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ग्रहण से पहले सूरज में हुआ काला गड्ढा... 18 को आएगा भयानक सौर तूफान

सूर्य ग्रहण से पहले सूरज पर 8 लाख किलोमीटर से ज्यादा चौड़ा विशाल कोरोनल गड्ढा हो गया है. इसका मुंह पृथ्वी की ओर है. 16 फरवरी को इससे G2 भू-चुंबकीय तूफान आया. सूर्य से निकलने वाली हवा 700 किमी/सेकंड की रफ्तार से निकली. स्कॉटलैंड समेत कई जगहों पर रातों तक हरे-लाल ऑरोरा चमके. 18 फरवरी को फिर भयानक सौर तूफान आने की आशंका है.

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नासा के सोलर डायनेमिक ऑब्जरवेटरी ने ली इस काले गड्ढे की तस्वीर. (Photo: NASA)
नासा के सोलर डायनेमिक ऑब्जरवेटरी ने ली इस काले गड्ढे की तस्वीर. (Photo: NASA)

सूर्य ने एक बार फिर पृथ्वी की ओर अपना बड़ा दरवाजा खोल दिया है. 16 फरवरी 2026 को नासा के सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) ने सूर्य की सतह पर एक विशाल कोरोनल होल देखा, जो 8 लाख किलोमीटर से ज्यादा चौड़ा है. यह गड्ढा दक्षिण से उत्तर तक फैला हुआ है. पृथ्वी की ओर सीधा मुंह किए हुए है.

यह कोरोनल होल क्या है?

सूर्य का कोरोनल होल कोई आग का गोला या फ्लेयर नहीं है. यह सूर्य का एक ओपन मैग्नेटिक कॉरिडोर है. यहां से सूर्य की गर्म प्लाज्मा वाली हवा (सोलर विंड) बहुत तेजी से बाहर निकलती है. इस बार हवा की रफ्तार 700 किलोमीटर प्रति सेकंड से ज्यादा थी.

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 Surya Grahan Coronal Hole in Sun

G2 तूफान का क्या हुआ?

नोआ (NOAA) ने 16 फरवरी को देर शाम G2 स्तर का भू-चुंबकीय तूफान घोषित किया. L1 पॉइंट पर सोलर विंड की रफ्तार 650 किमी/सेकंड से ऊपर पहुंच गई. इसी जगह पर भारतीय सैटेलाइट आदित्य-L1 तैनात है. इस तूफान के कारण पिछले चार रातों से आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की खूबसूरत रोशनी दिख रही है. स्कॉटलैंड के फोटोग्राफर जॉन ओलूनी ने कहा कि यह मेरे लिए भी नॉर्मल नहीं है. इतनी खूबसूरत और तेज रोशनी मैंने यहां पहले कभी नहीं देखी.

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क्या खतरा है?  

बिजली ग्रिड और उपग्रहों पर हल्का असर हो सकता है. लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ. अधिकारियों ने कहा कि यह G2 तूफान मध्यम स्तर का है, इसलिए ज्यादा डरने की जरूरत नहीं.

 Surya Grahan Coronal Hole in Sun

आगे क्या?

सूर्य पर C1 फ्लेयर से एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भी आने वाला है. 18 फरवरी के आसपास फिर G1-G2 स्तर का तूफान आ सकता है. सूर्य हर 11 साल में ज्यादा सक्रिय होता है. अभी सूर्य का 25वां सोलर साइकल चल रहा है, जो 2025-26 में पीक पर है.

कोरोनल होल से तेज सोलर विंड पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है, जिससे ध्रुवों के पास सुंदर रोशनी बनती है. यह घटना वैज्ञानिकों के लिए रोमांचक है, लेकिन आम लोगों के लिए सिर्फ आसमान में रंग-बिरंगी लाइट शो का मजा है. 

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