Best Time To Visit Mandir: हिंदू धर्म में मंदिर जाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने और मन को शांत करने का एक दिव्य माध्यम माना गया है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि मंदिर जाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है सुबह या शाम?
शास्त्रों और पुराणों में देव दर्शन और पूजन के लिए समय का विशेष विधान बताया गया है. आइए पंडित शैलेंद्र पांडेय जी से जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार मंदिर जाने का सबसे सही समय क्या है और किस समय दर्शन करने से क्या फल मिलता है.
सुबह मंदिर जाना: ब्रह्म मुहूर्त और प्रातः काल
शास्त्रों में सुबह के समय मंदिर जाना सर्वोत्तम माना गया है. उत्तम समय सुबह 4 बजे से लेकर सूर्योदय के समय तक. इस दौरान सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: प्रातः काल वातावरण शुद्ध, शांत और सात्विक ऊर्जा से भरपूर होता है. इस समय मंदिर की घंटियों, शंख ध्वनि और मंतोच्चारण से उत्पन्न तरंगें मन और मस्तिष्क को सकारात्मकता से भर देती हैं.
दिन की शुभ शुरुआत: सुबह भगवान के दर्शन और आशीर्वाद से दिन की शुरुआत करने पर पूरे दिन कार्यों में सफलता मिलती है और मन में उत्साह बना रहता है. इस समय मंदिर में भीड़ कम होती है, जिससे आप एकाग्रचित्त होकर ईश्वर का ध्यान लगा सकते हैं.
शाम को मंदिर जाना: संध्या काल
यदि व्यस्तता के कारण आप सुबह मंदिर नहीं जा पाते हैं, तो शाम का समय भी देव दर्शन के लिए बहुत शुभ माना जाता है. उत्तम समय सूर्यास्त से ठीक 45 मिनट पहले से लेकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक. दरअसल, दिनभर की दौड़-भाग और मानसिक तनाव के बाद शाम को आरती के समय मंदिर जाने से मन को असीम शांति मिलती है.
संध्या आरती का पुण्य: शाम की आरती में शामिल होने और दीपक की लौ के दर्शन करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है.
किस समय भूलकर भी मंदिर न जाएं?
शास्त्रों के अनुसार, कुछ ऐसे समय भी बताए गए हैं जब मंदिर जाना या मूर्तियों का स्पर्श करना वर्जित होता है.
दोपहर का समय
दोपहर के समय भगवान का विश्राम काल (शयन काल) माना जाता है. इस दौरान कई प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस समय पूजा या दर्शन करने से विश्राम में बाधा पहुंचती है.
रात्रि काल
शयन आरती के बाद भगवान को विश्राम कराया जाता है. इसलिए रात के समय मंदिर में घंटियां बजाना या दर्शन के लिए जाना अनुचित माना गया है.
ग्रहण और सूतक काल
सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के दौरान और सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं.
शास्त्रों के अनुसार नियम व सावधानियां
स्पर्श का नियम- सुबह स्नान के बाद ही भगवान की प्रतिमा को स्पर्श करें. शाम को यदि आप बिना स्नान किए जा रहे हैं, तो हाथ-पैर और मुंह अच्छे से धोकर ही मंदिर में प्रवेश करें और प्रतिमा को छुए बिना केवल दर्शन करें.
परिक्रमा का समय- शाम के समय मंदिर की परिक्रमा करना शुभ होता है, लेकिन ध्यान रहे कि सूर्यास्त के बाद शिवलिंग की परिक्रमा या तुलसी पूजन में दीपक जलाने के नियम का पालन करें.
घंटी बजाने का नियम- दोपहर में या रात के समय जब मंदिर बंद हो, तब कभी भी घंटी न बजाएं.