ख‍िलाड़ी हार्द‍िक स‍िंह और और न‍िशानेबाज नीरू ढांडा भी पहुंची. इस दौरान उन्होंने एश‍ियन गेम्स के अपने अनुभवों पर बात की. वहीं पाकिस्तान संग मैच में कैसे भारत ने जीत दर्ज की, इस बारे में भी हार्द‍िक ने टीम की रणनीत‍ि भी शेयर की.

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‘हरियाणा पंचायत आजतक’ कार्यक्रम में नीरू ढांडा और हार्द‍िक सिंह ने  श‍िरकत की (Photo: Arun Kumar/India Today)
‘हरियाणा पंचायत आजतक’ कार्यक्रम में नीरू ढांडा और हार्द‍िक सिंह ने श‍िरकत की (Photo: Arun Kumar/India Today)

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय हॉकी टीम ने पाकिस्तान को सेमीफाइनल में 4-3 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया था. इसके बाद भारत ने मलेशिया को 5-1 से हराकर गोल्ड मेडल जीता.

पाकिस्तान के खिलाफ उस हाई-इंटेंसिटी मुकाबले में एक वक्त भारत को 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा था. 'हरियाणा पंचायत आजतक' के 'जब खेले हम जी जान से' सेशन में गुरुवार (8 अक्टूबर) हॉकी खिलाड़ी हार्दिक सिंह ने इस मुकाबले से लेकर एशियन गेम्स के दबाव तक कई बातें साझा कीं. वहीं इसी सेशनल में न‍िशानेबाज नीरू ढांडा भी पहुंची थीं. 

हार्दिक ने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला काफी हाई-इंटेंसिटी वाला था. हाफ टाइम तक भारत 3-1 से आगे था, लेकिन इसके बाद एक खिलाड़ी को कार्ड मिलने के कारण टीम 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने लगी. पाकिस्तान ने इसका फायदा उठाया और स्कोर 3-2 कर दिया. 

दरअसल, भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर तनातनी देखने को मिली थी. दिलप्रीत की एक खिलाड़ी से बहस हो गई, जिसके बाद दोनों टीमों के कप्तानों ने अपने खिलाड़ियों को अलग किया. रेफरी ने दिलप्रीत को ग्रीन कार्ड दिखाया. मैच में कुछ समय के लिए भारत का एक खिलाड़ी कम हो गया था.

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हार्दिक के मुताबिक, उस समय टीम भी थोड़ी शॉक्ड थी. पाकिस्तान के खिलाफ मैच में नेशनलिटी वाली फीलिंग भी आती है, लेकिन प्रोफेशनल हॉकी में खिलाड़ियों को इसे किनारे रखकर खेलना होता है. उन्होंने कहा कि टीम को अपनी ट्रेनिंग, कोच की रणनीति और एक-दूसरे पर पूरा भरोसा था.

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आखिरी 40 सेकंड में भी गोल मार सकते थे

हार्दिक ने कहा कि टीम के अंदर यह भरोसा था कि अगर भारत ओलंपिक में दो बार मेडल जीत सकता है तो पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी 40 सेकंड में भी गोल किया जा सकता है. यही भरोसा मैदान पर दिखा और भारत ने 4-3 से मुकाबला अपने नाम कर लिया. हार्दिक ने माना कि इसी वजह से यह मुकाबला एक मजबूत और यादगार सेमीफाइनल बना.

एशियन गेम्स में इतना दबाव कभी महसूस नहीं किया
हार्दिक ने कहा कि अपने 8 साल के करियर में उन्होंने एशियन गेम्स जितना दबाव कभी महसूस नहीं किया था. पिछले चार साल में भारत की एशियन टीमों के खिलाफ शानदार विनिंग स्ट्रीक रही थी. करीब 30 मैचों की यह स्ट्रीक भी टीम और लोगों की उम्मीदें बढ़ा रही थी.

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इसके साथ वर्ल्ड कप का निराशाजनक प्रदर्शन भी था. वर्ल्ड कप के बाद महज दो हफ्ते में एशियन गेम्स के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होना बड़ी चुनौती थी. हार्दिक ने कहा कि वर्ल्ड कप के लिए दो साल की मेहनत थी और उसके सिर्फ दो हफ्ते बाद एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करना था.

उनके मुताबिक, इतनी कम अवधि में शरीर को फिर से पीक पर लाना संभव नहीं था. मानसिक दबाव भी था, क्योंकि भारतीय हॉकी से लोगों को काफी उम्मीदें थीं. हालांकि टीम ने इस दौर को भी एंजॉय किया और लगातार दूसरे एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के लक्ष्य पर ध्यान रखा.

 

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‘हरियाणा पंचायत आजतक’ में न‍िशानेबदाज नीरू ढांडा और हॉकी ख‍िलाड़ी हार्द‍िक सिंह (Photo: Arun Kumar/India Today)

नीरू ढांडा ने ट्रैप शूटिंग में रचा इतिहास
इस सेशन में निशानेबाज नीरू ढांडा भी मौजूद थीं. हरियाणा की 26 वर्षीय नीरू ने एशियन गेम्स में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में 28 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता था. यह भारत के लिए इस इवेंट का पहला महिला एशियाई स्वर्ण था.
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एशियन गेम्स से करीब एक महीने पहले नीरू ने ISSF वर्ल्ड कप में 125 में से 121 का स्कोर करते हुए गोल्ड जीता था. वह इस स्तर पर ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला शूटर बनी थीं. नीरू ने बताया कि ISSF वर्ल्ड कप का स्तर ओलंपिक के बराबर माना जा सकता है, क्योंकि इसमें दुनिया के ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं.

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नीरू के मुताबिक, उनकी सफलता के पीछे पिछले दो-तीन साल की मेहनत थी. वह कई बार फाइनल में पहुंचकर हार चुकी थीं, लेकिन उनका लक्ष्य गोल्ड जीतना था. दबाव से निपटने के लिए उन्होंने ट्रेनिंग का तरीका भी बदला. वह क्राउड और शोर की आवाजों के बीच अभ्यास करती थीं, ताकि शूटिंग के दौरान डिस्ट्रैक्शन के बावजूद अपने प्रोसेस पर फोकस कर सकें.

उन्होंने बताया कि शूटिंग में शरीर और दिमाग का स्थिर रहना जरूरी है. लोग कहते हैं कि शूटिंग के समय दिमाग पूरी तरह ब्लैंक होना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाती थीं. इसलिए उन्होंने अपने विचारों के साथ ही ट्रेनिंग करना शुरू किया.

मेडल टैली भी बढ़ाती है खिलाड़ियों का दबाव
हार्दिक ने बताया कि एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के दिमाग में मेडल टैली भी चलती रहती है. हॉकी का टूर्नामेंट गेम्स की शुरुआत से लेकर आखिरी दिन तक चलता है. इस दौरान जब दूसरे खेलों में भारतीय खिलाड़ी मेडल जीतते हैं तो खुशी होती है, लेकिन साथ ही यह विचार भी आता है कि भारत की टैली में हॉकी का मेडल कब जुड़ेगा.

नीरू ने भी बताया कि जब राइफल और पिस्टल में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हुआ तो शॉटगन टीम पर दबाव बढ़ गया था. एक तरफ देश और परिवार के लिए मेडल जीतने की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ खुद की उम्मीदें भी थीं.

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दोनों खिलाड़ियों ने इस बात पर जोर दिया कि एथलीट के लिए छोटी-छोटी चीजें भी मायने रखती हैं. नींद, खाना, हाइड्रेशन से लेकर मैच के दौरान आने वाले विचार तक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं. हार्दिक ने कहा कि क्रिकेटरों के पास IPL जैसे विकल्प हैं, लेकिन दूसरे खेलों के खिलाड़ियों के लिए एशियन गेम्स और ओलंपिक्स जैसे बड़े टूर्नामेंट सम्मान के साथ वित्तीय सुरक्षा का भी बड़ा जरिया हैं.

हार्दिक ने कहा कि खिलाड़ी चार साल की मेहनत के बाद एक बड़े टूर्नामेंट में उतरता है. टीम गेम में 33 खिलाड़ियों का स्क्ॉड  हो सकता है, लेकिन उनमें से सिर्फ 16 खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं. बाकी खिलाड़ियों की मेहनत और त्याग भी उतना ही होता है.

‘पोडियम पर राष्ट्रगान सुनना सबसे बड़ी फीलिंग’
हार्दिक ने कहा कि पोडियम पर खड़े होकर भारत का राष्ट्रगान सुनना किसी भी एथलीट के लिए सबसे बड़ी फीलिंग होती है. उन्होंने कहा कि जब दूसरे देश में भारत का राष्ट्रगान बजता है तो उस पल के लिए किया गया हर त्याग सार्थक लगता है.

उन्होंने आगे कहा कि ओलंपिक्स में जाना हो तो लक्ष्य गोल्ड का होना चाहिए. नतीजे पर ध्यान देने के बजाय खिलाड़ी को उस समय की प्रक्रिया, अपनी आदतों और शेड्यूल पर फोकस करना चाहिए.

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वहीं नीरू ने भी कहा कि भारत में अब खेलों के लिए सपोर्ट सिस्टम विकसित हुआ है. खेलो इंडिया, TOPS और स्पोर्ट्स साइंस जैसी व्यवस्थाओं से खिलाड़ियों को तैयारी में मदद मिल रही है. उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों को अपनी ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान देना चाहिए.

एशियन गेम्स में भारत मेडल टैली में चौथे नंबर पर रहा था. भारत ने 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज समेत कुल 85 मेडल जीते थे.

सेशन के अंत में दोनों मेडल विजेताओं को सम्मानित किया गया. इस दौरान आजतक के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद ने भी खिलाड़ियों को सम्मानित किया और नीरू की मां को लेकर उनकी टीवी देखने वाली बात का जिक्र करते हुए कहा कि उनके घर में आज ही टीवी लग जाएगा.

 

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