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आर्मी के 'विवादित' ऑफिसर! बने हनुमान अंश के नीम करोली बाबा, पूजने लगे लोग, कौन हैं हनी बख्शी?

‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा बने कर्नल हनी बख्शी कौन हैं? जानिए रिटायर्ड मिलिट्री इंटेलिजेंस अफसर से एक्टर बनने और सीक्रेट यूनिट की कमान संभालने की पूरी कहानी.

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कौन हैं नीम करोली बाबा बने कर्नल हनी बख्शी? (Photo: Screengrabs)
कौन हैं नीम करोली बाबा बने कर्नल हनी बख्शी? (Photo: Screengrabs)

फिल्मी दुनिया में कब किसकी एंट्री किस अंदाज में हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. लेकिन ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले शख्स की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. स्क्रीन पर बाबा का किरदार निभाने वाले कर्नल हनी बख्शी असल जिंदगी में भारतीय सेना के रिटायर्ड मिलिट्री इंटेलिजेंस अफसर हैं. इतना ही नहीं, वो सेना की एक बेहद गोपनीय यूनिट की कमान भी संभाल चुके हैं.

विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी ‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. करीब 1.8 से 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा कमाल किया कि देखते ही देखते ये साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में शामिल हो गई. फिल्म ने सातवें हफ्ते में भी सिनेमाघरों में अपनी पकड़ बनाए रखी और सितंबर के आखिर तक दुनियाभर में 371 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली.

फिल्म में शोभिनव सत्य ने यंग नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है, जबकि कर्नल हनी बख्शी ने उम्रदराज महाराज जी की भूमिका निभाई है. उनका रोल छोटा जरूर है, लेकिन उनकी असली जिंदगी की कहानी जानने के बाद ये कैमियो और भी खास लगने लगता है.

सेना में कैसे पहुंचे कर्नल हनी बख्शी?

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मुनिश्वर नाथ बख्शी, जिन्हें सेना में हनी बख्शी के नाम से जाना जाता था, दिसंबर 1988 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून से इंटेलिजेंस कॉर्प्स में कमीशन हुए थे. अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट समेत कई संवेदनशील इलाकों में काम किया.

उन्होंने नागा सीजफायर से जुड़े काम और आईईडी नेटवर्क पर ऑपरेशंस का भी अनुभव लिया. हनी बख्शी के मुताबिक, वो अपनी सर्विस के दौरान तीन आईईडी हमलों में बाल-बाल बच चुके हैं. उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया.

साल 2007 से 2010 के बीच उन्होंने कोलकाता में एक मिलिट्री इंटेलिजेंस यूनिट की कमान संभाली. लेकिन उनके करियर का सबसे चर्चित दौर इसके बाद आया.

26/11 के बाद मिली थी बेहद सीक्रेट यूनिट की कमान

मुंबई में 26/11 आतंकी हमलों के बाद सेना में खुफिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक बेहद गोपनीय यूनिट बनाई गई थी, जिसे टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन यानी TSD के नाम से जाना गया.

2010 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने हनी बख्शी को इस यूनिट को खड़ा करने और इसकी कमान संभालने की जिम्मेदारी दी. दिल्ली कैंट से काम करने वाली इस यूनिट का फोकस टेक्निकल सर्विलांस, खुफिया नेटवर्क तैयार करने और ऐसे ऑपरेशंस पर था, जिनकी आधिकारिक जिम्मेदारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आती थी.

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TSD करीब दो साल बाद 2012 में बंद कर दी गई. इसके बाद बख्शी के करियर में जांच और विवादों का दौर भी आया. उन पर बिना अनुमति इंटरसेप्शन, गोपनीय दस्तावेजों को संभालने में गड़बड़ी और संवेदनशील गतिविधियों से जुड़े आरोप लगे.

कर्नल हनी बख्शी (YT Screengrab)

उनके खिलाफ जनरल कोर्ट मार्शल की कार्यवाही भी शुरू हुई, लेकिन मार्च 2018 में प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों और दस्तावेज उपलब्ध न कराए जाने जैसे आधारों पर कार्यवाही खत्म हो गई. इसके बाद हनी बख्शी ने 5 नवंबर 2019 को सेना से प्रीमैच्योर रिटायरमेंट ले लिया. उनकी पत्नी अपर्णा बख्शी ने भी इन जांचों के दौर को परिवार के लिए बेहद मुश्किल समय बताया था.

फिर सेना की सीक्रेट दुनिया से फिल्मों तक पहुंच गए

रिटायरमेंट के बाद हनी बख्शी देहरादून में रहने लगे. सेना की नौकरी खत्म होने के बाद उनका एक नया शौक सामने आया- स्क्रिप्ट लिखना. उन्होंने वेब सीरीज के लिए स्क्रिप्ट लिखनी शुरू की. इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात निर्देशक विशाल चतुर्वेदी से हुई. बख्शी अपनी एक स्क्रिप्ट लेकर उनके पास सलाह लेने पहुंचे थे.

विशाल चतुर्वेदी ने जब उन्हें देखा तो उन्हें हनी बख्शी में नीम करोली बाबा की झलक नजर आई. निर्देशक ने उन्हें अपनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ में उम्रदराज नीम करोली बाबा का रोल ऑफर कर दिया. बख्शी ने भी ये मौका स्वीकार कर लिया. हालांकि उन्होंने एक शर्त रखी. फिल्म रिलीज होने तक उन्होंने नॉन-वेज खाना और शराब से दूर रहने का फैसला किया.

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फिल्म में छोटा रोल, लेकिन कहानी में खास जगह

‘हनुमान अंश’ की शुरुआत ही महाराज जी और डॉक्टर राम नंदन भोसले की मुलाकात से होती है. डॉक्टर भोसले का किरदार चंदन आनंद ने निभाया है और उनका नाम जवाहरलाल नेहरू से जुड़े डॉक्टर के तौर पर कहानी में आता है. इसके बाद फिल्म फ्लैशबैक में चली जाती है और नीम करोली बाबा की जिंदगी की कहानी सामने आती है.

हनी बख्शी का स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं है, लेकिन उनका किरदार फिल्म के फ्रेम को जोड़ने का काम करता है. खास बात ये है कि जिस शख्स ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा खुफिया ऑपरेशंस और सैन्य जिम्मेदारियों में बिताया, वो कैमरे के सामने एक बेहद शांत और आध्यात्मिक संत के रूप में नजर आता है.

बख्शी ने संकेत दिया है कि अगर इस कहानी की अगली फिल्म बनती है तो उसमें उनका रोल ज्यादा बड़ा हो सकता है. ‘हनुमान अंश’ को ट्रिलॉजी के तौर पर आगे बढ़ाने की योजना बताई गई है.

फिल्म का बॉक्स ऑफिस बना ‘चमत्कार’

‘हनुमान अंश’ ने शुरुआत में भले ही बहुत शोर नहीं मचाया, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म को दर्शकों का सपोर्ट मिलने लगा. वर्ड ऑफ माउथ ने इसकी रफ्तार बढ़ाई और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा खेल दिखाया जिसकी शायद शुरुआत में किसी ने उम्मीद नहीं की थी.

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हनी बख्शी ने खुद फिल्म की कमाई को ‘चमत्कार’ बताया है. फिल्म सातवें हफ्ते में भी सिनेमाघरों में बनी हुई है और 47वें दिन तक इसकी दुनियाभर की कमाई 366 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई. फिल्म की कामयाबी के बाद उन्हें सेना के मौजूदा और रिटायर्ड अधिकारियों से भी बधाई के मैसेज मिले.

अब भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर खुलकर बोलते हैं बख्शी

फिल्म में संत बने हनी बख्शी ने रिटायरमेंट के बाद सार्वजनिक जीवन में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखी है. वो कई लंबे इंटरव्यू में राष्ट्रीय सुरक्षा, कश्मीर ऑपरेशंस, TSD, अग्निवीर, खालिस्तान, मणिपुर संघर्ष और घरेलू कट्टरपंथ जैसे मुद्दों पर बात कर चुके हैं.

नवंबर 2025 में उन्होंने ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट में ‘द एनिमी विदिन’ विषय पर भी बात की थी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी वो सक्रिय हैं. कैमरे के सामने नीम करोली बाबा का शांत चेहरा दिखाने वाले कर्नल हनी बख्शी की असली जिंदगी में खुफिया ऑपरेशंस, सेना, जांच और राष्ट्रीय सुरक्षा की एक लंबी कहानी छिपी है.

एक तरफ सीक्रेट मिलिट्री यूनिट की कमान, दूसरी तरफ संत का किरदार- हनी बख्शी की ‘हनुमान अंश’ वाली एंट्री वाकई उनकी जिंदगी का सबसे अनोखा चैप्टर बन गई है.

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