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हर कमरे में अटैच टॉयलेट अशुभ! 7 जन्म तक पीछा नहीं छोड़ेगी गरीबी

टॉयलेट निर्माण के लिए तीन जोन उपयुक्त माने जाते हैं. इनमें पहला ईस्ट-साउथ-ईस्ट (ESE) है, जो पूर्व दिशा के ठीक बाद का स्थान है. दूसरा साउथ-साउथ-वेस्ट (SSW) है, जो दक्षिण दिशा के बाद वाला जोन माना जाता है. तीसरा वेस्ट-नार्थ-वेस्ट (WNW) है, जो पश्चिम दिशा के ठीक बाद का स्थान है.

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आज बड़े से लेकर छोटे मकानों तक लगभग हर कमरे के साथ अटैच टॉयलेट बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. (Photo: ITG)
आज बड़े से लेकर छोटे मकानों तक लगभग हर कमरे के साथ अटैच टॉयलेट बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. (Photo: ITG)

इंसान के मॉडर्न लाइफस्टाइल ने घरों के निर्माण और सुविधाओं में काफी बदलाव किया है. आज बड़े से लेकर छोटे मकानों तक लगभग हर कमरे के साथ अटैच टॉयलेट बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है. पहले जहां घर के टॉयलेट को मुख्य आवासीय हिस्से से अलग रखने की परंपरा थी. वहीं अब सुविधा और आधुनिकता के नाम पर एक ही घर में तीन से चार या उससे अधिक टॉयलेट होना सामान्य बात हो गई है. यही बदलाव कई घरों में वास्तु दोष का मुख्य कारण बन रहा है.

वास्तु शास्त्र में टॉयलेट को राहु के समान नकारात्मक ऊर्जा वाला स्थान माना जाता है. इसलिए घर में जिस स्थान पर टॉयलेट का निर्माण किया जाता है. वहां उस दिशा से जुड़ी ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. यदि टॉयलेट किसी सकारात्मक जोन में बना दिया जाए तो उस दिशा से संबंधित कार्यों में बाधाएं और परेशानियां उत्पन्न होने की मान्यता है. ऐसे घरों की आर्थिक स्थिति हमेशा गड़बड़ ही रहती है. यही कारण है कि घर में टॉयलेट की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उसका स्थान होता है.

इन दिशाओं में बना सकते हैं टॉयलेट
टॉयलेट निर्माण के लिए तीन जोन उपयुक्त माने जाते हैं. इनमें पहला ईस्ट-साउथ-ईस्ट (ESE) है, जो पूर्व दिशा के ठीक बाद का स्थान है. दूसरा साउथ-साउथ-वेस्ट (SSW) है, जो दक्षिण दिशा के बाद वाला जोन माना जाता है. तीसरा वेस्ट-नार्थ-वेस्ट (WNW) है, जो पश्चिम दिशा के ठीक बाद का स्थान है.

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इन तीनों जोन में टॉयलेट का निर्माण करने से अनुकूल परिणाम मिलते हैं. इसलिए घर का नक्शा बनाते समय टॉयलेट की जगह पहले से निर्धारित करना चाहिए. ताकि बाद में सुविधा के लिए उसे किसी गलत दिशा में बनाने की मजबूरी न आए.

किन दिशाओं में न बनाएं टॉयलेट?
टॉयलेट के लिए कुछ दिशाओं को विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है. इनमें सबसे प्रमुख नार्थ-ईस्ट यानी ईशान कोण और साउथ-वेस्ट यानी नैऋत्य दिशा हैं. इन दोनों स्थानों पर टॉयलेट बनाने से बचना चाहिए. ईशान कोण घर की सकारात्मक ऊर्जा, विचारों, ज्ञान और आध्यात्मिकता से जुड़ा माना जाता है. ऐसे स्थान पर टॉयलेट होने से इस क्षेत्र की ऊर्जा प्रभावित होती है. वहीं दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता, नियंत्रण और घर की मजबूती से जोड़ा जाता है. यहां टॉयलेट होने पर पारिवारिक स्थिरता और निर्णय क्षमता से संबंधित परेशानियां आती है.

गलत दिशा में टॉयलेट तो क्या करें?
यदि किसी घर में पहले से गलत दिशा में टॉयलेट बना हुआ है तो बिना विशेषज्ञ सलाह के तोड़-फोड़ या बदलाव करने के बजाय पहले पूरे घर के वास्तु का विश्लेषण करना चाहिए. कुछ दिशाओं में बने टॉयलेट के लिए वास्तु उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन ईशान और दक्षिण-पश्चिम में बने टॉयलेट का होना सबसे गंभीर स्थिति है.

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