scorecardresearch
 

Maa Chhinnamasta: कौन हैं मां छिन्नमस्ता? जिन्होंने खुद काट लिया था अपना सिर, पढ़ें रहस्यमयी कथा

Maa Chhinnamasta: मां छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या मानी जाती हैं. उनकी तस्वीर में वे अपने कटे हुए सिर को हाथ में लिए दिखाई देती हैं. उनके शरीर से रक्त की तीन धाराएं निकलती हैं.

Advertisement
X
मां छिन्नमस्ता का रहस्य (Photo: ITG)
मां छिन्नमस्ता का रहस्य (Photo: ITG)

Maa Chhinnamasta: दस महाविद्याओं में मां छिन्नमस्ता का छठा स्थान माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां छिन्नमस्ता शक्ति, साहस और त्याग का प्रतीक हैं. उन्हें तंत्र साधना की प्रमुख और उग्र देवियों में गिना जाता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, मां छिन्नमस्ता की पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन उनकी उग्र तांत्रिक साधना हर किसी के लिए नहीं मानी जाती. ऐसे में अगर आप मां छिन्नमस्ता की पूजा करते हैं, तो इससे जुड़े नियमों को जानना जरूरी है. आइए जानते हैं मां छिन्नमस्ता की पूजा का महत्व और पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

मां छिन्नमस्ता का स्वरूप कैसा है?

मां छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या मानी जाती हैं. उनकी तस्वीर में वे अपने कटे हुए सिर को हाथ में लिए दिखाई देती हैं. उनके शरीर से रक्त की तीन धाराएं निकलती हैं. मान्यता है कि इनमें से एक धारा मां के अपने मुख में और बाकी दो उनकी सहायिकाओं के मुख में जाती हैं. इन तीन धाराओं को इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना नाड़ियों से जोड़कर देखा जाता है. मां छिन्नमस्ता को कुछ स्थानों पर चिंतपूर्णी माता के नाम से भी जाना जाता है.

मां छिन्नमस्ता की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडे के अनुसार, मां छिन्नमस्ता की कठिन तांत्रिक साधना खुद से नहीं करनी चाहिए. इसके लिए अनुभवी गुरु का मार्गदर्शन जरूरी माना जाता है. हालांकि भक्त पूरे श्रद्धा के साथ मां की पूजा कर सकते हैं. वे मां का ध्यान भी कर सकते हैं और मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं.

Advertisement

मां छिन्नमस्ता की पूजा कब करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में मां छिन्नमस्ता की पूजा करना शुभ माना जाता है. कुछ लोग दीपावली, पूर्णिमा, अमावस्या और शुक्रवार को भी मां की पूजा करते हैं. पूजा में लाल फूल देवी को जरूर अर्पित करें. 

मां छिन्नमस्ता की पौराणिक कथा

धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार मां पार्वती अपनी दो सहेलियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गई थीं. इसी दौरान दोनों सहेलियों को बहुत तेज भूख लगने लगी. उन्होंने मां पार्वती से कुछ खाने के लिए मांगा, लेकिन देवी उस समय जल-क्रीड़ा में मग्न थीं और उन्होंने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. कुछ देर बाद जब दोनों की भूख बर्दाश्त से बाहर होने लगी, तो उन्होंने मां से कहा कि मां अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए कुछ भी कर सकती है, यहां तक कि अपना रक्त भी दे सकती है.

कथा के अनुसार, सहेलियों की बात सुनकर मां पार्वती ने अपना सिर काट लिया. इसके बाद उनके शरीर से खून की तीन धाराएं निकलीं. इनमें से दो धाराएं उनकी सहेलियों के मुंह में गईं और तीसरी धारा से मां ने खुद अपनी भूख मिटाई. मान्यता है कि इसी घटना के बाद मां पार्वती के इस रूप को मां छिन्नमस्ता कहा जाने लगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement