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एश‍ियन गेम्स 2026 के लिए ₹700 करोड़ से ज्यादा खर्च, 310 डेब्यूटेंट... भारत की नजर 106 मेडल के रिकॉर्ड पर

एशियन गेम्स 2026 की तैयारी पर भारत सरकार ने पिछले तीन साल में ₹702.86 करोड़ खर्च किए हैं. इसके अलावा TOPS फंड से ₹97.84 करोड़ दिए गए. भारत 36 खेलों में 501 खिलाड़ियों के साथ उतरेगा, जिसमें 310 डेब्यूटेंट हैं. पिछली बार 106 मेडल जीतने वाला भारत इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराने या उससे आगे निकलने की उम्मीद कर रहा है.

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एश‍ियन गेम्स की आध‍िकार‍िक शुरुआत 19 स‍ितंबर से हो रही है (Photo: PTI)
एश‍ियन गेम्स की आध‍िकार‍िक शुरुआत 19 स‍ितंबर से हो रही है (Photo: PTI)

Asian Games India spending Money: एशियन गेम्स शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और भारत ने इस बार अपने खिलाड़ियों की तैयारी पर जमकर पैसा खर्च किया है. खेल मंत्रालय के मुताबिक पिछले तीन साल में ट्रेनिंग, उपकरण, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और कोच-एक्सपर्ट की सेवाओं पर ₹702.86 करोड़ खर्च किए गए हैं.

इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के फंड से एशियन गेम्स की तैयारियों के लिए ₹97.84 करोड़ अतिरिक्त लगाए गए हैं. भारत की कोशिश अब एशियन गेम्स के पिछले संस्करण में जीते गए 106 मेडल के रिकॉर्ड को दोहराने या उससे आगे निकलने की है.

TOPS के CEO एनएस जौहल ने मंगलवार को कहा कि भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन में अच्छा मोमेंटम दिखाई दे रहा है और युवा खिलाड़ियों की बड़ी संख्या भविष्य के लिए भी अच्छा संकेत है.

आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारत के दल की एक खास बात बड़ी संख्या में डेब्यूटेंट खिलाड़ियों का होना है. कुल 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे. इनमें 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी, टेबल टेनिस खिलाड़ी सिंड्रेला दास, बैडमिंटन खिलाड़ी आयुष शेट्टी, 18 साल की स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह और जुडोका अस्मिता डे जैसे युवा नाम शामिल हैं. अनाहत हाल ही में जूनियर वर्ल्ड टाइटल जीत चुकी हैं, जबकि अस्मिता डे जुडो में कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनी थीं.

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हालांकि वैभव सूर्यवंशी को खेल मंत्रालय से फंडिंग नहीं मिलती है. इसके बावजूद वह एशियन गेम्स में भारतीय दल के सबसे ज्यादा चर्चा वाले युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं.

3 साल में कहां-कहां खर्च हुए ₹702 करोड़?
खेल मंत्रालय के मुताबिक एथलीटों की तैयारी के लिए वार्षिक प्रतियोगिता और प्रशिक्षण कैलेंडर (Annual Competition and Training Calendar) के तहत कुल ₹702.86 करोड़ खर्च किए गए. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल इवेंट्स में खिलाड़ियों को एक्सपोजर दिलाने पर खर्च हुआ.

9 मीटिंग में बना पूरा प्लान
जौहल ने बताया कि इस साल जनवरी से अब तक टारगेट एश‍ियन गेम्स की 9 कोऑर्डिनेशन मीटिंग हो चुकी हैं. उनके मुताबिक इन बैठकों का मकसद खिलाड़ियों को हर संभव बेहतर माहौल देना था, खासकर ऐसे समय में जब कई राष्ट्रीय खेल महासंघों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दे भी सामने आते रहे.

उन्होंने महासंघों से जुड़े विवादों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद खिलाड़ियों पर फोकस कम नहीं हुआ.

खेलो इंड‍िया से निकले 65 खिलाड़ी
इस बार भारतीय दल में 65 ऐसे खिलाड़ी हैं जो खेलो इंड‍िया सिस्टम से आगे बढ़े हैं. जौहल ने इसे देश के बेसलाइन स्पोर्ट्स सिस्टम की सफलता से जोड़ते हुए कहा कि खेलो इंड‍िया से निकलकर खिलाड़ियों का एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच तक पहुंचना एक सकारात्मक संकेत है.

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501 खिलाड़ी, 265 सपोर्ट स्टाफ
भारत एशियन गेम्स में 36 खेलों में हिस्सा लेगा. दल में कुल 501 खिलाड़ी हैं, इनमें 267 पुरुष खिलाड़ी और 234 महिला खिलाड़ी इनके साथ 265 सपोर्ट स्टाफ भी जापान जाएगा. मूल रूप से 503 खिलाड़ियों को मंजूरी मिली थी, लेकिन डोपिंग उल्लंघन के कारण दो खिलाड़ियों के नाम हटाने पड़े. इसके बाद अंतिम दल की संख्या 501 रह गई.

पिछली बार भारत ने जीते थे 106 मेडल
भारत ने पिछली बार हांगझोउ एशियन गेम्स में अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया था. भारतीय दल ने कुल 106 मेडल जीते थे, इनमें  28 गोल्ड, 38 सिल्वर, 40 ब्रॉन्ज जीते हैं. अब आइची-नागोया में इसी प्रदर्शन को दोहराना या उससे बेहतर करना भारत का लक्ष्य है. जौहल ने कहा कि आखिर में प्रदर्शन खिलाड़ियों को ही करना है और मंत्रालय ने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ तैयारी सुनिश्चित करने की कोशिश की है.


 

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