Surya Grahan 2026 Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण खत्म हो गया है. इसका आरम्भ भारतीय समय के अनुसार, रात 09.04 बजे हुआ. ग्रहण का समापन देर रात 01.27 बजे हुआ. इस सूर्य ग्रहण का मध्य समय (पीक टाइम) रात 11.16 बजे पर हुआ. यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र में लगा था. यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं था और न ही इसका सूतक काल यहां लागू हुआ. इसलिए भारत में रहने वाले लोगों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा.
ग्रहण की अवधि में कुछ भी खाने-पीने से बचें.
ग्रहण के दौरान कोई महत्वपूर्ण या नया काम शुरू न करें.
सूर्य ग्रहण को खुली आखों से बिल्कुल न देखें.
सूर्य की सीधी किरणों के संपर्क में आने से बचें.
नुकीली या धारदार वस्तुओं के प्रयोग से बचें.
ग्रहण की अवधि में फल या सब्जियां काटने-छीलने से बचें.
छोंक, तड़का या खाना बनाने से बचें.
भगवान की आराधना और मंत्र जाप करें.
ग्रहण के दौरान शांत मन से पूजा-पाठ करें.
ग्रहण समापन के बाद स्नान करें.
ग्रहण के अगले दिन सुबह सूर्य से जुड़ी चीजों का दान करें
सूर्य ग्रहण आज रात 09 बजकर 04 मिनट पर आरंभ होगा. देर रात 01 बजकर 27 मिनट इसका समापन हो जाएगा. इस बीच रात 10:28 बजे से लेकर रात 12:04 बजे तक मध्य काल रहेगा. ऐसे में रात 11 बजकर 16 मिनट पर सूर्य ग्रहण अपने पीक पर होगा.
नहीं, साल के ये आखिरी सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है. इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. सूतक काल उन्हीं जगहों पर लागू होता है, जहां सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ता है.
वैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य ग्रहण को खुली आंखों से देखना सुरक्षित नहीं होता है. इसे आंखों के रेटिना को नुकसान हो सकता है. इसलिए ग्रहण को हमेशा धूप वाले चश्मे या फिल्टर ग्लास की मदद से ही देखना चाहिए. आप इसे दूरबीन की मदद से भी देख सकते हैं. इसके अलाव, किसी बर्तन में पानी भरकर ग्रहण की परछाई उसमें देखना भी सुरक्षित है.
ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण के वक्त देवगुरु कर्क राशि में उदय और शनि देव मीन राशि वक्री रहेंगे. ग्रहों के इस दुर्लभ और शक्तिशाली महासंयोग का देश-दुनिया और सभी राशियों पर गहरा असर पड़ेगा. एक तरफ गुरु का उदय होना शुभता और नई ऊर्जा का प्रतीक है, तो दूसरी तरफ शनि का वक्री होना कड़े अनुशासन, मेहनत और सतर्कता का संकेत दे रहा है.
इस बार अगस्त के महीने में दो ग्रहण पड़ने वाले हैं. पहले 12 अगस्त को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. इसके बाद 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण लगेगा. सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि और चंद्र ग्रहण पूर्णिमा तिथि पर ही लगता है. अमावस्या और पूर्णिमा तिथि में 15 दिन का अंतर होता है.
ग्रहण के दौरान मन को शांत रखने के लिए ध्यान लगाएं और भगवान के मंत्रों का जाप करें. इस दौरान ऊं घृणि सूर्याय नमः, ऊं सूर्याय नमः, सूर्य स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा अपने इष्ट देव या गुरु मंत्र का ध्यान भी किया जा सकता है.
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव उन्हीं स्थानों पर माना जाता है, जहां यह दिखाई देता है. ऐसे में भारत में इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. यानी मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे, खान-पान सामान्य रूप से जारी रहेगा.
सूर्य ग्रहण वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि दोनों से ही बहुत खास माना जाता है.
आज सूर्य ग्रहण की पीक टाइमिंग रात 11 बजकर 16 मिनट रहेगी और आसमान में पूर्ण सूर्य ग्रहण का दृश्य रात 10 बजकर 29 मिनट पर दिखेगा. इसी वक्त चंद्रमा, सूर्य के लगभग 90% हिस्से को ढक देगा. हालांकि, भारत के लोग आसमान में यह खूबसूरत नजारा नहीं देख पाएंगे.
आज लगने वाले सूर्य ग्रहण का प्रभाव दुनिया की प्राकृतिक घटनाओं पर देखने को मिल सकता है. कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है. साथ ही, राजनीति और सत्ता के क्षेत्र में भी देखने को मिल सकता है. उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं और सत्ता में बदलाव की स्थिति बन सकती है. भारत की राशि भी कर्क मानी जाती है, इसलिए देश में आंतरिक मतभेद और जनता तथा सरकार के बीच विवाद बढ़ने की संभावना बताई गई है. इसके अलावा महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा और बंगाल जैसे तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संकट या राजनीतिक हलचल बढ़ सकती है. ज्योतिषीय आकलन में दुर्घटनाओं, विस्फोट या आतंकवादी गतिविधियों जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है.
