देवी चित्रलेखा देश के उन प्रसिद्ध कथावाचकों में से एक हैं, जिनके लाखों फॉलोअर्स हैं. इनके प्रवचन सोशल मीडिया पर खूब वायरल होते हैं. चित्रलेखा ने एक हालिया पॉडकास्ट में आध्यात्मिक विषयों पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने प्रेम और मोह के बीच अंतर को समझाया. उन्होंने कहा कि परिवार या पति के साथ आपका मोह हो सकता है. लेकिन वो प्रेम नहीं है. प्रेम की परिभाषा अलग है. उन्होंने इनके बीच के फर्क को बारीकी से समझाया है.
पॉडकास्ट में देवी चित्रलेखा से पूछा गया कि मोह और प्रेम में क्या अंतर है. कैसे तय करें कि हमें कृष्ण से प्रेम है, मोह नहीं? चित्रलेखा ने इसका जवाब देते हुए कहा, 'कृष्ण से मोह नहीं हो सकता, क्योंकि मोह शरीर से जुड़ा होता है. कृष्ण से तो हमारी आत्मा जुड़ी है और आत्मा से जुड़ाव ही प्रेम होता है.'
इसी में एक सवाल जोड़ते हुए उनसे पूछा गया कि हमें किससे प्रेम है और किससे मोह, ये कैसे तय करें? इसके जवाब में चित्रलेखा ने कहा, 'संसार में सिर्फ मोह होता है. प्रेम बहुत कम ही देखने को मिलता है. प्रेम केवल भगवान से हो सकता है, क्योंकि संसार में सबकुछ शर्तों पर चलता है. हर इंसान की कुछ मांगें होती हैं. आपको दूसरों के हिसाब से खुद को बदलना पड़ता है. जैसा वो चाहते हैं- वैसा पहनो, वैसा खाओ, वैसे ही रहो. ये सब बातें मोह के दायर में आती हैं. संसार के ज्यादातर रिश्ते मोह पर ही निर्भर हैं. इसलिए संसार से मोह होता है और भगवान से प्रेम.'
पति से प्रेम है या मोह?
चित्रलेखा विवाहित हैं. जब उनसे मजाकिया अंदाज में पूछा गया कि आपको पति से मोह है या प्रेम? तो इस पर उनका जवाब आया, 'बिल्कुल! आप इसे मोह कह सकते हैं. शुद्ध प्रेम या निष्काम प्रेम दुनिया में किसी से नहीं होता है. आप दो दिन के लिए किसी की बात मानना बंद कर दो. उनकी इच्छा के विरुद्धा काम करना शुरू कर दो तो सब रिश्ते टूट जाएंगे. मां-बाप, पति-पत्नी, भाई-बहन सब रिश्ते टूट जाएंगे. लेकिन प्रेम में ऐसा नहीं है. प्रेम में आपको कोई पैरों से कुचल भी डाले, तब भी आपके मन में उनके लिए जरा भी द्वेष नहीं आएगा.'
रिश्तों में मां का दर्जा सबसे ऊपर
उन्होंने आगे कहा, 'रिश्तों की कतार में मां का प्रेम सबसे ऊपर होता है. दुनिया में किसी भी रिश्ते की तुलना में मां के प्यार में स्वार्थ सबसे कम होता है. इसलिए कहते भी हैं कि भगवान दिव्य रूप में हर वक्त आपके सामने नहीं आ सकते. इसलिए उन्होंने मां को बनाया. एक मां जन्म से लेकर अपनी अंतिम सांस तक संतान के लिए सोचती है. लेकिन फिर भी मेरे लिए प्रेम शब्द केवल भगवान से जुड़ा है.'