इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप के वेस्ट मंगगराई इलाके में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया. इसके बाद सानो न्गोआंग झील में काले रंग का पदार्थ दिखाई देने की खबर सामने आई. स्थानीय लोग इस घटना को ताई सानो कहते हैं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि झील में दिखा यह काला पदार्थ भूकंप की वजह से ही आया है या इसके पीछे कोई और कारण है. इसकी सही वजह पता लगाने के लिए झील के पानी और काले पदार्थ की जांच करनी होगी.
भूकंप के बाद झील में बदलाव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या भूकंप के तेज झटकों से झील की तलहटी में जमा मिट्टी या दूसरे पदार्थ ऊपर आ गए. यह संभावना इसलिए भी देखी जा रही है क्योंकि सानो न्गोआंग एक सामान्य झील नहीं है. यह पुराने ज्वालामुखीय इलाके में बनी झील है. यहां जमीन के नीचे से गर्म पानी और गैस निकलने जैसी गतिविधियां भी होती हैं.
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7.7 तीव्रता का था भूकंप
फ्लोरेस इलाके में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद झील में काला पदार्थ दिखाई देने की खबर आई. लेकिन दोनों घटनाएं एक के बाद एक हुईं, इसका मतलब यह नहीं है कि काला पदार्थ भूकंप की वजह से ही आया.
तेज भूकंप से जमीन के साथ-साथ पानी के नीचे की मिट्टी भी हिल सकती है. इससे झील की तलहटी में जमा मिट्टी और छोटे कण पानी में मिल सकते हैं. इससे पानी का रंग गहरा या मटमैला दिख सकता है. लेकिन सानो न्गोआंग में ऐसा ही हुआ है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है.
ज्वालामुखीय इलाके में बनी है झील
सानो न्गोआंग झील एक पुराने ज्वालामुखीय गड्ढे में बनी है. स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के ग्लोबल वॉल्केनिज्म प्रोग्राम के मुताबिक, यहां करीब 2.5×3.5 किलोमीटर का ज्वालामुखीय गड्ढा है. झील के पास गर्म गैस निकलने वाली जगहें भी दर्ज की गई हैं.
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एक साइंटिफिर स्टडी के मुताबिक, झील का आकार करीब 3.3×2.2 किलोमीटर है. इसकी गहराई करीब 500 मीटर तक बताई गई है. झील का पानी काफी अम्लीय है और इसका pH करीब 3.17 दर्ज किया गया था.
पानी में सल्फर जैसे पदार्थ
इस झील के पानी में सल्फेट और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसे रसायन पाए गए हैं. झील के आसपास सल्फर जैसी गंध भी महसूस की गई है. ये चीजें बताती हैं कि झील के नीचे और आसपास जमीन के अंदर गतिविधियां होती रहती हैं. इसी वजह से काले पदार्थ को लेकर अभी कोई पक्का दावा करना जल्दबाजी होगी.

यह झील की तलहटी से ऊपर आई मिट्टी हो सकती है. इसमें कोई खनिज या ज्वालामुखीय पदार्थ भी हो सकता है. हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी.
जांच से पता चलेगी असली वजह
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि भूकंप और झील में दिखे काले पदार्थ के बीच सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है. वैज्ञानिक अगर काले पदार्थ और झील के पानी के सैम्पल जांच करते हैं, तो पता चल सकता है कि इसमें कौन-कौन से पदार्थ मौजूद हैं.
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि 7.7 तीव्रता के भूकंप की वजह से ही झील में ताई सानो दिखाई दिया. जांच के बाद ही साफ होगा कि भूकंप ने झील के अंदर कोई बदलाव किया था या यह किसी दूसरी प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है.