scorecardresearch
 

क्या ‘गॉडजिला’ आने वाला है! लद्दाख में सर्दी की मौत के बाद चर्चा तेज... वैज्ञानिक परेशान

इस बार लद्दाख में 2025-26 की सर्दी सबसे गर्म रही. लेह में तापमान 2 डिग्री और कारगिल में 3.5 डिग्री ऊपर रहा. बर्फबारी असमान रही – लेह में 72% कम, कारगिल में 248% ज्यादा. खेती प्रभावित हुई. फसलें ऊंचाई पर शिफ्ट हो रही हैं. कीड़े बढ़ रहे हैं. पानी की कमी हो गई है. वैज्ञानिक 2026 के ‘गॉडजिला अल नीनो’ की चेतावनी दे रहे हैं जो बड़े जलवायु खतरे ला सकता है.

Advertisement
X
इस बार लद्दाख में सर्दी का मौसम हद से ज्यादा गर्म था. अब गॉडजिला मौसम आने की आशंका है. (Photo: Getty)
इस बार लद्दाख में सर्दी का मौसम हद से ज्यादा गर्म था. अब गॉडजिला मौसम आने की आशंका है. (Photo: Getty)

इस बार लद्दाख में सर्दी का मौसम इतना गर्म रहा कि लोग इसे 'सर्दी की मौत' कह रहे हैं. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में जहां पहले ठंड इतनी तेज होती थी कि पानी भी जम जाता था, वहां अब तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा. भारत मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, लेह और कारगिल में इस 2025-26 सर्दी का औसत तापमान पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा. 

लेह में पिछले 8 सालों की औसत सर्दी का तापमान -4.3 डिग्री सेल्सियस था, लेकिन इस बार यह बढ़कर -2.3 डिग्री हो गया, यानी करीब 2 डिग्री ज्यादा गर्म. कारगिल में तो और भी ज्यादा फर्क पड़ा – पिछले 14 सालों का औसत -4.9 डिग्री था, जो इस बार -1.4 डिग्री तक पहुंच गया. यानी 3.5 डिग्री ऊपर. ये बदलाव सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि पूरे इलाके की जिंदगी को नया रूप दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: महिला और पुरुष का मिलन कैसे हुआ... साइंटिस्ट ने खोजी लाखों साल पुरानी मिस्ट्री

असमान बर्फबारी और बदलते संकेत

सर्दी में बर्फबारी का पैटर्न भी बिल्कुल असमान रहा. लेह में पिछले 14 सालों में औसतन 15.3 सेंटीमीटर बर्फ गिरती थी, लेकिन इस बार सिर्फ 4.2 सेंटीमीटर ही पड़ी – यानी 72 प्रतिशत कम. जनवरी में 3.3 सेंटीमीटर और फरवरी में महज 0.9 सेंटीमीटर. वहीं कारगिल में उल्टा हुआ – औसतन 17 सेंटीमीटर की जगह 42.2 सेंटीमीटर बर्फ गिरी, जो सामान्य से 248 प्रतिशत ज्यादा थी. 

Advertisement

Godzilla El Nino Warmest Winter Ladakh

ज्यादातर बर्फ जनवरी में पड़ी, फरवरी में बहुत कम. लद्दाख ठंडा रेगिस्तान है और बर्फबारी ही यहां की सिंचाई, पीने का पानी, खेती और बागवानी का मुख्य आधार है. एक साल की कमी या ज्यादा को सिर्फ जलवायु परिवर्तन नहीं कहा जा सकता, लेकिन बार-बार ऐसा होना बड़े बदलाव का संकेत है.

खेती पर पड़ रहा दबाव और फसलों का शिफ्ट

लद्दाख की खेती अब लय खो रही है. पहले निचले इलाकों में खुबानी, सेब और चेरी उगाई जाती थी, लेकिन अब ये फल ऊंचे इलाकों में शिफ्ट हो रहे हैं. शेम बेल्ट में पहले अच्छी खुबानी होती थी, लेकिन अब कीड़ों का हमला बढ़ गया है. वहीं लेह शहर के आसपास शेय, थिक्से और फ्यांग में अब बेहतर खुबानी मिल रही है. वजह है गर्म सर्दी. 

यह भी पढ़ें: स्पेस में खो जाते हैं स्पर्म... कैसे बसेगी चांद या मंगल पर इंसानी कॉलोनी?

इन फलों को 0 से 7 डिग्री के बीच 500 से 1500 घंटे की ठंडक चाहिए होती है, जो अब कम हो रही है. नतीजा – फूल देर से खिलते हैं और अचानक ठंड की लहर से 50 प्रतिशत तक नुकसान हो जाता है. 

