फीफा वर्ल्ड रैंकिंग में 61, 67 और 85 पर मौजूद टीमें वर्ल्ड कप में अपने पहले मैच में बड़ी अंडरडॉग मानी जा रही थीं. ये तीनों टीमें सोमवार को मैदान पर उतरीं और दिलचस्प बात यह रही कि इनमें से कोई जीती नहीं, लेकिन कोई हारी भी नहीं. वर्ल्ड कप के पहले पांच दिनों और 16 मैचों के बाद तस्वीर यही है कि छोटी मानी जा रही टीमों को हराना आसान नहीं है.
अंडरडॉग टीमों ने किया प्रभावित
सोमवार के सभी चार मैच ड्रॉ रहे और 1958 के बाद पुरुष वर्ल्ड कप में एक ही दिन में इतने ड्रॉ पहली बार देखने को मिले. इन नतीजों को तकनीकी तौर पर उलटफेर भी माना जा सकता है. सबसे बड़ा नतीजा केप वर्डे ने दिया, जिसने अपने पहले वर्ल्ड कप मैच में नंबर 2 स्पेन को 0-0 से रोक दिया. नंबर 67 केप वर्डे के सामने स्पेन पूरे टूर्नामेंट को जीतने का दावेदार माना जा रहा था. केप वर्डे के कोच पेद्रो लेइताओ ब्रिटो, जिन्हें बुबिस्ता कहा जाता है, ने कहा कि इसका मतलब सब कुछ है.
सोमवार के बाकी नतीजों में नंबर 85 न्यूजीलैंड ने नंबर 20 ईरान से 2-2 ड्रॉ खेला. 48 क्वालिफायर टीमों में सबसे निचली रैंकिंग वाली न्यूजीलैंड ने कड़ा मुकाबला किया. नंबर 61 सऊदी अरब ने नंबर 16 उरुग्वे से 1-1 ड्रॉ खेला. नंबर 29 मिस्र ने नंबर 9 बेल्जियम को 1-1 पर रोका. सऊदी अरब के कोच जियोरजियोस डोनिस ने कहा कि स्पेन वाला ड्रॉ शायद इस वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा चौंकाने वाला नतीजा है. चार साल पहले सऊदी अरब ने अपने पहले मैच में बाद में चैंपियन बनी अर्जेंटीना को हराकर चौंकाया था.
एक दिन में चारों मैच रहे ड्रॉ
वर्ल्ड कप, एनसीएए टूर्नामेंट जैसा नहीं है. पहले मैच के नतीजे से न तो कोई टीम बाहर होती है और न ही किसी का आगे बढ़ना पक्का होता है. लेकिन अगर यह टूर्नामेंट मार्च मैडनेस जैसा होता, तो अब तक कई ब्रैकेट टूट चुके होते. सोमवार को मैच शुरू होने से ठीक पहले जारी ऑड्स के मुताबिक स्पेन, केप वर्डे को हराने के लिए -1500 पर था. इसका मतलब था कि 100 डॉलर कमाने के लिए किसी को 1,500 डॉलर लगाने पड़ते. लास वेगास के ऑड्स बनाने वालों ने कहा कि कई पार्ले दांवों में स्पेन को जीत के लिए चुना गया था और वे बहुत जल्दी गलत साबित हो गए.
ड्रॉ वाले उलटफेर की शुरुआत सोमवार से नहीं हुई थी. इससे पहले नंबर 56 कतर ने नंबर 19 स्विट्जरलैंड से 1-1 ड्रॉ खेला था. नंबर 64 बोस्निया और हर्जेगोविना ने नंबर 30 कनाडा से 1-1 ड्रॉ किया था. पहले 16 मैचों में आठ ड्रॉ रहे.
ग्रुप में बढ़ा दबाव, गलती की कम गुंजाइश
उरुग्वे के मैक्सी अराउहो ने कहा कि इससे पता चलता है कि वर्ल्ड कप में पहला मैच खेलना कितना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि यह मुश्किल सिर्फ उनके ग्रुप में नहीं, कई ग्रुप में दिख रही है. अब ग्रुप एफ और ग्रुप एच में गलती की गुंजाइश बहुत कम बची है. वर्ल्ड कप में हर टीम को ग्रुप चरण में तीन मैच मिलते हैं और उसे अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से खेलना होता है. 12 ग्रुप में से हर ग्रुप की पहली दो टीमें नॉकआउट चरण में जाती हैं. इनके अलावा तीसरे स्थान पर रहने वाली आठ सबसे बेहतर टीमें भी आगे बढ़ेंगी.
ग्रुप एफ में न्यूजीलैंड, ईरान, बेल्जियम और मिस्र हैं. ग्रुप एच में उरुग्वे, सऊदी अरब, स्पेन और केप वर्डे हैं. इन दोनों ग्रुप में सभी टीमों के पास एक अंक है और दो मैच बाकी हैं. जीत पर तीन अंक मिलते हैं और हार पर कोई अंक नहीं मिलता. न्यूजीलैंड के एलिजा जस्ट ने कहा कि आगे के लिए बहुत सी अच्छी बातें मिली हैं.
बाकी दो ड्रॉ इतने चौंकाने वाले नहीं थे. नंबर 18 जापान ने नंबर 8 नीदरलैंड्स से 2-2 ड्रॉ खेला, जहां वह मामूली अंडरडॉग था. नंबर 6 ब्राजील और नंबर 7 मोरक्को ने अपनी शुरुआत 1-1 ड्रॉ से की, जैसा उनकी रैंकिंग को देखकर उम्मीद की जा सकती थी. सोमवार तक सिर्फ एक ऐसा मैच रहा, जिसमें फीफा रैंकिंग में अपने प्रतिद्वंद्वी से 10 या उससे ज्यादा स्थान नीचे रही टीम जीती. नंबर 33 आइवरी कोस्ट ने नंबर 23 इक्वाडोर को 1-0 से हराया. यह बहुत बड़ा झटका नहीं था, लेकिन कुछ ड्रॉ ऐसे जरूर रहे जिन्हें उलटफेर कहा जा सकता है. स्पेन के कोच लुइस दे ला फुएंते ने कहा कि फुटबॉल ऐसा ही है और यहां कोई छोटा प्रतिद्वंद्वी नहीं है.
(नोट: सभी रैंकिंग 16 जून 2026 के हिसाब से हैं)