एशियन गेम्स में भारत ने सेमीफाइनल का टिकट कटाया, लेकिन इस जीत की असली कहानी स्कोरबोर्ड से कहीं ज्यादा दिलचस्प है. निस्शिन (Korogi Sports Park, Nisshin) में शुक्रवार को भारतीय स्पिनरों ने ऐसा जाल बुना कि मेजबान जापान की बल्लेबाजों को रन बनाने का रास्ता ही नहीं मिला. नतीजा- पूरी टीम सिर्फ 57 रनों पर ढेर और भारत ने महज 5 ओवरों में 59 रन बनाकर 8 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया. अब सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला बांग्लादेश से 20 सितंबर को होगा.
भारत ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी और शुरुआत से ही जापान पर शिकंजा कस दिया. जापानी बल्लेबाजों के पास भारतीय गेंदबाजी का जवाब नहीं था. पावरप्ले के छह ओवर में ही तस्वीर साफ हो गई थी. जापान के खाते में सिर्फ 24 रन आए और इस दौरान सिर्फ दो चौके लगे. इनमें भी एक चौका बल्ले के बीच से नहीं, बल्कि स्लिप के पास से निकले किनारे की वजह से आया.
𝐈𝐍𝐓𝐎 𝐓𝐇𝐄 𝐒𝐄𝐌𝐈-𝐅𝐈𝐍𝐀𝐋 👏👏
— BCCI Women (@BCCIWomen) September 18, 2026
A convincing 8️⃣-wicket win for #TeamIndia in the quarter-final to seal a spot in the final four 🇮🇳
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एक के बाद एक विकेट, स्पिन का पूरा शिकंजा
भारत की अनुभवी स्पिन गेंदबाजी के सामने जापान की बल्लेबाजी पूरी तरह जकड़ी नजर आई. सबसे बड़ा वार किया बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने. उन्होंने सातवें ओवर में लगातार दो गेंदों पर ओपनर हारुना इवासाकी और कप्तान माई यानागिदा को पवेलियन भेजकर जापान की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया.
चरणी ने इसके बाद भी जापानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने नहीं दिया और सिर्फ 10 रन देकर 4 विकेट झटक लिए. टी20 क्रिकेट में यह उनका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा.
पिच से मिल रहे टर्न और उछाल ने भी जापानी बल्लेबाजों की परेशानी बढ़ा दी. गेंद कभी बल्ले को छकाती तो कभी अचानक उछलकर बल्लेबाजों को चौंकाती. ऐसे में बड़े शॉट खेलने की कोशिश कई बार कैच में बदल गई.
शेफाली भी बनीं स्पिन की मास्टर
इस मैच में बल्लेबाजी की स्टार तो बाद में दिखीं, लेकिन गेंद से शेफाली वर्मा ने भी अपना जलवा दिखाया. ऑफ स्पिन करते हुए उन्होंने 13 रन देकर दो विकेट निकाले. आयाका काटो-स्टैफर्ड और शिमाको काटो को उन्होंने बड़े शॉट के लिए मजबूर किया और दोनों भारतीय फील्डरों के हाथों में गेंद मार बैठीं.
जापान की पारी में सिर्फ तीन चौके आए. छक्के का तो खाता ही नहीं खुला. यानी भारतीय गेंदबाजों ने 20 ओवर की पारी में चौकों-छक्कों के जरिए मिलने वाले आसान रन लगभग पूरी तरह बंद कर दिए.
रनिंग के बीच भी जापान ने गंवाए मौके
परेशानी सिर्फ गेंदबाजों से नहीं थी. विकेटों के बीच दौड़ते समय भी जापानी बल्लेबाजों के बीच तालमेल की कमी दिखाई दी और भारत को कुछ रन आउट भी मिले. एक ऐसी टीम के खिलाफ, जिसे शीर्ष स्तर की टीमों के खिलाफ खेलने और नियमित ट्रेनिंग का अनुभव बहुत कम मिलता है, भारत की फील्डिंग और गेंदबाजी का दबाव लगातार बढ़ता गया.
57 रनों का लक्ष्य भारत के लिए औपचारिकता भर रह गया.
हालांकि भारतीय पारी की शुरुआत भी झटके के साथ हुई. गुनालन कमलिनी खाता खोले बिना आउट हो गईं. इसके बाद भारती फुलमाली भी 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं. लेकिन लक्ष्य इतना छोटा था कि भारत पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा.
फिर आई शेफाली की तूफानी पारी
इसके बाद शेफाली वर्मा ने मैच को पांच ओवर के भीतर ही खत्म कर दिया. उन्होंने सिर्फ 15 गेंदों में नाबाद 40 रन ठोक दिए. उनकी पारी में 6 चौके और 2 छक्के शामिल रहे. यानी अकेली शेफाली ने ही जापान के पूरे स्कोर के करीब पहुंचने की रफ्तार पकड़ ली.
ऋचा घोष ने भी सिर्फ 6 गेंदों में नाबाद 12 रन बनाकर भारत को पांच ओवरों में ही मंजिल तक पहुंचा दिया.
एक तरफ जापान की बल्लेबाजें 20 ओवर में सिर्फ 57 रन बना सकीं, दूसरी तरफ भारत ने उसी स्कोर को सिर्फ 30 गेंदों में पार कर लिया. यही इस क्वार्टर फाइनल की पूरी कहानी है- जापान की अनुभवहीन बल्लेबाजी और भारत की अनुभवी स्पिन के बीच मुकाबला एकतरफा रहा. भारत अब एशियन गेम्स महिला क्रिकेट प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंच चुका है.