सूर्य ग्रहण आज रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू हो जाएगा और इस ग्रहण का समापन 13 अगस्त की रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा. इस ग्रहण की अवधि करीब 4 घंटे 24 मिनट की रहेगी. क्योंकि यह ग्रहण भारत में आज नहीं नजर आएगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा.
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है. इसलिए गर्भवती महिलाओं, बच्चों या बुजुर्गों को किसी खास नियम का पालन करने की जरूरत नहीं है. आप सामान्य दिनों की तरह खान-पान कर सकते हैं. घर से बाहर जाने पर भी कोई रोक-टोक नहीं है. भगवान की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान भी निसंकोच किए जा सकते हैं.
सूर्य ग्रहण की अवधि में भगवान सूर्य के मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. यह सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के संयोग में लग रहा है. ऐसे में गरीब और जरूरतमंदों को तिल, आटा, चीनी, चावल, दूध, वस्त्र, अन्न या धन का दान करें. हरियाली अमावस्या के दिन एक पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है.
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण चतुर्ग्रही योग में लगने जा रहा है. यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा. संयोगवश कर्क राशि में एकसाथ चार ग्रह भी बैठे हुए हैं. 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु चारों ग्रह कर्क राशि में विराजमान रहने वाले हैं. ज्योतिषविदों का कहना है कि ऐसा दुर्लभ संयोग सालों बाद बना है.
साल का ये आखिरी सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के संयोग में लग रहा है. हरियाली अमावस्या पर स्नान-दान और पितृ पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. बहुत से लोग चिंतित हैं कि सूर्य ग्रहण के चलते वह ये सारे धार्मिक अनुष्ठान कैसे पूरे करेंगे. इस बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीपति त्रिपाठी ने बताया है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है. इसलिए आप किसी भी अबूझ घड़ी में स्ना-दान और पितृ पूजन कर सकते हैं. आपके किसी अनुष्ठान पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव नहीं होगा.
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, अगर भारत का कोई व्यक्ति किसी ऐसे देश या क्षेत्र में रह रहा है, जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है तो वहां स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार सूतक और ग्रहण से जुड़े नियम लागू होंगे. इन जगहों पर लोगों को पूजा-पाठ या भगवान की प्रतिमा के स्पर्श से बचना चाहिए. जोखिम भरे कार्यों से बचें. नग्न आंखों से सूर्य ग्रहण को न देखें. गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग विशेष तौर पर अपना ख्याल रखें.
सूर्य ग्रहण का सूतक काल लगने के बाद शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं. इसके अलावा, इस दौरान पूजा-पाठ या भगवान की प्रतिमा का स्पर्श भी वर्जित होता है. सूतक में खान-पान, सब्जी काटना-छीलना, छोंका-तड़का लगाना या जोखिम भरा काम भी नहीं करना चाहिए. सूतक काल में गर्भवती महिला, बच्चों और वृद्धजनों को भी विशेष ख्याल रखना चाहिए.
12 अगस्त को लगने वाले साल के आखिरी सूर्य ग्रहण का सूतक भारत में मान्य नहीं होगा. मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान होने पर ही उसका सूतक यहां लागू होता है. सूर्य ग्रहण दिखाई देने पर उसका सूतक काल 12 घंटे पहले लागू हो जाता है.
सूर्य ग्रहण आरंभ: 12 अगस्त को रात 09 बजकर 04 मिनट
सूर्य ग्रहण समापन: 13 अगस्त को देर रात 01 बजकर 27 मिनट
मध्य काल: 12 अगस्त को रात 10:28 बजे 13 अगस्त को रात 12:04 बजे तक
पीक टाइम: 12 अगस्त को रात करीब 11 बजकर 16 मिनट पर
12 अगस्त के सूर्य ग्रहण को खगोलविदों ने बहुत खास बताया है. जैसे-जैसे चंद्रमा सूर्य के सामने आता जाएगा, सूर्य का बड़ा हिस्सा उसकी छाया में छिपता चला जाएगा. यह सूर्य ग्रहण जहां दिखाई देगा, वहां लोग दिन में रात जैसा अनुभव करेंगे. इस दौरान चंद्रमा सूर्य का करीब 90 फीसदी हिस्सा ढक लेगा. इसके बाद ऐसा सूर्य ग्रहण करीब 64 साल बाद लगेगा.
12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण यूरोप के कुछ हिस्सों और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र से एकदम साफ दिखाई देगा. ब्रिटेन, स्पेन, आइसलैंड और ग्रीनलैंड उन प्रमुख जगहों में शामिल हैं, जहां यह ग्रहण बिल्कुल साफ दिखाई देने वाला है.
साल का ये आखिरी सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या पर लग रहा है. यह दुर्लभ संयोग पूरे 18 साल बाद बन रहा है. इससे पहले श्रावण मास की अमावस्या पर ऐसा संयोग साल 2008 में देखा गया था.
सूर्य ग्रहण को खुली आंखों से देखना सुरक्षित नहीं है. इसे नग्न आंखों से देखने पर आंखों के रेटिना को नुकसान हो सकता है. सूर्य ग्रहण का नजारा देखने के लिए धूप के चश्मे या फिल्टर ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए. इसे दूरबीन की सहायता से भी देखा जा सकता है.
