टी20 क्रिकेट में इन दिनों एक अजीब दौड़ चल रही है. बल्लेबाज जितने ज्यादा शॉट्स दिखा सके, उतना आधुनिक. रिवर्स स्वीप, स्विच हिट, स्कूप, स्लॉग... गेंद को मैदान के हर कोने में पहुंचाने के लिए शॉट्स की पूरी दुकान खुली रहती है. लेकिन इसी दौर में एक बल्लेबाज उलटी दिशा में दौड़ रहा है.
... उसके पास शॉट्स कम हैं. विकल्प कम हैं. लेकिन तबाही सबसे ज्यादा है. नाम है- अभिषेक शर्मा.
उन्हें खेलते देखिए तो पहली नजर में लगता है कि यह बल्लेबाजी पूरी तरह इंस्टिंक्ट पर चल रही है. गेंद आई और बल्ला चल गया. लेकिन थोड़ा गौर करने पर कहानी बदल जाती है. अभिषेक के खेल में एक गजब का अनुशासन छिपा है. वह हर गेंद पर नया शॉट खोजने की बजाय अपने चंद पसंदीदा हथियारों को बार-बार इस्तेमाल करते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि उन्हें कब निकालना है, इसका हिसाब बेहद सटीक है.
अभिषेक की बल्लेबाजी का राज शायद ज्यादा शॉट्स में नहीं, शॉट्स की कमी में है.
अफगानिस्तान के खिलाफ आखिरी टी20 में 30 गेंदों पर शतक इसका सबसे ताजा सबूत है. यह फुल मेंबर टीम के किसी बल्लेबाज का सबसे तेज टी20 इंटरनेशनल शतक बना. लेकिन मजेदार बात यह है कि अभिषेक इससे भी तेज कर चुके हैं. 2024 में पंजाब के लिए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने सिर्फ 28 गेंदों में सेंचुरी ठोक दी थी.
यानी 30 गेंदों का शतक भी उनके करियर का सबसे तेज विस्फोट नहीं है. लेकिन अभिषेक की असली कहानी शतकों से कहीं बड़ी है.
पावरप्ले उनके लिए शुरुआत नहीं, हमला है
पिछले दो साल में अभिषेक ने टी20 पावरप्ले को अपने हिसाब से पढ़ा है. भारत के लिए संजू सैमसन और आईपीएल में ट्रेविस हेड के साथ ओपनिंग करते हुए उन्होंने शुरुआती छह ओवरों को मैच की भूमिका लिखने का समय नहीं, मैच की पटकथा बदलने का वक्त बना दिया है.
उनका नजरिया सीधा है- पहले छह ओवरों में जितना हासिल किया जा सकता है, कर लो. अफगानिस्तान के खिलाफ तो उन्होंने पावरप्ले में ही 22 गेंदों पर 76 रन लूट लिए.
मैच के बाद जब उनकी प्रक्रिया पूछी गई तो जवाब भी किसी भारी-भरकम क्रिकेट दर्शन जैसा नहीं था. कौन गेंदबाज है, पावरप्ले में किसे कैसे खेलना है और सातवें-आठवें ओवर में क्या करना है- बस इतना.
यही अभिषेक का कमाल है
वह बल्लेबाजी को मुश्किल बनाने की कोशिश नहीं करते. वह गेंदबाज की मुश्किल बढ़ा देते हैं. दिखते तूफानी हैं, खेलते कैलकुलेटर से हैं. उनकी बल्लेबाजी का सबसे दिलचस्प विरोधाभास यही है.
बाहर से देखिए तो पूरा मामला ताकत और सहजता का लगता है. लेकिन अंदर से यह गेंद, लेंथ और मूवमेंट का हिसाब है.
अभिषेक खुद कह चुके हैं कि उनके पास बहुत ज्यादा शॉट्स नहीं हैं. इसलिए उनका भरोसा उन्हीं शॉट्स पर है जो उनके खेल की पहचान बन चुके हैं. पुल उनमें से एक है.
गेंद थोड़ी-सी उनकी पसंदीदा ऊंचाई पर आई और बल्ला घूम गया. लॉन्ग-ऑन या डीप मिडविकेट के ऊपर से गेंद निकल गई. कोई अतिरिक्त कलाबाजी नहीं. कोई अनावश्यक प्रयोग नहीं.
फिर आता है उनका दूसरा बड़ा हथियार- क्रीज से बाहर निकलना. स्पिनर ने गेंद छोड़ी नहीं कि अभिषेक आगे बढ़े. गेंद की लेंथ बिगाड़ी और अपना शॉट खेलने की जगह खुद बनाई. राशिद खान के खिलाफ पावरप्ले में लगातार 4, 4, 6 इसका उदाहरण है.
