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Diwali 2026: दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा साथ करना क्यों है जरूरी? जानें धार्मिक मान्यता

Diwali 2026: दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों की पूजा एक साथ क्यों की जाती है? आइए जानते हैं लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा करने का महत्व और इसकी वजह.

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 मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा का महत्व (Photo: ITG)
मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा का महत्व (Photo: ITG)

Diwali 2026: दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है. हर साल यह पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन लोग घरों और दुकानों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की भी परंपरा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? दरअसल, इसके पीछे धार्मिक मान्यता और एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. आइए जानते हैं लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा करने का महत्व और इसकी खास वजह.

दिवाली पर लक्ष्मीजी के साथ क्यों पूजे जाते हैं गणेशजी?

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ के देवता हैं. जीवन में धन कमाना जितना जरूरी है, उसे सही तरीके से खर्च करना और संभालना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. इसके लिए अच्छी समझ और सही फैसले लेने की क्षमता होना जरूरी है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल धन होने से जीवन में सुख-समृद्धि नहीं आती, बल्कि उसे सही ढंग से इस्तेमाल करने के लिए बुद्धि और विवेक भी होना चाहिए. यही वजह है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन भक्त मां लक्ष्मी से धन-समृद्धि और गणेशजी से बुद्धि-विवेक का आशीर्वाद मांगते हैं. इस तरह लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा धन के साथ सद्बुद्धि के महत्व को भी दर्शाती है.

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मां लक्ष्मी और गणेशजी से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को अपने धन और वैभव पर अभिमान हो गया था. तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि भले ही संसार में हर कोई उनकी कृपा पाना चाहता है, लेकिन मातृत्व के बिना उनका जीवन अधूरा है. भगवान विष्णु की यह बात सुनकर मां लक्ष्मी उदास हो गईं. मां लक्ष्मी को दुखी देखकर माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया. इससे लक्ष्मीजी बेहद प्रसन्न हुईं और उन्होंने गणेशजी को अपना पुत्र स्वीकार कर लिया. कहा जाता है कि इसके बाद मां लक्ष्मी ने वरदान दिया कि जो भी भक्त उनकी पूजा करेगा, उसे भगवान गणेश की आराधना भी जरूर करनी होगी. ऐसा करने से ही भक्त को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा.

रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का महत्व

रिद्धि और सिद्धि को भगवान गणेश की पत्नियां माना जाता है. रिद्धि समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक हैं, जबकि सिद्धि सफलता और उपलब्धियों से जुड़ी मानी जाती हैं. मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को रिद्धि-सिद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है. वहीं, शुभ और लाभ को रिद्धि-सिद्धि का पुत्र माना जाता है. शुभ का अर्थ मंगल और कल्याण से है, जबकि लाभ का मतलब फायदा, उन्नति और तरक्की होता है. यही वजह है कि दिवाली के मौके पर कई लोग अपने घरों, दुकानों और पूजा स्थलों के प्रवेश द्वार पर 'शुभ-लाभ' लिखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
 

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