घर की अलग-अलग दिशाओं का संबंध जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से माना जाता है. यही वजह है कि व्यक्ति जिस प्रोफेशन, नौकरी या व्यवसाय से जुड़ा हो, उससे संबंधित दिशा का विशेष ध्यान रखना लाभकारी होता है. यदि उस दिशा में वास्तु संबंधी असंतुलन हो तो कार्यक्षेत्र में मन न लगना, अवसरों में कमी, निर्णय लेने में परेशानी या तरक्की में रुकावट जैसी दिक्कतें आती हैं. इसलिए घर में अपने प्रोफेशन से संबंधित दिशा को भी व्यवस्थित रखना जरूरी है.
नौकरीपेशा लोगों के लिए उत्तर दिशा खास
यदि आप सरकारी या निजी नौकरी से जुड़े हैं तो घर की उत्तर दिशा का विशेष ध्यान रखें. वास्तु में उत्तर दिशा को करियर और कार्यक्षेत्र में मिलने वाले अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. यह दिशा सकारात्मक और व्यवस्थित रहे तो नौकरी में नए अवसर और आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ती हैं.
इसके विपरीत उत्तर दिशा में रसोई, टॉयलेट या अग्नि तत्व से जुड़े अत्यधिक प्रभाव होने को वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता. विशेष रूप से लाल, नारंगी, गुलाबी या पीले जैसे तेज रंगों का अधिक प्रयोग भी इस दिशा के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. यदि नौकरी में बार-बार अस्थिरता, असंतोष या अवसरों की कमी महसूस हो रही है तो घर की उत्तर दिशा का वास्तु निरीक्षण जरूर करना चाहिए.
सर्विस प्रोवाइडर के लिए उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा
डॉक्टर, वकील, सलाहकार, कंसलटेंट, अकाउंटेंट या किसी अन्य प्रकार की सेवा प्रदान करने वाले लोगों के लिए उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे प्रोफेशन में व्यक्ति की विशेषज्ञता, सलाह और लोगों के साथ जुड़ाव ही उसकी पहचान बनते हैं. इसलिए इस दिशा को साफ, हल्का और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है. इस क्षेत्र में टॉयलेट या रसोई होने के साथ लाल, नारंगी, गुलाबी और पीले रंगों का अत्यधिक प्रयोग वास्तु के अनुसार अनुकूल नहीं माना जाता. यदि सर्विस आधारित काम में लगातार क्लाइंट संबंधी परेशानी, काम में रुकावट या अपेक्षित परिणाम न मिल रहे हों तो इस दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए.
एजुकेशन से जुड़े लोग ईशान कोण पर दें ध्यान
शिक्षक, प्रोफेसर, कोचिंग संचालक, शिक्षण संस्थान से जुड़े लोग या शिक्षा संबंधी किसी भी व्यवसाय में कार्यरत लोगों के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण का विशेष महत्व माना गया है. वास्तु में ईशान कोण को बुद्धि, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से संबंधित दिशा माना जाता है. इसलिए शिक्षा से जुड़े लोगों को इस स्थान को हमेशा साफ-सुथरा, खुला और व्यवस्थित रखने का प्रयास करना चाहिए.
इन तीनों दिशाओं को जल तत्व से संबंधित माना जाता है. इसलिए यहां अग्नि और भूमि तत्व का अत्यधिक प्रभाव, रसोई, टॉयलेट अथवा लाल, नारंगी, गुलाबी और पीले रंगों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग वास्तु की दृष्टि से संतुलन बिगाड़ने वाला माना जाता है. प्रोफेशन के अनुसार संबंधित दिशा की स्थिति को समझकर घर के वास्तु में आवश्यक संतुलन बनाया जा सकता है. दिशा का सही रखरखाव कार्यक्षेत्र में सकारात्मक वातावरण बनाने के साथ व्यक्ति के आत्मविश्वास और प्रगति के लिए भी सहायक माना जाता है.