मकर राशि- मकर राशि वालों को जीवनसाथी के साथ विवाद से बचने और खर्चों को नियंत्रित रखने की सलाह दी गई है.
कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों को शत्रुओं और बड़े आर्थिक फैसलों से सावधान रहना होगा. इन राशियों के लिए ग्रहण के दौरान धैर्य और संयम को महत्वपूर्ण बताया गया है.
मीन राशि- मीन राशि वालों को भी आने वाले समय में बड़े निवेश और नौकरी बदलने जैसे फैसलों में सावधानी रखने की सलाह दी गई है.
तुला राशि- तुला राशि वालों को कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी से बचना चाहिए. आनन-फानन में किए गए कार्यों के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं.
वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों के रुके काम पूरे होने और प्रोफेशन में आगे बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं.
धनु राशि- धनु राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण सामान्य परिणाम लेकर आने वाला है. आपको न तो ज्यादा फायदा होगा और न ही ज्यादा नुकसान
कर्क राशि- कर्क राशि वालों को मानसिक तनाव से बचने, बड़े फैसलों में धैर्य रखने और नौकरी या कारोबार में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है.
सिंह राशि- सिंह राशि वालों को खर्च, क्रोध और विवाद से बचने की सलाह है. धनु राशि के जातकों को निवेश, नौकरी बदलने और बड़े जोखिम वाले फैसलों में सावधानी रखनी होगी.
कन्या राशि-कन्या राशि वालों को करियर में तरक्की और धन लाभ के अवसर मिल सकते हैं.
मेष राशि- मेष राशि वालों को परिवार, प्रॉपर्टी और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी.
वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों को गलत संगति से बने और आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की सलाह है.
मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों को वाणी पर नियंत्रण और प्रॉपर्टी से जुड़े बड़े फैसलों में सतर्कता रखनी होगी.
भारत में रहने वाले लोगों पर इस सूर्य ग्रहण का काई प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण यहां दिखाई ही नहीं देगा. ग्रहण के समय भारत में रात होगी. इसी वजह से भारत में ग्रहण की दृश्यता और सूतक के नियम लागू नहीं होंगे. जब कोई सूर्य ग्रहण भारत में दिखता है तो सूतक काल के नियम 12 घंटे पहले लागू हो जाते हैं.
12 अगस्त का सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे से लेकर देर रात 1:27 बजे तक लगने वाला है. इस दौरान रात 10:28 बजे लेकर रात 12:04 बजे ग्रहण का मध्य काल रहेगा. सूर्य ग्रहण. रात करीब 11.16 बजे अपने पीक पर होगा. इस समय ही दुनिया पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देख सकेगी.
सूर्य ग्रहण के समय मंगल और शनि एक दूसरे से केंद्र में स्थित हैं. पंचम भाव में ग्रहण लगा हुआ है. राहु और मंगल निकट अंशों में हैं. ज्योतिषविदों का कहना है कि इस ग्रहण से दुनिया भर में जलीय और प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं. बाढ़ या ग्लेशियर पिघलने जैसे आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है. सत्ता में उच्च पदों पर बैठे लोगों की समस्या बढ़ेगी. सत्ताधारियों के खिलाफ जनता का विरोध बढ़ सकता है.
ग्रहण की अवधि में कुछ भी खाने-पीने से बचें. कोई महत्वपूर्ण या नया काम शुरू न करें. सूर्य ग्रहण को खुली आखों से बिल्कुल न देखें. इसे फिल्टर ग्लास की मदद से देखा जा सकता है. सूर्य की सीधी किरणों के संपर्क में आने से बचें. नुकीली या धारदार वस्तुओं के प्रयोग से बचें. ग्रहण की अवधि में फल या सब्जियां काटने-छीलने से बचें. छोंक, तड़का या खाना बनाने से बचें.
भगवान की आराधना और मंत्र जाप करें. शांत मन से पूजा-पाठ करें. गर्भवती महिलाएं इस दौरान घर के अंदर रहें. ग्रहण समापन के बाद स्नान करें. ग्रहण के अगले दिन सुबह सूर्य से जुड़ी चीजों का दान करें.
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है. मान्यता है कि स्वरभानु नामक राक्षस जिसका सिर धड़ से अलग होने के बाद वो राहु कहलाया था. अमावस्या के दिन सूर्य देव को ग्रस लेता है.
खगोलविदों के अनुसार, जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है. जहां ये छाया पड़ती है, वहां या तो सूर्य दिखाई नहीं देता या फिर सूर्य का बड़ा हिस्सा काला दिखाई देने लगता है. इसी खगोलीय घटना को सूर्य ग्रहण कहते हैं.
यह सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में दिखेगा. ग्रहण का मुख्य मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी रूस से होकर गुजरेगा. ऐसे में स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण ग्रहण देखा जा सकेगा. दुनिया के कुछ अन्य क्षेत्रों में ग्रहण आंशिक रूप से भी दिखाई देने वाला है.