सब्जियों में भी बदलाव आया है – पहले ग्रीनहाउस में उगाई जाने वाली गर्मियों की सब्जियां अब खुले में भी लग रही हैं, लेकिन फूल झड़ने और फल गिरने की समस्या बढ़ गई है. किसान अब हाइब्रिड और जलवायु-रोधी बीजों पर निर्भर हो रहे हैं.

Advertisement

Godzilla El Nino Warmest Winter Ladakh

कीड़ों का बढ़ता प्रकोप और पुरानी फसल चक्र में बदलाव

गर्म सर्दी ने कीड़ों को भी नया मौका दे दिया. पहले लद्दाख की तेज ठंड कीड़ों को कंट्रोल में रखती थी, लेकिन अब सर्दी हल्की पड़ने से कीड़े जल्दी निकलते हैं. उनकी संख्या बढ़ जाती है. पहले सिर्फ एफिड्स और कैबेज बटरफ्लाई की शिकायत आती थी, लेकिन अब हर दूसरे दिन किसान नए कीड़ों की रिपोर्ट करते हैं. 2016 में लेह में खुबानी के पत्ते खाने वाले कीड़े का बड़ा हमला हुआ था. 

जंगली जीव और नाजुक इकोसिस्टम को खतरा

स्नो लेपर्ड कंजर्वेंसी के डायरेक्टर त्सेवांग नामगैल कहते हैं कि गर्म सर्दी से बर्फीले जानवर जैसे स्नो लेपर्ड और वाइल्ड याक पर असर पड़ रहा है. उनका शरीर तेज ठंड के लिए बना है, थोड़ी गर्मी भी तनाव देती है.  

ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियर झीलें बन रही हैं. बाद में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है. ये बाढ़ अल्पाइन मीडोज और घास को बहा ले जाती है, जो जंगली जानवरों का चारा है. पेड़ों की लाइन ऊपर जा रही है, बर्फ की लाइन पीछे हट रही है, जिससे स्नो लेपर्ड का घर छोटा हो रहा है. 

यह भी पढ़ें: ईरान के वो 5 हथियार, जिनसे 28 दिन बाद भी दे रहा अमेरिका-इजरायल को चुनौती

Advertisement

गॉडजिला अल नीनो क्यों हो रही चर्चा? 

इसी गर्म सर्दी को देखकर वैज्ञानिक अब गॉडजिला अल नीनो की चर्चा कर रहे हैं. 14 ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स की भविष्यवाणी है कि जून-जुलाई-अगस्त और सितंबर-अक्टूबर-नवंबर 2026 में एक बहुत बड़ा अल नीनो बनने वाला है. पूरा प्रशांत महासागर गर्म हो जाएगा, खासकर भूमध्य रेखा पर तापमान 1.5 डिग्री से ज्यादा बढ़ जाएगा. इसे गॉडजिला नाम इसलिए दिया गया क्योंकि ये बेहद बड़ा और खतरनाक होगा. 

Godzilla El Nino Warmest Winter Ladakh

इसकी वजह से गर्मी की लहरें तेज होंगी, बारिश अनियमित या बंद हो जाएगी, फसलें प्रभावित होंगी और पानी की कमी बहुत बढ़ जाएगी. लद्दाख जैसी जगहों में जहां पहले से गर्म सर्दी और बर्फ की कमी चल रही है, वहां यह और बुरा असर डालेगा. किसानों के लिए ये खाद्य सुरक्षा का खतरा है – कम फसल, महंगे दाम और सप्लाई में रुकावट.

वैज्ञानिक कहते हैं कि लद्दाख के मौजूदा बदलाव इसी बड़े पैटर्न का शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इसलिए गॉडजिला अल नीनो की चर्चा जोरों पर है – ये सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि आने वाले सालों की पूरी जिंदगी और खेती को बदलने वाला घटनाक्रम है.

यह भी पढ़ें: लद्दाख के ऊपर का लाल आसमान क्या चेतावनी दे रहा है जिसे भारत इग्नोर नहीं कर सकता?

Advertisement

ये सब बदलाव बताते हैं कि लद्दाख की सर्दी अब पहले जैसी नहीं रही. किसान हाइब्रिड बीज अपनाकर, समय पर बोआई करके और जलवायु के हिसाब से तैयार होकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन 2026 का गॉडजिला अल नीनो अगर आया तो ये चुनौतियां और बढ़ जाएंगी.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement