scorecardresearch
 

42 लाख से ज्यादा नाम हटे, हिसाब दे चुनाव आयोग: MP कांग्रेस अध्यक्ष का बड़ा आरोप; 25 सितंबर को कलेक्ट्रेट और CEO दफ्तर का घेराव

MP Congress Protest On SIR Voter List: मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट से 34 लाख नाम कटने पर कांग्रेस का बड़ा हमला. जीतू पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, 25 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

Advertisement
X
मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया पर भड़की कांग्रेस.(Photo:Screengrab)
मध्य प्रदेश में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया पर भड़की कांग्रेस.(Photo:Screengrab)

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी. पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR में गड़बड़ियां हुई हैं. राज्य इकाई के प्रमुख जीतू पटवारी ने यह बात कही. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर का घेराव करेगी और कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन करेगी.

पटवारी ने जोर देकर कहा कि जब तक कुमार इस्तीफा नहीं देते और उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज नहीं होता, तब तक कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी, क्योंकि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि हर वोटर के अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा है.

जब उनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा SIR प्रक्रिया की तारीफ करने के बारे में पूछा गया, तो पटवारी ने पलटवार करते हुए कहा, "ट्रंप उन्हें (कुमार को) अमेरिका ले जा सकते हैं." उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ट्रंप के दबाव में फैसले ले रहे हैं.

नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म-6' में किए गए बदलावों पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि यह साफ किया जाना चाहिए कि इसे किस प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के तहत जोड़ा गया.

Advertisement

उन्होंने 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से जुड़े फैसलों - जैसे वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाना और चुनावी डेटा तक पहुंच पर आपत्ति जताई थी.

पटवारी ने SIR प्रक्रिया के दौरान मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, ''इस प्रक्रिया से पहले MP में 5,74,06,143 रजिस्टर्ड वोटर थे, जबकि 5,31,31,983 एन्यूमरेशन फॉर्म मिले और उन्हें डिजिटाइज किया गया. दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से कुल 42,74,160 नाम हटा दिए गए."

उन्होंने यह भी साफ किया कि यह नाम हटाने की अंतिम संख्या नहीं थी, क्योंकि बाद में दावों और आपत्तियों पर भी विचार किया गया था.

पटवारी के बताए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 5,39,81,065 वोटर थे और अंतिम प्रक्रिया में 34,25,078 नाम हटाए गए थे.

उन्होंने बताया कि दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान नाम शामिल करने के लिए लगभग 7.17 लाख आवेदन मिले, जबकि नाम हटाने के लिए लगभग 83 हजार आपत्तियां दर्ज की गईं.

पटवारी ने कहा, "ECI को फाइनल वोटर लिस्ट से हटाए गए 34.25 लाख नामों की जानकारी और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद वापस जोड़े गए नामों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए."

Advertisement

उन्होंने नाम वापस जोड़ने के आवेदनों को मंजूर या नामंजूर करने के कारणों का खुलासा करने और डिजिटल चुनावी सिस्टम में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और बूथ लेवल ऑफिसर की भूमिका दिखाने वाला ऑडिट ट्रेल भी मांगा.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए बदलावों के तहत चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय गृह मंत्री को शामिल किया गया.

कांग्रेस ने गुरुवार को अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे 25 सितंबर को अपने-अपने राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालें. वे ज्ञानेश कुमार की तुरंत गिरफ्तारी, उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए सभी फैसलों और वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रहे हैं.

SIR को पूरे देश में लागू करने का काम तीनों आयुक्तों की देखरेख में हो रहा है. लेकिन 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार (एक ही दिन में चार बार) उन फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement