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'मुझे लगा मैं मर जाऊंगा, चलना भी मुश्किल था...', संन्यास के बाद उस्मान ख्वाजा ने किया सबसे दर्दनाक खुलासा

मैदान पर छक्के-चौके बरसाने वाले ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ओपनर उस्मान ख्वाजा ने एक बड़े राज से पर्दा हटाया है. 22 साल की उम्र से करियर के आखिरी तक वह एक जानलेवा बीमारी से चुपचाप लड़ते रहे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं होने दी.

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उस्मान ख्वाजा ने किया बड़ा खुलासा. (PHOTO: AP)
उस्मान ख्वाजा ने किया बड़ा खुलासा. (PHOTO: AP)

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने साल 2026 के शुरुआत में ही इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया था. टेस्ट क्रिकेट में उस्मान ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलिया के लिए कई मैच विनिंग पारियां खेली हैं. 

संन्यास के बाद ख्वाजा ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक बड़ा राज खोला है. दरअसल, 22 साल की उम्र से लेकर अपने पूरे इंटरनेशनल करियर तक उस्मान ख्वाजा एक खतरनाक बीमारी से चुपचाप जूझते रहे. यह बीमारी उनके करियर ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी को खत्म कर सकती थी.

ऑस्ट्रेलियाई स्टोरी को दिए एक इंटरव्यू में उस्मान ख्वाजा ने अपनी दर्दभरी दास्तां शेयर करते हुए बताया कि साल 2009 में जब वह महज 22 साल के थे और अपने करियर के शुरुआती चरण में थे. तब उन्हें रूमेटॉइड अर्थराइटिस नाम की एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला.

उस खौफनाक दौर को याद करते हुए ख्वाजा ने कहा कि मुझे सच में लगा था कि मैं मरने वाला हूं. मैं एक प्रोफेशनल एथलीट से ऐसा इंसान बन गया था जो अपने घर में बाथरूम तक 10 मीटर भी पैदल नहीं चल पा रहा था. घुटने में गंभीर दर्द ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया था कि उनका क्रिकेट करियर शुरू होने से पहले ही खत्म होता दिख रहा था.

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उस्मान ख्वाजा ने हर किसी से छिपा कर रखी थी बीमारी की बात

उस्मान ख्वाजा का यह सफर किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 88 टेस्ट मैच खेले और 16 शतकों की मदद से 6,229 रन बनाए. वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले पाकिस्तानी मूल के और पहले मुस्लिम क्रिकेटर बने.

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि ख्वाजा ने इस बीमारी के बारे में डॉक्टर और टीम के मैनेजमेंट को तो बताया, लेकिन अपने किसी भी साथी खिलाड़ी यहां तक कि अपने बचपन के दोस्त डेविड वॉर्नर और दिग्गज माइकल हसी तक से यह बात छुपा कर रखी. ख्वाजा नहीं चाहते थे कि कोई उन्हें हमदर्दी से देखे या मैदान पर उनके विरोधी उनकी इस कमजोरी का फायदा उठाएं.

'बिना उस दवा के मैं कभी दोबारा नहीं खेल पाता...'

ख्वाजा ने माना कि अगर सही समय पर उन्हें सही इलाज और इंजेक्शन नहीं मिलते तो वह कभी दोबारा बल्ला नहीं थाम पाते और न ही एक सामान्य जिंदगी जी पाते. अब अपनी ऑटोबायोग्राफी 'सब्र' के जरिए इस बीमारी का खुलासा करते हुए ख्वाजा ने कहा कि वह दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर इस खतरनाक बीमारी से लड़कर कोई टॉप-लेवल क्रिकेट खेल सकता है तो जिंदगी में कोई भी इंसान किसी भी बीमारी से हार नहीं मान सकता.
 

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