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'यह मेरी खुद से लड़ाई है...', टीम इंडिया में वापसी के लिए पृथ्वी शॉ ने बदली जिंदगी, अब सिर्फ क्रिकेट पर फोकस

पृथ्वी शॉ अपनी पिछली नाकामियों को पीछे छोड़कर प्रदर्शन के दम पर दोबारा पहचान हासिल करना चाहते हैं. पृथ्वी शॉ के लिए असली चुनौती सिर्फ भारतीय टीम में लौटना नहीं, बल्कि वहां अपनी जगह लंबे समय तक बनाए रखना भी होगी.

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पृथ्वी शॉ की निगाहें टीम इंडिया में वापसी पर, फिलहाल रणजी ट्रॉफी में धमाल मचा रहे. (Photo: X/@DelhiCapitals)
पृथ्वी शॉ की निगाहें टीम इंडिया में वापसी पर, फिलहाल रणजी ट्रॉफी में धमाल मचा रहे. (Photo: X/@DelhiCapitals)

कभी भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माने जाने वाले पृथ्वी शॉ अब अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने में जुटे हैं. 26 साल की उम्र में पृथ्वी एक नई शुरुआत करना चाहते हैं. बीते कुछ वर्षों में खराब फॉर्म, चोटों और टीम से बाहर होने जैसी चुनौतियों का सामना करने वाले शॉ ने अब अपना पूरा ध्यान क्रिकेट, परिवार और मेहनत पर लगा दिया है. उनका लक्ष्य साफ है- भारतीय टीम में वापसी करना.

पृथ्वी शॉ ने इंडिया टुडे से बातचीत में बताया कि वह पहले से ज्यादा मेहनत कर रहे हैं और फिलहाल सोशल मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं. वह बाहरी चर्चाओं में उलझने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहते हैं. पृथ्वी ने कहा, 'मैं इस समय पहले से कहीं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं. मेरा ध्यान सिर्फ खुद पर, अपने क्रिकेट और परिवार पर है. फिलहाल मैं इन्हीं तीन चीजों पर ध्यान देना चाहता हूं. बाकी चीजों को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा हूं.'

पृथ्वी शॉ ने बताया कि उन्हें अपनी निजी जिंदगी में कैमरों और पपराजी की मौजूदगी पसंद नहीं है. यही वजह है कि अब वह बाहर जाने से भी बचते हैं और अपना खाली समय निजी तौर पर बिताना पसंद करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बाहरी आलोचना से परेशान होने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी निजी जिंदगी में व्यक्तिगत स्पेस बनाए रखने की जरूरत है. पृथ्वी के मुताबिक, हर किसी की पसंद अलग होती है और वह अपनी जिंदगी के निजी पलों में कैमरों से दूर रहना चाहते हैं.

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कम उम्र में चमके, फिर पटरी से उतरा करियर
पृथ्वी शॉ ने बहुत कम उम्र में ही अपनी बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींच लिया था. मुंबई के हैरिस शील्ड स्कूल टूर्नामेंट में 546 रनों की ऐतिहासिक पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया. साल 2018 में उनकी कप्तानी में भारत ने अंडर-19 विश्व कप जीता. उसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करते हुए उन्होंने शतक जड़ दिया.
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आक्रामक बल्लेबाजी और शानदार तकनीक के चलते पृथ्वी शॉ को भारतीय क्रिकेट का बड़ा भविष्य माना जाने लगा. लेकिन शुरुआती कामयाबी को वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सके. पृथ्वी ने भारत के लिए पांच टेस्ट, छह वनडे और एक टी20 इंटरनेशनल मैच खेला है. जुलाई 2021 में श्रीलंका के खिलाफ खेलने के बाद से वह भारतीय टीम में वापसी नहीं कर पाए हैं. चोटों के साथ फिटनेस, अनुशासन और प्रदर्शन में निरंतरता को लेकर उठे सवालों ने भी उनके करियर को प्रभावित किया.
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साल 2024 में मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम से बाहर होने के बाद पृथ्वी शॉ के करियर की चुनौतियां और बढ़ गईं. दिल्ली कैपिटल्स (DC) ने भी उन्हें रिलीज कर दिया और वह आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) 2025 की मेगा नीलामी में किसी टीम को आकर्षित नहीं कर सके. इस कठिन दौर में भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने उन्हें पत्र लिखकर हौसला दिया. उन्होंने शॉ को याद दिलाया कि पिछली निराशाओं को भविष्य तय नहीं करने देना चाहिए.

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अब पृथ्वी शॉ का कहना है कि उन्हें बाहरी लोगों की राय से ज्यादा अपने परिवार की सोच और अपने व्यवहार की चिंता है. उन्होंने कहा, 'बाहर के लोगों की टिप्पणियां मेरे लिए ज्यादा मायने नहीं रखतीं. मेरे लिए यह अहम है कि मेरा परिवार मेरे बारे में क्या सोचता है और मैं एक इंसान के तौर पर कैसा हूं. मैं खुद को जानता हूं और मुझे पता है कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए क्या करना है.' उन्होंने यह भी माना कि हर व्यक्ति से गलतियां होती हैं. अब वह अतीत पर पछताने के बजाय आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं.

टीम इंडिया में कर पाएंगे वापसी?
पृथ्वी शॉ ने 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीजन में अपने बल्ले से उम्मीद जगाई. उन्होंने सात मैचों में 537 रन बनाए, जिसमें चंडीगढ़ के खिलाफ 156 गेंदों पर खेली गई 222 रनों की विस्फोटक पारी भी शामिल रही. दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें आईपीएल 2026 के लिए फिर से टीम में शामिल किया, हालांकि उन्हें इस सीजन में खेलने का अवसर नहीं मिला. घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बताता है कि वह अभी भी अपनी बल्लेबाजी के दम पर मजबूत वापसी की कोशिश कर रहे हैं.

पृथ्वी शॉ को पता है कि भारतीय टीम में सलामी बल्लेबाजों के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी है. ऐसे में सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करना भी जरूरी है. उनका कहना है कि वह टीम की जरूरतों को हमेशा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर रखने की कोशिश करते हैं. भारतीय टीम में वापसी के लक्ष्य पर पृथ्व ने कहा, 'अगर यह लक्ष्य नहीं होता, तो मैं आज क्रिकेट भी नहीं खेल रहा होता. मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य भारतीय टीम में लौटना है. यह किसी को कुछ साबित करने की बात नहीं है. यह मेरी खुद से लड़ाई है.'

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फिलहाल पृथ्वी शॉ का फॉर्मूला सीधा है- ज्यादा मेहनत, क्रिकेट को अधिक समय और परिवार के साथ सुकून. वह होटल के कमरे में नेटफ्लिक्स देखकर या वीडियो गेम खेलकर समय बिताना पसंद करते हैं.

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