चांद पर इंसानों के रहने के लिए वैज्ञानिक सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं. इसी बीच जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जैक्सा (JAXA) के वैज्ञानिकों को चांद के मारियस हिल्स इलाके में जमीन के नीचे करीब 50 किलोमीटर लंबी सुरंग होने के संकेत मिले हैं. यह जानकारी कागुया (Kaguya) ऑर्बिटर से मिले रडार के आंकड़ों की जांच के बाद सामने आई. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह सुरंग सही सलामत है, तो भविष्य में इसका इस्तेमाल चांद पर इंसानों के रहने के लिए किया जा सकता है.
चांद पर पृथ्वी की तरह हवा और मौसम से बचाव नहीं मिलता. वहां अंतरिक्ष से आने वाली हानिकारक किरणों, छोटे उल्कापिंडों और तापमान में बड़े बदलाव का खतरा रहता है. जमीन के नीचे बनी सुरंग इन खतरों से बचने में मदद कर सकती है. हालांकि, अभी इस सुरंग की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. यह भी पता लगाना बाकी है कि इसके अंदर इंसानों का रहना कितना सुरक्षित होगा.
चांद पर कैसे मिला सुरंग का रास्ता?
साल 2009 में जापान के कागुया ऑर्बिटर ने चांद की तस्वीरें ली थीं. इन तस्वीरों में मारियस हिल्स इलाके में एक बड़ा गड्ढा दिखाई दिया. इसे मारियस हिल्स होल नाम दिया गया. यह गड्ढा करीब 50 मीटर चौड़ा और 50 मीटर गहरा बताया गया था. चांद का यह इलाका पृथ्वी से दिखाई देने वाले हिस्से में है.
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वैज्ञानिकों को शक था कि यह गड्ढा जमीन के नीचे बनी किसी बड़ी सुरंग का खुला हिस्सा हो सकता है. इसलिए उन्होंने रडार से मिले आंकड़ों की जांच की, ताकि पता चल सके कि चांद की सतह के नीचे कोई बड़ी खाली जगह है या नहीं.
रडार से कैसे मिला सुरंग का संकेत?
कागुया ऑर्बिटर में लूनर रडार साउंडर (LRS) नाम का उपकरण लगा था. यह चांद की सतह की तरफ रडार सिग्नल भेजता था. ये सिग्नल वापस लौटते थे, जिनसे वैज्ञानिकों को जमीन के नीचे की बनावट समझने में मदद मिलती थी. साल 2017 में जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नाम की साइंस जर्नल में एक रिसर्च प्रकाशित हुई थी.
इसमें वैज्ञानिकों ने ऐसे संकेतों के बारे में बताया, जो जमीन के नीचे बड़ी खाली जगह होने की संभावना दिखाते हैं. इन आंकड़ों के आधार पर करीब 50 किलोमीटर लंबी लावा ट्यूब होने की संभावना जताई गई. हालांकि, रडार से मिली जानकारी के आधार पर सुरंग के हर हिस्से को देखना संभव नहीं था. इसलिए इसकी पूरी लंबाई और बनावट की पुष्टि के लिए और जांच की जरूरत है.
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अरबों साल पहले कैसे बनी होगी सुरंग?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद पर बहुत पहले ज्वालामुखी फटते थे और उनसे गर्म लावा निकलता था. जब लावा बहना बंद हुआ, तो उसका बाहरी हिस्सा ठंडा होकर जम गया. अंदर का गर्म लावा आगे बह गया होगा. इससे जमीन के नीचे लंबी सुरंग जैसी जगह बन गई होगी. ऐसी सुरंग को लावा ट्यूब कहते हैं.
मारियस हिल्स इलाके में ज्वालामुखी गतिविधियों से बनी कई संरचनाएं मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुरंग करीब 3.5 अरब साल पुरानी हो सकती है. इसकी जांच से चांद के पुराने इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है.
चांद पर इंसानों के रहने में कैसे मिलेगी मदद?
चांद पर इंसानों को लंबे समय तक रखने के लिए सुरक्षित जगह जरूरी है. वहां अंतरिक्ष से आने वाली हानिकारक किरणों और छोटे उल्कापिंडों से बचना मुश्किल है. जमीन के नीचे बनी सुरंग इनसे बचाव कर सकती है. इसके अंदर तापमान में होने वाले बड़े बदलाव का असर भी कम हो सकता है.
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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ऐसी जगहों पर पानी या बर्फ से जुड़े संकेत भी मिल सकते हैं. लेकिन इस सुरंग के अंदर पानी या बर्फ मौजूद होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है. वैज्ञानिकों को अब यह पता लगाना होगा कि सुरंग कितनी बड़ी है और इसकी छत व दीवारें कितनी मजबूत हैं. इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि यहां इंसानों के रहने के लिए जगह बनाई जा सकती है या नहीं.
अगर आगे की जांच में ये संभावनाएं सही साबित होती हैं, तो यह सुरंग भविष्य में चांद पर इंसानों के लिए ठिकाना बनाने में मदद कर सकती है. फिलहाल, यह खोज चांद की जमीन के नीचे मौजूद जगहों को समझने की दिशा में एक अहम कदम है.