भारतीय शेयर बाजार सोमवार को गिरावट पर कारोबार कर रहा है. इस बीच, शुगर स्टॉक में गिरावट देखने को मिली है. बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड, EID पैरी, डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज, त्रिवेनी इंजीनियरिंग, बजाज हिंदुस्तान शुगर और श्री रेणुका शुगर्स जैसी चीनी सेक्टर की कंपनियों के शेयर सोमवार को शुरुआती कारोबार में 7% तक गिर गए,
यह गिरावट तब आई है, जब सरकार ने तेल कंपनियों को 2026/27 आपूर्ति वर्ष के लिए पेट्रोल में मिश्रण के लिए इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन को शून्य करने का निर्देश दिया. सरकार ने यह फैसला चीनी के बढ़ते दामों को कम करने और घरेलू चीनी आपूर्ति की रक्षा करने के साथ-साथ अपने नेशनलवाइज पेट्रोल मिक्स प्रोग्राम को जारी रखने के उद्देश्य से उठाया गया है.
बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर भी बिखरे
आज चीनी क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले शेयरों में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (4.12%), श्री रेणुका शुगर्स (6%), ईआईडी पैरी (3%), डालमिया भारत शुगर (6%) और त्रिवेनी इंजीनियरिंग (3.2%) के शेयर शामिल थे. बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर मौजूदा सत्र में 4.12% गिरकर 693 रुपये पर आ गए. चीनी कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 14,916 करोड़ रुपये हो चुका है.
इसी तरह, डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 6% गिरकर 452.40 रुपये पर आ गए. ऐसे में इस चीनी कंपनी का बाजार पूंजीकरण घटकर 3819 करोड़ रुपये हो गया. ईआईडी पैरी के शेयर भी 3% गिरकर 678 रुपये पर आ गए. ऐसे में इस कंपनी का मार्केट कैप 12,152 करोड़ रुपये रहा. वहीं त्रिवेनी इंजीनियरिंग के शेयरों में 3.2% की गिरावट आई और वे 242.35 रुपये पर पहुंच गए. कंपनी का मार्केट कैप 5518 करोड़ रुपये रहा.
7 फीसदी से ज्यादा गिरा हिंदुस्तान शुगर
श्री रेणुका शुगर्स के शेयर भी शुरुआती कारोबार में 6 फीसदी गिरकर 20.70 रुपये पर आ गए. चीनी कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 4478 करोड़ रुपये हो गया है. बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर 7.42% गिरकर 19.69 रुपये पर आ गए. कंपनी का मार्केट कैप घटकर 4817 करोड़ रुपये हो गया.
सरकार के इस फैसले से क्या होगा असर?
इस फैसले से चीनी मिलों की बाजार स्थितियों के अनुसार गन्ने और गुड़ को चीनी उत्पादन और इथेनॉल निर्माण के बीच मोड़ने की सुविधा कम हो जाती है, जिसका मतलब है कि कंपनियों का प्रॉफिट कम हो जाएगा और मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है. इसी सेंटिमेंट के हावी होने के कारण शुगर शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. इस कदम का उद्देश्य घरेलू चीनी आपूर्ति को बढ़ावा देना और कीमतों को कम करना है, जो दुनिया के सबसे बड़े चीनी कंज्यूमर बाजार भारत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)