Surya Grahan 2026 Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है. इसका आरम्भ भारतीय समय के अनुसार, रात 09.04 बजे होगा. इस सूर्य ग्रहण का मध्य समय (पीक टाइम) रात 11.16 बजे पर होगा. ग्रहण का समापन 13 अगस्त को देर रात 01.27 बजे होगा. यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के संयोग में पड़ रहा है. यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा और न ही इसका सूतक काल यहां लागू होगा. इसलिए भारत में रहने वाले लोगों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं रहने वाला है. साल के इस आखिरी सूर्य ग्रहण से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी यहां लाइव पढ़ें...
तुला राशि- तुला राशि वालों को कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी से बचना चाहिए. आनन-फानन में किए गए कार्यों के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं.
वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के रुके काम पूरे होने और प्रोफेशन में आगे बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं.
धनु राशि- धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण सामान्य परिणाम लेकर आने वाला है. आपको न तो ज्यादा फायदा होगा और न ही ज्यादा नुकसान
कर्क राशि- कर्क राशि वालों को मानसिक तनाव से बचने, बड़े फैसलों में धैर्य रखने और नौकरी या कारोबार में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है.
सिंह राशि- सिंह राशि वालों को खर्च, क्रोध और विवाद से बचने की सलाह है. धनु राशि के जातकों को निवेश, नौकरी बदलने और बड़े जोखिम वाले फैसलों में सावधानी रखनी होगी.
कन्या राशि-कन्या राशि वालों को करियर में तरक्की और धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं.
मेष राशि- मेष राशि वालों को परिवार, प्रॉपर्टी और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी.
वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को गलत संगति से बने और आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की सलाह है.
मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों को वाणी पर नियंत्रण और प्रॉपर्टी से जुड़े बड़े फैसलों में सतर्कता रखनी होगी.
भारत में रहने वाले लोगों पर इस सूर्य ग्रहण का काई प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण यहां दिखाई ही नहीं देगा. ग्रहण के समय भारत में रात होगी. इसी वजह से भारत में ग्रहण की दृश्यता और सूतक के नियम लागू नहीं होंगे. जब कोई सूर्य ग्रहण भारत में दिखता है तो सूतक काल के नियम 12 घंटे पहले लागू हो जाते हैं.
12 अगस्त का सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे से लेकर देर रात 1:27 बजे तक लगने वाला है. इस दौरान रात 10:28 बजे लेकर रात 12:04 बजे ग्रहण का मध्य काल रहेगा. सूर्य ग्रहण. रात करीब 11.16 बजे अपने पीक पर होगा. इस समय ही दुनिया पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देख सकेगी.
सूर्य ग्रहण के समय मंगल और शनि एक दूसरे से केंद्र में स्थित हैं. पंचम भाव में ग्रहण लगा हुआ है. राहु और मंगल निकट अंशों में हैं. ज्योतिषविदों का कहना है कि इस ग्रहण से दुनिया भर में जलीय और प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं. बाढ़ या ग्लेशियर पिघलने जैसे आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है. सत्ता में उच्च पदों पर बैठे लोगों की समस्या बढ़ेगी. सत्ताधारियों के खिलाफ जनता का विरोध बढ़ सकता है.
ग्रहण की अवधि में कुछ भी खाने-पीने से बचें. कोई महत्वपूर्ण या नया काम शुरू न करें. सूर्य ग्रहण को खुली आखों से बिल्कुल न देखें. इसे फिल्टर ग्लास की मदद से देखा जा सकता है. सूर्य की सीधी किरणों के संपर्क में आने से बचें. नुकीली या धारदार वस्तुओं के प्रयोग से बचें. ग्रहण की अवधि में फल या सब्जियां काटने-छीलने से बचें. छोंक, तड़का या खाना बनाने से बचें.
भगवान की आराधना और मंत्र जाप करें. शांत मन से पूजा-पाठ करें. गर्भवती महिलाएं इस दौरान घर के अंदर रहें. ग्रहण समापन के बाद स्नान करें. ग्रहण के अगले दिन सुबह सूर्य से जुड़ी चीजों का दान करें.
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है. मान्यता है कि स्वरभानु नामक राक्षस जिसका सिर धड़ से अलग होने के बाद वो राहु कहलाया था. अमावस्या के दिन सूर्य देव को ग्रस लेता है.
खगोलविदों के अनुसार, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है. जहां ये छाया पड़ती है, वहां या तो सूर्य दिखाई नहीं देता या फिर सूर्य का बड़ा हिस्सा काला दिखाई देने लगता है. इसी खगोलीय घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं.
यह सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में दिखेगा. ग्रहण का मुख्य मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी रूस से होकर गुजरेगा. ऐसे में स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण देखा जा सकेगा. दुनिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में ग्रहण आंशिक रूप से भी दिखाई देने वाला है.