भगवान शिव का प्रिय महीना श्रावण मास चल रहा है. इस महीने भोलेनाथ के भक्त पवित्र स्थलों से जल लेकर पदयात्रा करते हैं और घर के आस-पास मौजूद शिवालयों में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. हालांकि इस पवित्र यात्रा में शामिल कई कांवडियों के स्वभाव से लोग खुश नहीं हैं. उत्तराखंड के चमोली स्थिति रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी ने भी नाराजगी जाहिर की है, जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी गुस्से में लोगों को कांवड़ का सही अर्थ समझा रहे हैं.
वायरल हो रहे इस वीडियो में रुद्रनाथ मंदिर के पुजारी लोगों से कह रहे हैं, 'क्या होती है कांवड़ बताओ? सावन का महीना सबसे पवित्र महीना है हिंदू धर्म का. और तुम लोगों ने इसका क्या मजाक बनाकर रख दिया है.' पुजारी ने आगे भड़कते हुए कहा- 'शराब पीकर मंदिर के प्रांगण में मां-बहन की गालियां देते हो. यह कांवड़ है तुम्हारी?'
वीडियो में आगे पुजारी कहते हैं, 'तुम में से यहां कितने कांवडिये हैं? जरा बताओ कि कांवड़ में जल लाने के कितने नियम होते हैं. बताओ सावन का महीना कैसा होता है. सावन में जो भी भक्त कांवड़ लाता है वो लहसुन-प्याज नहीं खाता है. शराब नहीं पीता है. चरस नहीं पीता है. उसके संस्कार कितने कठिन होते हैं. बताओ ये सारे नियम कौन पूरे करता है.'
इसके बाद पुजारी ने कहा, 'तुम क्यों धर्म को बदनाम करने में लगे हो. भोले ऐसे होते हैं क्या? भगवान शिव गुंडे थे क्या? कांवड़ के नाम पर तुम लोगों ने क्या मजाक बनाकर रख दिया है. यहां मंदिर में खड़े होकर सबको मां-बहन की गालियां दे रहे हो और फिर खुद को कांवड़िया बता रहे हो. कांवड़िये की कुछ मर्यादाएं क्या होती है जरा बताओ तो... क्यों भगवान शिव को जल चढ़ाया जाता है?'
तीर्थस्थलों का मजाक बना रहे लोग
इससे पहले भी रुद्रनाथ के पुजारी का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था. इसमें वह लोगों को समझाते हुए कह रहे थे कि धार्मिक स्थल को पार्क बनाकर रख दिया है. गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड, बच्चे सब घूम रहे हैं. तीर्थ स्थल की मर्यादा को तो समझो. इनकी कुछ मर्यादाएं होती हैं. बच्चा भी माता-पिता की इजाजत के बगैर उनके कमरे में दाखिल नहीं होता है. और लोगों ने भगवान के घर का मजाक बनाकर रख दिया है. शिव का दोष 21 पीढ़ियों तक नहीं जाता है, इसलिए अपने कर्म सुधार लो.