और यह सिर्फ मौके पर निकला हमला नहीं था. राशिद, मोहम्मद नबी और मुजीब उर रहमान के खिलाफ अभिषेक के पास बाकायदा प्लान था. तीनों के खिलाफ 15 गेंदों में 54 रन. खास बात यह कि उन्होंने लगातार फ्रंट फुट पर हमला किया और बैक फुट पर जाने से बचते रहे.
अब पहले दो टी20 मुकाबलों से इसे जोड़िए. स्पिनरों के खिलाफ 17 गेंदों में 29 रन, जब अभिषेक बैक फुट पर गए. एक छोटा-सा तकनीकी बदलाव और वही बल्लेबाज पूरी तरह अलग नजर आया.
यही उनका गणित है... छक्के दिखाई देते हैं, गणित नहीं
अभिषेक को देखकर किसी भी क्रिकेट प्रेमी को लग सकता है कि छह मारना बेहद आसान है. लेकिन असल में यही उनकी बल्लेबाजी का भ्रम है. उनका खेल जितना आसान दिखाई देता है, उसके पीछे उतना ही स्पष्ट चुनाव है.
कौन गेंदबाज? कौन-सी लेंथ? कहां जाना है? कब आगे निकलना है? और किस गेंद को बिल्कुल नहीं छेड़ना है?
यह सब तय करने के बाद अभिषेक के पास बहुत सारे विकल्प नहीं बचते. वह विकल्पों की भीड़ में नहीं फंसते. उनका खेल ‘क्या-क्या कर सकता हूं’ पर नहीं, ‘क्या करना है’ पर टिका है. टी20 में शायद यही ज्यादा खतरनाक तरीका है.
तीन डक से 108 तक का सफर
और फिर इस कहानी में एक जरूरी मोड़ आता है. इसी साल टी20 वर्ल्ड कप में अभिषेक ने शुरुआत तीन लगातार डक से की थी. बाकी पारियों में भी 15, 10 और 9 जैसे स्कोर आए. यानी जिस बल्लेबाज को आज टी20 का विस्फोटक चेहरा माना जा रहा है, वही कुछ महीने पहले लगातार सवालों के बीच था.
लेकिन उसी टूर्नामेंट में जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर-8 में मैच जिताऊ फिफ्टी आई. फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में भी अर्धशतक. और अब अफगानिस्तान के खिलाफ 30 गेंदों का शतक.
यानी अभिषेक का खेल यह गारंटी नहीं देता कि हर मैच में रन आएंगे. वह इससे ज्यादा खतरनाक चीज देता है—यह संभावना कि जिस दिन सब कुछ क्लिक किया, उस दिन मैच आपके हाथ से निकल जाएगा.
अभिषेक का ध्यान मुद्रा में बैठना
108 रनों की उस पारी के बाद अभिषेक का ध्यान मुद्रा में बैठना शायद उनकी बल्लेबाजी का सबसे सही दृश्य था.आंखें बंद.चेहरा शांत... और कुछ मिनट पहले ही 34 गेंदों पर 108 रन.
मैदान पर तबाही मचाने वाला बल्लेबाज अचानक ध्यान में बैठा था. यह सिर्फ एक वायरल सेलिब्रेशन नहीं था. यह अभिषेक के पूरे क्रिकेट का रूपक बन गया.
बल्ला- तूफान. दिमाग- कैलकुलेटर. शॉट्स- गिने-चुने. नतीजा- अधिकतम.
टी20 क्रिकेट जितना अधिकतम का खेल बनता जा रहा है, अभिषेक उतना ही अपनी बल्लेबाजी को न्यूनतम कर रहे हैं. और शायद यही उनका सबसे बड़ा हथियार है.
हर गेंद पर कुछ नया करने की जरूरत नहीं. अपने खेल को पहचानिए. अपने मजबूत शॉट्स पहचानिए. गेंदबाज की कमजोर जगह पहचानिए. और फिर बिना हिचकिचाहट हमला कीजिए.
अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी का दर्शन इतना ही है- कम सोचो, कम विकल्प रखो और सही गेंद पर पूरा जोर लगा दो. यही वजह है कि उनके तीन डक अब पुरानी कहानी लगते हैं. अभिषेक ने सिर्फ फॉर्म वापस नहीं पाई है. उन्होंने टी20 बल्लेबाजी का अपना गणित खोज लिया है.
... और इस गणित में जोड़ बहुत कम है- लेकिन नतीजा हमेशा बड़ा हो सकता है. शॉट्स कम हैं. तबाही ज्यादा. यही है अभिषेक शर्मा का नया-जनरेशन टी20 क्रिकेट.